हर सियासी वार बेकार

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धामी हर बार और मजबूत
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की राजनीतिक पाठशाला में पांच साल से अगर मुख्यमंत्री टॉपर आ रहे हैं तो उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि उनकी स्वच्छ और पारदर्शी शैली के वे भी कायल हैं। मुख्यमंत्री ने दोनो बडे राजनेताओं को वचन दे रखा है कि वह साफ सुथरी सरकार चलायेंगे और राज्य को एक नया राज्य बनाने के लिए वह हमेशा अगली पक्ति में खडे रहेंगे। पांच साल से राज्य के मुख्यमंत्री भाजपा की बडी लीडरशिप का खुला आशीर्वाद ले रहे हैं और उसी का परिणाम है कि आज राज्य के मुख्यमंत्री की झोली में हर वो बडी विकास योजना गिफ्ट के रूप में आ रही है जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। मुख्यमंत्री राजनीति के वो दबंग राजनेता बन गये हैं जिसे देखकर राज्य की जनता यह कहने से कभी नहीं चूकती कि ऐसे मुख्यमंत्री को एक लम्बे दशक तक सरकार चलाने के लिए जिम्मेदारी सौंपी रहे जिससे उत्तराखण्ड हर क्षेत्र में विकास की उडान पर उडता चला जाये।
उत्तराखंड की राजनीति में पिछले पांच वर्षों ने एक बड़ा संदेश दिया है कि केवल सरकार बनाना ही चुनौती नहीं होती, बल्कि शीर्ष नेतृत्व का लगातार विश्वास बनाए रखना उससे भी बड़ी परीक्षा होती है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के समर्थकों का मानना है कि उन्होंने इसी कसौटी पर खुद को साबित किया है। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह का लगातार विश्वास मुख्यमंत्री पर बना रहना इस बात का संकेत माना जाता है कि संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल कायम है। समर्थकों के अनुसार, मुख्यमंत्री धामी ने सत्ता संभालने के बाद केवल राजनीतिक बयानबाजी पर भरोसा नहीं किया, बल्कि प्रशासनिक फैसलों के जरिए अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश की। सरकार की कार्यशैली में पारदर्शिता, निर्णय लेने की गति और कानून-व्यवस्था पर सख्त रुख को उनकी सबसे बड़ी ताकत बताया जाता है। यही वजह है कि भाजपा संगठन में भी उन्हें एक ऐसे चेहरे के रूप में देखा जाता है, जिसने उत्तराखंड में नेतृत्व परिवर्तन की पुरानी राजनीतिक परंपरा को विराम देने में भूमिका निभाई।
समर्थकों का दावा है कि मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय नेतृत्व से किए गए सुशासन और विकास के वादे को निभाने का प्रयास किया है। इसी कारण उत्तराखंड को सड़क, रेल, रोपवे, धार्मिक पर्यटन, निवेश, आधारभूत ढांचे और अन्य विकास परियोजनाओं में लगातार केंद्र का सहयोग मिलता रहा। उनका मानना है कि राज्य को मिली कई बड़ी परियोजनाएं केंद्र और राज्य के बेहतर समन्वय का परिणाम हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का एक वर्ग यह भी मानता है कि पांच वर्षों तक नेतृत्व में स्थिरता ने प्रशासनिक मशीनरी को लगातार काम करने का अवसर दिया। इससे कई ऐसे निर्णय आगे बढ़ सके, जो बार-बार नेतृत्व बदलने की स्थिति में प्रभावित हो सकते थे। समर्थकों के अनुसार, समान नागरिक संहिता, नकल विरोधी कानून और निवेश को बढ़ावा देने जैसे कदमों ने मुख्यमंत्री की राजनीतिक पहचान को और मजबूत किया।
हालांकि उत्तराखंड के सामने आज भी रोजगार, पलायन, स्वास्थ्य, शिक्षा और पर्वतीय क्षेत्रों के विकास जैसी बड़ी चुनौतियां मौजूद हैं। इन मुद्दों पर सरकार की सफलता का आकलन समय और जनता करेगी। लेकिन मुख्यमंत्री के समर्थकों का कहना है कि यदि राजनीतिक स्थिरता और विकास की गति इसी तरह बनी रही, तो उत्तराखंड आने वाले वर्षों में देश के अग्रणी राज्यों की कतार में और मजबूती से खड़ा हो सकता है। समर्थकों का विश्वास है कि मजबूत नेतृत्व, केंद्र के साथ बेहतर समन्वय और तेज निर्णय क्षमता ही आने वाले समय में उत्तराखंड की सबसे बड़ी राजनीतिक और विकासात्मक ताकत बन सकती है।

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