संकट में फ्रंट फुट पर धुरंधर

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निहंगों के टकराव को कराया शांत
खुद मोर्चे पर आगे रहने में दिलेरी दिखाते धामी
देहरादून। उत्तराखण्ड में जब भी किसी बड़े संकट या संवेदनशील स्थिति ने दस्तक दी है, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रशासनिक स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाने का प्रयास किया है। हाल ही में चमोली क्षेत्र में निहंगों और स्थानीय लोगों के बीच हुए विवाद के बाद प्रदेश का माहौल संवेदनशील हो गया था। इसके बाद पंजाब की ओर से निहंग जत्थे के उत्तराखण्ड की ओर बढ़ने की सूचना मिलने पर शासन और प्रशासन ने स्थिति पर लगातार नजर बनाए रही और मुख्यमंत्री ने निहंगों के टकराव को अपने विवेक से शंात कराकर यह साबित कर दिया कि वह राज्य में आने वाले हर संकट पर खुद फ्रंट फुट पर आकर दिलेरी के साथ उसका सामना करते हैं। निहंगों के साथ टकराव को शांत कराने पर एक बार फिर राजधानी की जनता मुख्यमंत्री को दिलेर मुख्यमंत्री का ताज पहना रही है।
सरकार की प्राथमिकता कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ किसी भी प्रकार के टकराव को रोकना रही। इसी क्रम में मुख्यमंत्री स्तर पर लगातार हालात की समीक्षा की गई और प्रशासनिक अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि स्थिति को शांति और संवाद के माध्यम से नियंत्रित किया जाए। राजधानी देहरादून का जिला प्रशासन और पुलिस लगातार सक्रिय रहे तथा सीमा क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई। प्रशासन ने बल प्रयोग के बजाय बातचीत का रास्ता चुना। वरिष्ठ अधिकारियों ने निहंग प्रतिनिधियों से संवाद स्थापित किया, उनकी बात सुनी और कानून व्यवस्था तथा यात्रा व्यवस्थाओं से जुड़े तथ्यों से उन्हें अवगत कराया। लंबी वार्ता के बाद स्थिति सामान्य बनाने की दिशा में सहमति बनी और जत्था वापस लौट गया। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान किसी बड़े टकराव की स्थिति पैदा नहीं हुई, जिसे प्रशासन अपनी बड़ी सफलता मान रहा है।
राज्य सरकार का कहना है कि उत्तराखण्ड की पहचान शांति, धार्मिक आस्था और सामाजिक सौहार्द की रही है। इसलिए किसी भी विवाद को बढ़ने देने के बजाय उसे समय रहते संवाद और कानून के दायरे में सुलझाना ही सरकार की प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री लगातार अधिकारियों के संपर्क में रहे और हर स्तर पर स्थिति की समीक्षा करते रहे ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना न हो। प्रशासनिक हलकों में भी इस बात की चर्चा रही कि संवेदनशील परिस्थितियों में त्वरित निर्णय, समन्वय और संवाद की रणनीति ने तनाव को बढ़ने से रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सरकार का संदेश स्पष्ट रहा कि उत्तराखण्ड में कानून व्यवस्था से कोई समझौता नहीं होगा, लेकिन हर संवेदनशील मामले का समाधान शांति, संयम और बातचीत के माध्यम से निकालने का पूरा प्रयास किया जाएगा। चमोली विवाद के बाद पैदा हुई परिस्थितियों में जिस तरह शासन, जिला प्रशासन और पुलिस ने समन्वित तरीके से काम किया, उससे एक बार फिर यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि राज्य सरकार किसी भी चुनौतीपूर्ण स्थिति में सक्रिय रहकर कानून-व्यवस्था बनाए रखने और प्रदेश में सामाजिक सौहार्द कायम रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

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