जननायक खण्डूरी को अंतिम विदाई में उमड़ा सैलाब
देहरादून से हरिद्वार तक थम गया वक्त
आवाम के दिलों में हमेशा जिंदा रहेंगे खण्डूरी
प्रमुख संवाददाता
देहरादून/हरिद्वार। उत्तराखण्ड की राजनीति के स्वर्णिम अध्याय और जन-जन के दिलों में बसने वाले जननायक भुवन चंद्र खंडूरी को अंतिम विदाई देने के लिए पूरा प्रदेश भावुक हो उठा। देहरादून स्थित उनके आवास से लेकर हरिद्वार के खड़खड़ी श्मशान घाट तक ऐसा जनसैलाब उमड़ा, जिसने यह साबित कर दिया कि खण्डूरी सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि जनता की आत्मा से जुड़े हुए व्यक्तित्व थे। उनके अंतिम दर्शन के लिए सुबह से ही हजारों लोगों की भीड़ उनके आवास के बाहर उमड़ पड़ी। हर आंख नम थी, हर चेहरा गमगीन और हर दिल में एक ही दर्द एक सच्चे, ईमानदार और निष्पक्ष नेता को खो देने का दर्द। देश के शीर्ष नेताओं ने दी श्रद्धांजलि और कहा कि आज ‘‘एक युग का अंत” भले ही खत्म हो गया लेकिन जननायक हमेशा लोगों के दिलों में जिंदा रहेंगे।
देश के उपराष्ट्रपति सीपी राधा कृष्णन, राज्यपाल गुरमीत सिंह, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सहित कई बड़े राजनीतिक नेताओं ने खण्डूरी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि आज उत्तराखण्ड ने उस नेता को खो दिया, जिसने राजनीति को सेवा और ईमानदारी का माध्यम बनाया। नेताओं के शब्दों में भी दर्द साफ झलक रहा था। “ऐसे नेता विरले ही होते हैं, जो पद से नहीं, अपने चरित्र और कार्यों से जनता के दिलों में राज करते हैं।”
देहरादून से हरिद्वार तक भावनाओं का सैलाब
जैसे ही अंतिम यात्रा देहरादून से हरिद्वार के लिए रवाना हुई, पूरा रास्ता मानो एक श्रद्धांजलि पथ बन गया। सड़क किनारे खड़े हजारों लोग अपने प्रिय नेता को अंतिम प्रणाम करने के लिए उमड़ पड़े। कहीं फूल बरसाए गए, कहीं लोगों ने हाथ जोड़कर नम आंखों से विदाई दी। हर दृश्य यह बता रहा था कि खण्डूरी का जनता से रिश्ता कितना गहरा था।
खड़खड़ी श्मशान घाट पर भावुक कर देने वाला मंजर
हरिद्वार के खड़खड़ी श्मशान घाट पर जब अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू हुई, तो माहौल बेहद भावुक हो गया। नेताओं से लेकर आम जनता तक, हर कोई इस पल में खुद को रोक नहीं पाया। आंसुओं के बीच “खण्डूरी अमर रहें” के नारे गूंजते रहे यह सिर्फ विदाई नहीं, बल्कि एक युग को सलाम था।
सादगी, ईमानदारी और अनुशासन की जीवित मिसाल
भुवन चंद्र खण्डूरी का जीवन एक आदर्श था। सेना की अनुशासित पृष्ठभूमि से लेकर राजनीति के सर्वोच्च पद तक, उन्होंने हर जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा और पारदर्शिता के साथ निभाया। उनकी पहचान एक ऐसे नेता की रही, जिसने कभी सिद्धांतों से समझौता नहीं किया और हमेशा जनता के हित को सर्वोपरि रखा।
जनता के दिलों में हमेशा जिंदा रहेंगे खण्डूरी
आज भले ही खण्डूरी इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी सादगी, उनके विचार और उनकी जनसेवा की भावना हमेशा उत्तराखण्ड के दिलों में जिंदा रहेगी। उनकी अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब इस बात का प्रमाण है कि नेता पद से नहीं, अपने कर्मों से महान बनते हैं।
