प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड की जनता ने बाइस सालों के लम्बे अंतराल में भाजपा और कांग्रेस की सरकारें देखी और इन सरकारों के कार्यकाल में भ्रष्टाचार से लेकर घोटाले करने वालों पर कभी शिकंजा न कसता देख राज्यवासी एक ही इच्छा पालने लगे थे कि अगर उत्तराखण्ड केन्द्र शासित प्रदेश होता तो आज उत्तराखण्ड की तस्वीर ही बदल गई होती। उत्तराखण्ड राज्य का निर्माण जिस उद्देश्य के लिए हुआ था वह उद्देश्य बाइस सालों में कभी आंदोलनकारियों को पूरा होता हुआ नजर ही नहीं आया और इसी के चलते अकसर आंदोलनकारी अंादोलन की राह पर चलते हुए नजर आते थे क्योंकि उन्हें इस बात की पीडा रहती थी कि उनके अपनों ने उत्तराखण्ड बनाने के लिए बडी शहादत दी लेकिन उसके बावजूद भ्रष्टाचार और माफियाराज का कभी अंत नहीं हो पाया। मुख्यमंत्री को जब राज्य की कमान मिली तो उन्होंने आंदोलनकारियों के सपनों का उत्तराखण्ड बनाने के लिए अपने कदम आगे बढाये और चार सालों में उन्हांेने राज्य को एक नई उडान पर ले जाने का जो इकबाल दिखाया उसे देखकर हर कोई यह कहते हुए नहीं चूक रहा कि धामी जज्बे का समुद्र लेकर सरकार चला रहे हैं और उनके इस जज्बे के आगे अपराधी और माफियाओं का नेटवर्क जहां नेस्तनाबूत हो रहा है वहीं राज्य के अन्दर भ्रष्टाचारियों और घोटालेबाजों पर खूब प्रहार हो रहा है। वहीं सीएम हैल्पलाइन पर आई शिकायत का सच परखने खुद मुख्यमंत्री आगे आये और उन्हांेने जिस अंदाज में शिकायत का सच खुद परखा उससे वह फिर धुरंधर ही दिखाई दिये।
राजनीति में हौसला सबसे अहम माना जाता है क्योंकि जब कोई राजनेता हौसले के साथ राजनीति करता है तो उसे बडे-बडे फैसले लेने पडते हैं और इसके लिए उसका जज्बा सबसे अहम माना जाता है। उत्तराखण्ड में बाइस सालों तक भाजपा और कांग्रेस की सरकारों में किसी भी पूर्व मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड को एक नया उत्तराखण्ड बनाने के लिए हौसला नहीं दिखाया और राज्य को उसी रूप में चलाते रहे जैसे उन्हें उत्तराखण्ड को नया उत्तराखण्ड बनाने की कोई इच्छा ही न हो? उत्तराखण्ड की कमान जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को मिली तो उन्होंने सबसे पहले राज्यवासियों का दिल जीता और उसके बाद उन्हांेने उत्तराखण्ड को एक नया उत्तराखण्ड बनाने के लिए अपने हौसले को बुलंद किया और समुद्र जैसा जज्बा लेकर वह सरकार चलाते चले गये जिसके चलते वह आज राज्य के अन्दर धाकड से धुरंधर मुख्यमंत्री का ताज अपने सिर पर बंधवा चुके हैं। मुख्यमंत्री के समुद्र जैसे जज्बे को देखकर आंदोलनकारी भी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की राजनीति के कायल हो रखे हैं क्योंकि मुख्यमंत्री ने अपने शासनकाल में हमेशा आंदोलनकारियों को बडा सम्मान देने के लिए अपने कदम आगे बढाये और उनकी हर मांग पर उन्होंने सहज रूप से अपनी स्वीकृति देकर यह संदेश दे रखा है कि वह हमेशा आंदोलनकारियों की भावनाओं का सम्मान करते हैं।
उल्लेखनीय है कि उत्तरखण्ड का दुर्भाग्य ही कहा जायेगा कि राज्य की जनता ने भाजपा को डबल इंजन की सरकार दी लेकिन सत्ता चलाने वाले भाजपा के दो पूर्व मुख्यमंत्री आवाम का दिल नहीं जीत पाये थे और उसी के चलते राज्य के युवा विधायक पुष्कर सिंह धामी को उत्तराखण्ड का मुख्यमंत्री बनाकर भाजपा हाईकमान ने उन पर अपना बडा विश्वास दिखाया था। बता दें कि उत्तराखण्ड में कहने को तो भाजपा के बडे-बडे नेता मौजूद हैं लेकिन यह राजनेता पुष्कर सिंह धामी के साथ हर आपदा के दौरान कभी खडे नहीं हुये और हर मोर्चे पर मुख्यमंत्री समुद्र जैसा जज्बा लेकर आवाम के साथ खडे रहे और उन्हें हमेशा विश्वास दिलाया कि हर संकटकाल में वह उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खडे रहेंगे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को जब भाजपा हाईकमान ने सत्ता सौंपी थी तो उन्हें यह आभास था कि उन्हें कांटो भरा ताज पहनाया जा रहा है लेकिन उन्होंने कांटों भरे ताज को अपने सिर पर सजाकर आवाम के दिलों को जीतते हुए सरकार चलाने के लिए धुंआधार पारी खेली और आवाम को यह विश्वास होता चला गया कि मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी का हौसला और जज्बा किसी समुद्र से कम नहीं है।
