पोकलैंड से अवैध खनन का तांडव

0
7

तो क्या सिस्टम हो चुका है घृतराष्ट्र?
नदियों में पोकलैंड पर बैन लेकिन नदियों का चीर रही सीना
सीएम के विजन को आखिर कौन लगा रहा ग्रहण
कोटद्वार। मुख्यमंत्री ने राज्य की नदियों में अवैध खनन पर नकेल लगाने के आदेश दिये हुये हैं और दो टूक संदेश दे रखा है कि अगर कहीं पर भी अवैध खनन हो रहा हो तो उस पर सख्ती के साथ रोक लगाई जाये लेकिन हैरानी वाली बात है कि मुख्यमंत्री के आदेश को हवा में उडाते हुए खुलेआम कोटद्वार में पोकलैंड से नदी का सीना चीरा जा रहा है और उससे अवैध खनन का जो तांडव मच रहा है वह यह सवाल खडे कर रहा है कि क्या जनपद का सिस्टम घृतराष्ट्र हो गया है कि उसे नदी में चल रही पोकलैंड दिखाई नहीं दे रही। गजब की बात तो यह है कि जहां सुप्रीम कोर्ट ने नदियों में पोकलैंड मशीन से खनन पर रोक लगा रखी है वहीं सरेआम अगर पौडी के कोटद्वार में पोकलैंड से अवैध खनन का तांडव हो रहा है तो यह कई सवालों को जन्म दे रहा है कि आखिरकार वो कौन चेहरे हैं जिनके इशारे पर नदी में पोकलैंड उतर रही है और सिस्टम खामोश है। सिचाई विभाग के सहायक अभियंता ने पौडी के तहसील कोटद्वार क्षेत्रान्तर्गत खो नदी में चल रहे खनन को लेकर उपजिलाधिकारी को एक पत्र भी लिखा है इससे समझा जा सकता है कि अवैध खनन का तांडव किसके इशारे पर चल रहा है?

कोटद्वार में नदियों में पट्टों के नाम हो रहे अवैध खनन की शिकायत के बाद सिंचाई विभाग ने भी खनन मामले में गंभीर सवाल खड़े कर दिये हैं। गौरतलब है कि सरकार एक तरफ लगातार रिवर ड्रेजिंग के नाम पर हर साल पट्टे जारी कर रही है और साथ ही नदियों में कई स्थानों पर स्थाई पट्टे भी जारी किये हुए हैं। सूचना आयोग में इन्हीं पट्टों के संबंध में हुई अनियमितता की सूचना मामले में सामने आया कि पट्टों को जारी करने के लिए बनी नियमावली का संबंधित विभागों द्वारा अनदेखी कर पट्टों को जारी कर अवैध खनन करवाया जा रहा है और अवैध खनन में प्रतिबंधित पोकलैंड मशीनें लगा कर नदियों के प्रतिबंधित किनारों पर भी गहरे गड्ढे कर दिये गए हैं,जिससे नदी किनारे बने मकानों के साथ साथ सिंचाई विभाग की सुरक्षा दीवारों को भी खतरा पैदा हो गया है।
उत्तराखण्ड विकास पार्टी के अध्यक्ष मुजीब नैथानी ने जिलाधिकारी गढ़वाल को नदियों में चल रही अवैध पोकलैंड से नदियों में अंधाधुंध खनन किए जाने की वीडियो प्रेषित किए जाने के बाद सिंचाई विभाग द्वारा भी नदियों में हो रहे मानकों के विरुद्ध अवैध खनन की पुष्टि कर यह भी अवगत कराया है कि स्वीकृति के समय सिंचाई विभाग को पूछा ही नहीं गया और न ही अनुबंध की प्रति उपलब्ध कराई गई जिससे निर्गत पट्टों के सीमांकन का पता चल सके। अवैध खनन से सिंचाई विभाग की दीवारों को गंभीर खतरा पैदा हो गया है।

मुजीब नैथानी ने आरोप लगाया कि न तो पट्टों का सही सीमांकन किया गया है, न ही सीसीटीवी लगाए गए हैं और न ही धर्मकांटा लगाया गया है, उससे बावजूद खनन चलने दिया जा रहा है जो कि पुलिस प्रशासन की मिलीभगत की पुष्टि करता है। मुजीब नैथानी ने कहा कि खनन पर्यवेक्षक को अवैध खनन की शिकायत करने पर खनन पट्टा धारक शिकायतकर्ता के घर पहुँच जाते हैं, जो कि सुरक्षा की दृष्टि से बेहद खतरनाक बात है , ऐसे में किसी के साथ किसी अप्रिय घटना की जिम्मेदारी इन अधिकारियों की होगी।

LEAVE A REPLY