धामी के तीसरे नेत्र से नहीं बच पा रहे भ्रष्ट शैतान
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड के धाकड़ से धुरंधर का ताज पहन चुके मुख्यमंत्री ने अपने चार साल के कार्यकाल में भ्रष्टाचार के मगरमच्छों का जिस अंदाज में शिकार किया है उसके चलते एक-एक भ्रष्टाचारी जेल की सलाखों के पीछे पहुंच रहा है। मुख्यमंत्री के तीसरे नेत्र से रिश्वतखोर और भ्रष्टाचारियों की नाक में नकेल डालने का जो दौर शुरू कर रखा है उससे भ्रष्टाचार के शैतान मुख्यमंत्री की कार्यशैली से कांप रहे हैं और उन्हें इस बात का इल्म हो चुका है कि राज्य के अन्दर अब धुरंधर के आगे बचना उनके बस में नहीं है। मुख्यमंत्री ने दो टूक चेतावनी दे रखी है कि भ्रष्टाचार करने वाला चाहे कितना भी बडा क्यों न हो उसके खिलाफ सख्त कार्यवाही अमल में लाई जायेगी। देश के प्रधानमंत्री भी चार साल से मुख्यमंत्री की स्वच्छ कार्यशैली के कायल हैं और यही कारण है कि आज देश के अन्दर युवा मुख्यमंत्री पहले ऐसे राजनेता बन गये हैं जो प्रधानमंत्री के लाडले और सखा हैं।
यह सच है कि किसी राजनेता में काम करने की इच्छाशक्ति हो तो सिस्टम को बदला जा सकता है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपनी राजनीति की जब शुरूआत की तो उन्होंने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी के सानिध्य में काम किया और उन्होंने राज्य की अफसरशाही से लेकर प्रदेश की जनता की नब्ज पहचानी कि वह राजनेताओं से क्या उम्मीद करती है। आवाम के बीच एक लम्बे दशक तक रह चुके मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को जब राज्य के अन्दर सरकार की कमान मिली तो उन्होंने राज्य के अन्दर भ्रष्टाचार, घोटाले और माफियागिरी पर प्रहार करने का सबसे पहला ऑपरेशन किया। मुख्यमंत्री ने राज्यवासियों को यह संदेश दे दिया कि राज्य में वह एक-एक भ्रष्टाचारी को जेल की सलाखों के पीछे पहुंचायेंगे और जिन्होंने भ्रष्टाचार से अकूत दौलत कमाने का खेल, खेला है उनकी कुंडली खंगालकर उन पर ऐसा वार किया जायेगा कि उन्हें यह इल्म ही नहीं होगा कि मुख्यमंत्री इतना बडा एक्शन ले सकते हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने चार साल के कार्यकाल मंे भ्रष्टाचारियों की नाक में नकेल डालने का जो साहस दिखाया वह यह बता रहा है कि मुख्यमंत्री एक दबंग राजनेता हैं जो आवाम से किये गये एक-एक वायदे को पूरा करने के लिए हमेशा अगली पक्ति में खडे रहते हैं।
उत्तराखण्ड मंे पूर्व सरकारों के कार्यकाल में भ्रष्टाचार कर अकूत दौलत और बेनामी सम्पत्तियों का साम्राज्य खडा करने वाले राज्य के दर्जनों बडे और छोटे अफसरों में अब पुष्कर सिंह धामी के भ्रष्टाचारमुक्त राज्य के उद्धोष से खलबली मच गई है क्योंकि पुष्कर सिंह धामी ने भ्रष्टाचारियों के खिलाफ अपना तीसरा नेत्र खोल दिया है और यही कारण है कि राज्य की विजिलेंस के बिछाये चक्रव्यूह में आने वाले समय में अकूत और बेनामी सम्पत्तियों का किला खडा करने वालों को इस बात का इल्म हो जायेगा कि राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जिस जंग को लडने के लिए खुली चेतावनी दी है उसके चलते भ्रष्टाचार के दलदल में डूबे काफी बडे-बडे मगरमच्छ पुष्कर सरकार के निशाने पर आ जायेंगे और उसके बाद उन्हें इस बात का इल्म भी हो जायेगा कि जो काम किसी भी पूर्व सरकार के पूर्व मुख्यमंत्री नहीं कर पाये वह राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मात्र अल्प समय में ही करके दिखा दिया। उत्तराखण्ड का इतिहास रहा है कि हमेशा छोटे भ्रष्टाचारियों पर ही विजिलेंस ने नकेल लगाने के लिए अपने कदम आगे बढाये लेकिन जबसे पुष्कर सिंह धामी ने राज्य की विजिलेंस को ईडी और सीबीआई की तर्ज पर पॉवरफुल करने का ऐलान किया है तबसे विजिलेंस के अन्दर एक नया संचार देखने को मिल रहा है और उन्हें जिस तरह से पॉवरफुल किया जा रहा है उससे साफ नजर आ रहा है कि आने वाले कुछ समय के अन्दर भ्रष्टाचार के बडे-बडे मगरमच्छ विजिलेंस के शिकंजे में फसने शुरू हो गये हैं जो आज तक अपने आपको अपनी पहुंच के चलते खुद को सुरक्षित रखने में सफल होते आ रहे हैं?
उत्तराखण्ड के अन्दर सबसे बडा अभिशाप भ्रष्टाचार को लेकर रहा और राज्य के अधिकांश पूर्व मुख्यमंत्रियों ने खूूब ढोल पीटा कि वह राज्य के अन्दर भ्रष्टाचार को जड से समाप्त कर देंगे लेकिन हैरानी वाली बात यह रही कि कुछ पूर्व मुख्यमंत्रियों के करीबियों ने ही राज्य के अन्दर खुलकर भ्रष्टाचार किया और काफी अफसर ऐसे रहे जिन्होंने चंद पूर्व मुख्यमंत्रियों के साथ रहकर भ्रष्टाचार का खूब खेल खेला और इस खेल को खेलते हुए उन्होंने जिस तरह से अकूत दौलत के साथ बेनामी सम्पत्तियों का किला खडा किया उसका राज्य के अन्दर बार-बार शोर तो मचता रहा लेकिन चंद पूर्व मुख्यमंत्रियों के करीबी होने के कारण उन पर कभी कोई आंच नहीं आ पाई थी। देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के भ्रष्टाचारमुक्त भारत के संकल्प को उत्तराखण्ड में शत-प्रतिशत धरातल पर उतारने के लिए भ्रष्टाचारियों के खिलाफ अपना तीसरा नेत्र खोल दिया और उन्होंने अपने शासनकाल में जिस तरह से भ्रष्टाचार के बडे-बडे मगरमच्छों को जेल की सलाखों के पीछे पहुंचाया है उससे राज्य की जनता मुख्यमंत्री की कायल हो चुकी है।
