सियासतदारों को तांत्रिकों से उम्मीद

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बाहरी राज्यों में नेताओं की चलती पूजा!
किस्मत पर नहीं तंत्र पर अब भरोसा
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में पिछले कुछ वर्षों से काफी सियासतदारों को यह इल्म हो चुका है कि अगर उन्हें अपनी पसंद की कुर्सी चाहिए तो वह जनसेवा से नहीं बल्कि तांत्रिक विद्या से ही मिल सकती है और यही कारण है कि उत्तराखण्ड के दर्जनों सियासतदारों के साथ-साथ काफी अफसर भी अब तंत्रमंत्र पर अभेद विश्वास करते हुए महत्वपूर्ण पोस्टिंग पाने के लिए कुछ बाहरी राज्यों में तांत्रिकों की शरण लेकर वहां अपनी इच्छा पूरी करने के लिए तांत्रिक विद्या कराने में अभेद विश्वास रखने लगे हैं। उत्तराखण्ड के काफी सियासतदारों को अब अपनी किस्मत पर नहीं बल्कि तंत्र पर ज्यादा विश्वास हो चला है और यही कारण है कि उत्तराखण्ड के काफी सियासतदार राज्य से लेकर कुछ बाहरी राज्यों के तांत्रिकों व ज्योतिषियों की शरण में जाकर अपने भाग्य को उज्जवल बनाने के लिए वो सबकुछ कर रहे हैं जिस पर विश्वास भी नहीं किया जा सकता?
उत्तराखण्ड का इतिहास गवाह है कि जब भी सरकार सही दिशा में चलती है तो अचानक सरकार को अस्थिर करने का प्रपंच रचकर उसे कमजोर करने का खेल शुरू हो जाता है। उत्तराखण्ड में एक मात्र स्वर्गीय नारायण दत्त तिवारी ही ऐसे राजनेता देखने को मिले जिन्होंने अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा किया उसके अलावा उत्तराखण्ड का कोई भी पूर्व मुख्यमंत्री अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाया यह हैरान करने जैसा ही हमेशा दिखाई दिया। उत्तराखण्ड के अन्दर कुछ राजनेताओं को तंत्र मंत्र पर काफी विश्वास रहता है कि वह इसके सहारे अपनी नैया पार लगा लेंगे। उत्तराखण्ड के अन्दर सबकुछ बेहतर चल रहा है लेकिन इसके बावजूद भी कुछ राजनेताओं और कुछ अफसरों की आंखों में मलाईदार कुर्सी फटक रही है और इन कुर्सियों को पाने के लिए फिर तांत्रिकों का सहारा लिया जा सकता है इसमें कोई शंका नजर नहीं आती।
उत्तराखण्ड के अन्दर काफी राजनेता, सफेदपोश और दर्जनों अफसर ऐसे हैं जो इस बात को जान चुके हैं कि उनका भाग्य उनकी किस्मत से नहीं बल्कि तांत्रिकों के तंत्रमंत्र और ज्योतिषयों को अपनी कुंडली को सुनेहरा बनाने से ही बदलेगी। उत्तराखण्ड के गलियारों में हमेशा यह चर्चायें उफान पर रहती हैं कि उत्तराखण्ड के कुछ सियासतदार कभी राजस्थान तो कभी आसाम के तांत्रिक व ज्योतिषियों की शरण में रहकर अपनी गद्दी को बचाये रखने के लिए हमेशा आगे रहते हैं और काफी सियासतदार उन धार्मिक स्थलों पर भी अपना भाग्य हमेशा उदय रखने के लिए देवी के कुछ धार्मिक स्थलों पर अपना बडा अनुष्ठान और तंत्र विद्या कराने के लिए अगली पक्ति में खडे रहते हैं और उन्हें यह विश्वास है कि तंत्रमंत्र और ज्योतिष विद्या से हमेशा उनकी किस्मत सितारों की तरह बुलंद होती रही है। उत्तराखण्ड के अन्दर काफी बाबा ऐसे हैं जिनकी शरण में हमेशा राज्य के कुछ सियासतदार माथा टेकते हैं और अपनी कुर्सी को अभेद बनाने के लिए वह यज्ञ और तांत्रिक विद्या कराने के लिए हमेशा आगे ही रहते हैं। कुछ ज्योतिष भी मानते हैं कि राज्य के कुछ सियासतदार तंत्रमत्र और ज्योतिष विद्या से अपनी कुर्सी बचाने में सफल हो रहे हैं और कुछ अफसर भी ऐसे हैं जो सिस्टम के अन्दर अपने आपको पॉवरफुल बनाये रखने के लिए तांत्रिकों की शरण में गोपनीय रूप से रहते हैं।
उल्लेखनीय है कि उत्तराखण्ड का जन्म होने के बाद से ही देखने को मिलता रहा है कि काफी राजनेता और अफसर कुर्सी की चाहत के लिए तंत्र मंत्र का सहारा लेने का खेल बडे नाटकीय ढंग से खेलते रहे हैं जिसके चलते हमेशा यह बात उफान पर रहती है कि आखिरकार तांत्रिक विद्या का सहारा लेकर क्यों दूसरे की कुर्सी पर कब्जा करने के लिए काफी राजनेता और अफसर आगे आते हैं। उत्तराखण्ड में कई पूर्व मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल में उनकी सत्ता पर तांत्रिक विद्या कराने का प्रपंच कुछ राजनेताओं ने खेला था जिसकी गंूज हमेशा उत्तराखण्ड की वादियों में गूंजती रही और यह हमेशा बहस चली कि आखिरकार उत्तराखण्ड के अन्दर वो कौन से तांत्रिक मौजूद हैं जो कुछ राजनेताओं और अफसरों के इशारे पर अज्ञात स्थानों पर तांत्रिक विद्या के सहारे उन्हें पॉवरफुल बनाने का खेल खेलते रहे हैं। उत्तराखण्ड में लम्बे समय से फिर यह आशंकायें पनपने लगी है कि कुछ राजनेता और अफसर महत्वपूर्ण कुर्सियों पर आसीन होने के लिए पर्दे के पीछे रहकर अज्ञात स्थानों पर अपने राजदार तांत्रिकों के सहारे अपने मिशन में आगे बढ रहे हैं। हमेशा यह आशंकायें भी उठी कि जंगलों के भीतर व अज्ञात स्थानों पर तांत्रिक विद्या का काम बडे गोपनीय तरीके से चल रहा है और कुछ राजनेताओं को ऐसी कुर्सी की चाहत है जिस पर वह हमेशा आसीन होने का ख्वाब देखते रहते हैं लेकिन उनकी मुराद पूरी होते-होते रह जाती है वहीं काफी अफसर भी तांत्रिकों के सहारे मलाईदार कुर्सी पाने और अपनी कुर्सी को बचाये रखने के लिए तंत्र मंत्र का सहारा लेने के लिए आगे रहते हैं। तंत्र मंत्र में काफी राजनेता विश्वास रखते हैं और उन्हें इस बात का विश्वास रहता है कि कुछ तांत्रिकों के पास इतना बडा चमत्कार मौजूद रहता है कि उसके बल पर वह असम्भव को सम्भव बना देते हैं।

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