अब गंगासागर-टू-गंगोत्री/तीसरी पारी धामी!

0
6

पश्चिम बंगाल में भाजपा की धमाकेदार पहली बार फतह के बाद सीएम पुष्कर सिंह धामी के लिए 2027 की राह हुई अब और भी आसान
बस प्रदेश में भाजपा की जीत के आंकड़े को 2022 नहीं बल्कि वर्ष 2017 के पार पहुंचाने की ही चुनौती
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। चार मई 2026 केवल एक साधारण तारीख ही नहीं है, बल्कि देश में राजनीति के इतिहास में दर्ज एक वो तारीख है, जिसके लिए तत्कालीन जनसंघ के प्रवर्तक और भाजपा के युगपुरुष श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने अपने जीते-जी पश्चिम बंगाल के लिए भगवा के परचम का देख रखा था और इसको भाजपा ने कई दशकों से पूरी राजनीतिक ताकत लगाकर फतह कर भगवा का परचम फहराकर मुखर्जी के सपनों का बंगाल बनाने की दिशा में बस दो कदम (सरकार के शपथ लेते ही) दूर है। वहीं, गंगोत्री (उत्तराखंड) से गंगासागर (पश्चिम बंगाल) तक 2026 में भगवा का परचम फहराने के बाद अब 2027 में फिर उत्तराखंड में फरवरी महीने के आसपास होने वाले संभावित विधानसभा चुनाव भाजपा के लिए जहां बहुत ही आसान साबित हो सकते हैं, वहीं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तीसरी बार प्रदेश की कमान भी संभाल सकते हैं, क्योंकि इसके बहुत से कारण के साथ-साथ धामी और भाजपा संगठन के सामने वो खुला मैदान (कांग्रेस) भी है, जो फिलहाल गुटों में बंटकर बस अपनी ढपली और अपना राग ही अलापने में समय जाया करते दिख रहे हैं।
हां! पूरे प्रदेश में धुरंधर धामी के रूप में विख्यात मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को केवल 2017 के भाजपा के विजय के अपने आंकड़े (57 सीटों पर फतह) को और आगे बढ़ाने की ही रहेगी। … और जिस तरह से भाजपा संगठन के साथ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पूरे प्रदेश में विस चुनाव से एक साल पहले से ही ग्राउंड जीरो पर उतरना शुरू करते हुए लोगों की समस्याओं को फौरन निपटाने के सिलसिले के साथ ही ब्यूरोक्रेसी के पेच कसने का काम शुरू किया है, उसका फायदा 2027 के विधानसभा चुनाव में धुरंधर धामी के साथ ही भाजपा संगठन को भी मिलने से कोई रोक नहीं सकता। इसके अलावा सीएम धामी ने भाजपा संगठन के साथ कंधा से कंधा मिलाकर अभी से जमीनी स्तर पर काम शुरू करते हुए पसीना बहा रहे हैं, उसका अंजाम भी पश्चिम बंगाल की ऐतिहासिक फतह जैसे होने से कोई रोक नहीं सकता।
उधर, जिस तरह से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 2027 के विधानसभा चुनाव की सरकार के स्तर से अभी से ही धुरंधर तैयारियां जमीन पर उतरकर शुरू कर दिया है, वहीं प्रदेश का मुख्य विपक्षी दल और भाजपा को आमने सामने की टक्कर देने का ख्वाब देखने वाली कांग्रेस बस गुटों में ही बंटी हुई साफ नजर आ रही है। प्रदेश कांग्रेस के मुखिया समेत अन्य एक दूसरे को जहां नसीहत देने में ही समय जाया करते दिख रहे हैं, वहीं भाजपा पार्टी और सरकार के मुखिया धामी तीसरी बार भाजपा की सरकार काबिज करने के लिए प्रदेश के कोने-कोने को अभी से मथना शुरू कर दिया है, वहीं गुटों में बंटी कांग्रेस के पदाधिकारी टुकड़ों-टुकड़ों को एक करने में ही पसीना बहा रहे हैं।
वैसे देखा जाए तो पश्चिम बंगाल विधानसभा की 294 सीटों के लिए हुए चुनाव में भाजपा ने पहली बार 207 सीटों को फतह करते हुए 15 साल से बंगाल में काबिज मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को 80 सीटों पर समेटकर और सीएम बनर्जी को 15 हजार से ज्यादा वोटों से भाजपा के फायरब्रांड नेता और मुख्यमंत्री पद के सशक्त दावेदार शिवेंदु अधिकारी ने हराकर पूरे देश को जो संदेश दिया उसकी धमक अब उत्तराखंड में अभी से सुनाई देने लगी है, क्योंकि भाजपा ने बंगाल के 2021 के विस चुनाव में जहां 77 सीटें जीतीं थीं, वहीं 2026 में लंबी छलांग लगाते हुए 207 सीटों पर फतह किया, जबकि अभी फालता विधानसभा सीट पर 24 मई को पुनर्मतदान होगा। इसीलिए भाजपा ने बंगाल फतह के बाद श्गंगोत्री से गंगासागरश् तक भगवा का नारा दिया है, लेकिन 2027 के उत्तराखंड में होने वाले संभावित विधान सभा चुनाव में श्गंगासागर से गंगोत्रीश् का बिगुल बजेगा, बस गंगोत्री पहले की जगह गंगासागर पहले हो जाएगा और यही भाजपा संगठन को नए जोश से भरने का काम करेगा।

… तो 2027 में धुरंधर की तीसरी पारी
वैसे तो पूरे देश समेत उत्तराखंड में भाजपा की जो आंधी चल रही है उसको देखते हुए उत्तराखंड में 2027 के फरवरी माह में संभावित विधानसभा चुनाव में भाजपा की फतह को कोई नहीं रोक सकता, मगर थोड़ा बहुत काम जो संगठन और सरकार को जमीनी स्तर पर उतरकर करना होगा, वो 2022 में मिली सीटों की संख्या को 2017 की सीटों से ऊपर ले जाना होगा। 2017 के विधानसभा चुनाव में 70 विधानसभा सीटों में भाजपा को जहां 57 सीटों पर विजय मिली थी, वहीं 2022 में 10 सीटों का नुकसान हुआ था और 47 सीटें मिलीं थीं।

2022 का विस चुनाव धामी की अगुवाई वाली सरकार ने जीता था
वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की सरकार उत्तराखंड में बनी थी और सरकार के मुखिया के रूप में त्रिवेंद्र सिंह रावत ने 18 मार्च 2017 को कमान संभाली थी। कुछ समस्याओं के चलते त्रिवेंद्र ने 10 मार्च 2021 को सीएम पद से इस्तीफा दे दिया और भाजपा हाईकमान के निर्देश पर 10 मार्च 2021 को तीरथ सिंह रावत ने प्रदेश के सीएम के रूप में कमान संभाली, लेकिन श्फटी जींसश् के विवाद के बाद रावत ने चार माह (चार जुलाई 2021) बाद ही इस्तीफा दे दिया। इसके बाद पहली बार एक युवा पुष्कर सिंह धामी ने भाजपा हाईकमान के निर्देश पर चार जुलाई 2021 को प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली और 23 मार्च 2022 तक सीएम रहते हुए इन्हीं की अगुवाई में भाजपा ने विधान सभा चुनाव में परचम फहराया। इसका इनाम भी धामी को भाजपा हाईकमान ने दिया और दूसरी बार प्रदेश के मुख्यमंत्री की बागड़ोर उन्होंने संभाली। अब फिर से अगर कोई बड़ा राजनीतिक श्खेलश् प्रदेश में न हो तो फरवरी 2027 में होने वाला संभावित विधानसभा चुनाव भी धुरंधर धामी के नेतृत्व में भाजपा लड़ेगी। और चुनाव में भाजपा फतह करती है तो तीसरी बार भी मुखिया धामी ही बन सकते हैं। वैसे ये सब भविष्य की गर्त में है, लेकिन जिस तरह से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और भाजपा प्रदेश संगठन ने अभी से ताकत झोंकनी शुरू कर दी है, उससे किंतु परंतु कम है, बस 2017 और 2022 के जीत के आंकड़ों का ही तिलिस्म बाकी बचेगा?

देश में 2027 में छह विधानसभा चुनाव
देश में 2027 के शुरू में ही विधानसभा चुनाव का बिगुल बजना शुरू हो जाएगा। चार प्रदेशों उत्तर प्रदेश, मणिपुर, उत्तराखंड और पंजाब में विधानसभा का कार्यकाल मार्च 2027 में पूरा हो जाएगा और इससे पहले चुनाव कराना जरूरी होगा, लिहाजा साल की शुरुआत में केंद्रीय चुनाव आयोग चुनाव की तारीखों का ऐलान कर देगा। इन चार प्रदेशों के अलावा गुजरात और हिमाचल प्रदेश विधानसभा का कार्यकाल भी दिसम्बर 2027 में पूरा हो जाएगा और इसके पूर्व चुनाव यहां भी होने निश्चित हैं।

वर्ष 2017 में दलीय स्थिति
भाजपा-57
कांग्रेस-11
इंडिपेंडेंट-2

वर्ष 2022 में दलीय स्थिति
भाजपा-47
कांग्रेस-19
बसपा-2
इंडिपेंडेंट-2

LEAVE A REPLY