मोदी के स्वच्छ भारत संकल्प को आगे बढ़ाते धामी

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स्वच्छ भारत केवल अभियान नहीं परिवर्तन का राष्ट्रीय आंदोलन
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। भारत के राष्ट्रपिता ने जिस स्वच्छ और जागरूक भारत का सपना देखा था, आज वह सपना एक जनआंदोलन का रूप लेता दिखाई दे रहा है। गांधी का मानना था कि किसी भी राष्ट्र की वास्तविक प्रगति केवल आर्थिक विकास से नहीं, बल्कि उसके नागरिकों की सोच, व्यवहार और जीवनशैली से तय होती है। यही कारण था कि उन्होंने राजनीतिक स्वतंत्रता से पहले स्वच्छता को प्राथमिकता दी और इसे सभ्य समाज की पहली पहचान बताया।
गांधी का स्पष्ट मत था कि स्वच्छता केवल सफाई तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के संस्कार, अनुशासन, जिम्मेदारी और सामाजिक चेतना का दर्पण है। उनका मानना था कि जो समाज अपने घर, गांव, सड़क और सार्वजनिक स्थलों को स्वच्छ रखने की जिम्मेदारी नहीं निभा सकता, वह समृद्ध और विकसित समाज बनने का दावा भी नहीं कर सकता। इसलिए उन्होंने जीवनभर स्वच्छता को सामाजिक क्रांति का आधार माना। इसी विचारधारा को आगे बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देशभर में स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत की। इस अभियान का उद्देश्य केवल कूड़ा हटाना या शौचालय बनाना नहीं, बल्कि लोगों की सोच और आदतों में स्थायी बदलाव लाना है। स्वच्छ भारत अभियान ने देश के करोड़ों नागरिकों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने का कार्य किया है और इसे जनभागीदारी का सबसे बड़ा अभियान माना जाता है।
आज स्वच्छता केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी का विषय बन चुकी है। शहरों से लेकर गांवों तक, स्कूलों से लेकर सरकारी कार्यालयों तक, स्वच्छता को लेकर नई जागरूकता देखने को मिल रही है। ‘स्वच्छता ही सेवा’ का संदेश लोगों को यह समझाने का प्रयास कर रहा है कि साफ-सफाई केवल सरकार की नहीं, बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्वच्छ वातावरण न केवल स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है, बल्कि पर्यटन, निवेश और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देता है। स्वच्छ शहर और गांव किसी भी राज्य तथा देश की सकारात्मक पहचान बनते हैं। यही कारण है कि आज स्वच्छता को विकास की पहली शर्त माना जा रहा है।
गांधी के स्वच्छ भारत के सपने और प्रधानमंत्री मोदी के स्वच्छ भारत अभियान का मूल उद्देश्य एक ही हैकृऐसा भारत जहां स्वच्छता जीवन का हिस्सा बने, जिम्मेदारी बने और संस्कृति बने। जब तक हर नागरिक स्वच्छता को अपना कर्तव्य नहीं समझेगा, तब तक अभियान अपने अंतिम लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाएगा। स्वच्छ भारत का सपना तभी साकार होगा, जब प्रत्येक नागरिक अपने घर, मोहल्ले, गांव, शहर और सार्वजनिक स्थलों की स्वच्छता को अपनी जिम्मेदारी समझे। क्योंकि स्वच्छता केवल सफाई नहीं, बल्कि स्वस्थ, समृद्ध और विकसित भारत की मजबूत नींव है।

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