हरिद्वार नगर निगम भूमि घोटाले में

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भ्रष्टाचारियों पर धामी कड़क
विजिलेंस ने उत्तर प्रदेश, हरिद्वार, रूद्रप्रयाग, हल्द्वानी, देहरादून, हरिद्वार में गुनाहगारों के यहां मारे छापे
डीआईजी प्रहलाद मीणा के एक्शन से मची खलबली
देहरादून/हरिद्वार। हरिद्वार में नगर निगम भूमि घोटाले को लेकर मुख्यमंत्री कडक हो चुके हैं और उन्हांेने दो टूक अल्टीमेटम दे दिया है कि एक-एक भ्रष्टाचारी को किसी भी कीमत पर बक्शा नहीं जायेगा। इस घोटाले में गुनाहगारों पर शिकंजा कसने के लिए विजिलेंस के डीआईजी ने बडा एक्शन शुरू कर दिया है और विजिलेंस की आठ टीमों ने लखनऊ, हरिद्वार, रूद्रप्रयाग, हल्द्वानी, देहरादून में गुनाहगारों के घरों और ठिकानों पर बडा सर्च ऑपरेशन शुरू किया तो उससे भ्रष्ट अफसरों में खलबली मच गई। विजिलेंस ने घरों में बेनामी सम्पत्तियों के दस्तावेज से लेकर उनके बैंक खातों का लेखाजोखा खंगालने के लिए जिस शैली में ऑपरेशन चलाया उससे इस घोटाले में शामिल एक-एक गुनाहगार में खलबली मची हुई है और साफ दिखाई दे रहा है कि इस घोटाले का हर एक गुनाहगार बेपर्दा होगा कि उसने अपने कार्यकाल में क्या-क्या सम्पत्तियां और दौलत कमाई है।
हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद घोटाले की जांच में आज सतर्कता अधिष्ठान के डीआई जी प्रहलाद मीणा ने घोटाले के दस गुनाहगारों के घरों और ठिकानों पर बडा सर्च ऑपरेशन चलाने के लिए आठ टीमों का गठन किया और इन टीमों को लखनऊ से लेकर देहरादून तक ऑपरेशन चलाने के लिए आगे किया और उसके बाद यह टीमें गुनाहगारों के सारे इतिहास भूगोल को खंगालने के मिशन में सुबह से ही जुट गई थी। मुख्यमंत्री की सख्त शैली के चलते भ्रष्टाचारियों पर बडा एक्शन हो रहा है और उससे साफ नजर आ रहा है कि मुख्यमंत्री के कार्यकाल में कोई भी भ्रष्टाचारी बच नहीं पायेगा। उल्लेखनीय है कि यह मामला हरिद्वार नगर निगम द्वारा भूमि खरीद में कथित अनियमितताओं और सरकारी धन के दुरुपयोग से जुड़ा है। आरोप है कि नगर निगम के लिए भूमि खरीद के दौरान बाजार मूल्य से कहीं अधिक कीमत पर सौदा किया गया, जिससे सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये की क्षति पहुंची। मामला सामने आने के बाद यह प्रदेश के सबसे चर्चित वित्तीय घोटालों में शामिल हो गया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष और समयबद्ध जांच के निर्देश दिए थे। इसके बाद शासन ने मामले की सतर्कता जांच कराने का निर्णय लिया। जांच के दौरान कई अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य संबंधित लोगों की भूमिका संदेह के घेरे में आई, जिसके आधार पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया। आज न्यायालय से प्राप्त सर्च वारंट के आधार पर सतर्कता अधिष्ठान की आठ टीमों ने सभी नामजद आरोपियों के आवासों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। माना जा रहा है कि इस कार्रवाई से जांच को महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य मिल सकते हैं। विजिलेंस ने संकेत दिए हैं कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह कार्रवाई राज्य सरकार की भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति के तहत अब तक की सबसे महत्वपूर्ण जांचों में से एक मानी जा रही है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर चलते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद प्रकरण में बड़ी और कड़ी कार्रवाई की है। प्रकरण में तत्कालीन नगर आयुक्त हरिद्वार नगर निगम वरुण चौधरी को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त करने की संस्तुति की गई है। वहीं, तत्कालीन जिलाधिकारी हरिद्वार कर्मेंद्र सिंह को अपने पदीय दायित्वों एवं कर्तव्यों के समुचित निर्वहन में गंभीर लापरवाही का दोषी मानते हुए उनके विरुद्ध दीर्घ शास्ति (मेजर पनिशमेंट) अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया है। दोनों अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई के लिए कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग को संस्तुति भेजी जा रही है। इसके अलावा, उस समय कार्यरत एसडीएम अजयवीर सिंह के विरुद्ध परनिंदा प्रविष्टि दर्ज करने तथा उनकी तीन वेतनवृद्धियां रोकने के निर्देश भी दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट कहा है कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी स्तर पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने दोहराया कि शासन-प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनहित सर्वोपरि है तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई जारी रहेगी। धामी सरकार की इस कार्रवाई को राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है, जिसने स्पष्ट संदेश दिया है कि जनधन के दुरुपयोग और पद के दुरुपयोग को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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