हीट वेव से निपटने के लिए धामी अलर्ट

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देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखण्ड में हीट वेव से निपटने के लिए मुख्यमंत्री अलर्ट हैं और उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री को आदेश दिया है कि हीट सम्बन्धित बीमारियों से होने वाली मौतों को रोकने के लिए तेजी के साथ काम किया जाये और जिलों में हाईहीट स्टोक, दवाओं की उपलब्धता और रोजाना इसके लिए रिर्पोटिंग अनिवार्य करें जिससे आम जनमानस को इस बात का पता रहे कि सरकार हीट वेव को लेकर कितनी अलर्ट है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी व स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल के दिशा-निर्देशों में उत्तराखंड का स्वास्थ्य विभाग भीषण गर्मी और संभावित हीट वेव से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद हो गया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की ओर से जारी एडवाइजरी के तहत सभी जिलाधिकारियों और मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को हीट-सम्बंधित बीमारियों की रोकथाम और प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। भारतीय मौसम विभाग द्वारा इस बार सामान्य से अधिक तापमान की संभावना जताए जाने के बाद राज्य सरकार ने इसे गंभीरता से लेते हुए समय रहते व्यापक रणनीति लागू कर दी है, ताकि जनहानि को न्यूनतम रखा जा सके और स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह तैयार रहें। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की ओर से जारी निर्देशों में सभी जिलाधिकारियों और मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को हीट-सम्बंधित बीमारियों की रोकथाम और प्रबंधन के लिए व्यापक तैयारियां सुनिश्चित करने को कहा गया है। भारतीय मौसम विभाग द्वारा मार्च से मई के बीच सामान्य से अधिक तापमान की संभावना जताए जाने के बाद यह एडवाइजरी और भी अहम हो गई है। सरकार का लक्ष्य है कि समय रहते ठोस कदम उठाकर हीट स्ट्रोक और इससे होने वाली मौतों को न्यूनतम किया जा सके।
सरकार ने अस्पतालों में विशेष इंतजाम किये हैं राज्य के जिला और उप-जिला अस्पतालों में हीटस्ट्रोक कक्ष स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं। इन कक्षों में मरीजों को तत्काल राहत देने के लिए कूलिंग सिस्टम, आइस पैक, ठंडे प्ट फ्लूइड और पर्याप्त वेंटिलेशन की व्यवस्था अनिवार्य की गई है। “पहले ठंडा करें, फिर परिवहन करें” प्रोटोकॉल को सख्ती से लागू करने पर जोर दिया गया है, ताकि गंभीर मरीजों की जान बचाई जा सके। इसके अलावा व्त्ै, इलेक्ट्रोलाइट्स और अन्य जरूरी दवाओं की 1०० प्रतिशत उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। स्वास्थ्य महकमा रोजाना निगरानी और रिपोर्टिंग कर आम जनमानस को सचेत करता रहेगा। हीट वेव के प्रभाव पर नजर रखने के लिए 1 मार्च 2०26 से दैनिक रिपोर्टिंग अनिवार्य कर दी गई है। सभी जिला इकाइयों को प्भ्प्च् प्लेटफॉर्म पर हीट-सम्बंधित मामलों की रिपोर्ट अपलोड करनी होगी। मरीज-स्तर की जानकारी संकलित करने के साथ-साथ संदिग्ध मौतों की जांच और ऑडिट भी किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग ने साफ किया है कि डेटा की गुणवत्ता और समयबद्ध रिपोर्टिंग में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार ने संवेदनशील वर्ग पर खास फोकस किया है एडवाइजरी में शिशुओं, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और बाहरी कार्य करने वाले श्रमिकों को सबसे अधिक जोखिम वाला वर्ग बताया गया है। इन समूहों के लिए विशेष जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। लोगों को दोपहर 12 से 3 बजे तक धूप से बचने, हल्के सूती कपड़े पहनने और नियमित रूप से पानी पीने की सलाह दी गई है। साथ ही ठंडे इलाकों से आने वाले लोगों को 1०-15 दिन का अनुकूलन समय देने की बात भी कही गई है। गर्मी के दौरान होने वाले सामूहिक आयोजनों और खेल गतिविधियों के लिए भी सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। दोपहर के समय बाहरी कार्यक्रमों से बचने और हर व्यक्ति के लिए पर्याप्त पेयजल की व्यवस्था अनिवार्य की गई है।

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