देहरादून(संवाददाता)। जन संघर्ष मोर्चा (शिक्षा का अधिकार अधिनियम) का दायरा आठवीं कक्षा से बढ़ाकर इंटरमीडिएट तक किये जाने को लेकर अपनी आवाज बुलंद करता आ रहा है और उसका कहना है कि ऐसा न होने से गरीब छात्रों के सामने एक बडा संकट आकर खडा हो रखा है। जन संघर्ष मोर्चा ने छात्रों की इस आवाज को सरकार तक पहुंचाने के लिए मुख्य सचिव के दफ्तर में दस्तक दी और उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षा का अधिकार अधिनियम का दायरा बढाकर कोटे को पच्चीस फीसदी से चालीस प्रतिशत तक करे जिससे कि गरीब बच्चों को इसका लाभ मिल सके। जन संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष ने मुख्य सचिव के सामने अपनी सारी बातें रखी और प्रधानमंत्री के नाम एक खत भी मुख्य सचिव को सौंपा। पढाई में भिन्नता होने के कारण इसका खामियाजा गरीब छात्रों को भुगतना पड़ रहा है।
जन संघर्ष मोर्चा अध्यक्ष एवं जीएमवीएम के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने मुख्य सचिव आनंद बर्धन से मुलाकात कर आरटीई (शिक्षा का अधिकार अधिनियम) का दायरा कक्षा आठ से बढाकर इंटरमीडिएट तक करने व कोटा पच्चीस फीसदी से बढाकर 35-4० फीसदी करने को लेकर प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा। नेगी ने कहा कि कहा कि वर्तमान में आरटीई (शिक्षा का अधिकार अधिनियम) के प्रावधानों के तहत आठवीं कक्षा तक निशुल्क शिक्षा मुहैया किए जाने हेतु केंद्र सरकार द्वारा प्रावधानित है, जो किसी भी सूरत में तर्कसंगत नहीं है। सरकार को इसको आठवीं कक्षा से बढाकर इंटरमीडिएट तक करना चाहिए,जिससे गरीब व मध्यम वर्गीय परिवार अपने बच्चों को अच्छी व गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मुहैया करा सकें। इसके साथ-साथ सरकार द्वारा इस प्रावधान के तहत पच्चीस फीसदी कोटा दाखिले हेतु निर्धारित है, जोकि नाकाफी हैय इसको बढाकर 35-4० फीसदी किए जाने की जरूरत है। नेगी ने कहा कि इस अधिनियम के तहत गरीब छात्रों को प्राइवेट व अन्य स्कूलों में आठवीं कक्षा तक तो नि:शुल्क शिक्षा मुहैया हो जाती है, लेकिन आठवीं के पश्चात छात्रों को या तो स्कूल छोडऩा पड़ता है या फिर सरकारी विद्यालयों में दाखिला लेना पड़ता है, जहां पढ़ाई -लिखाई में काफी भिन्नता होती है, जिस कारण उसका भविष्य खराब हो जाता है। सरकारी स्कूलों का हाल किसी से छिपा नहीं है। अगर सरकार इन गरीब छात्रों पर खर्च करेगी तो देश की दशा और दिशा दोनों बदल सकती है। प्रतिनिधि मंडल में प्रवीण शर्मा पिन्नी मौजूद थे।
