बरस रही धनाधन गोलियां, ठगों के हौसले भी हुए बुलंद
पुलिस मुखिया के हाथो से सबकुछ आउट ऑफ कंट्रोल!
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। मॉनिटर यदि सख्त और अनुशासित हो तो उसकी कक्षा में भी अनुशासन कायम रहता है। इसी प्रकार से किसी विभाग के उच्च अधिकारी यदि सख्त और अनुशासित होंगे, तो ही उनके विभाग के कर्मचारी भी अनुशासित रहेेंगे और अपने कार्यों का निर्वाह्न सही तरीके से करेंगे क्योंकि उन कर्मचारियों के मन में इस बात का भय रहेगा कि यदि उनसे दायित्वों की पूर्ति में यदि चूक हुई तो उच्च अधिकारी के कोप का बम उनके ही सिर पर फुटेगा। हालांकि ऐसे अनुशासन की भारी कमी उत्तराखण्ड के पुलिस विभाग में कई जनपदों में देखने को मिल रही है। भयमुक्त और अपराध मुक्त उत्तराखण्ड का सपना मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खुद तो देखा ही है साथ ही साथ राज्य की जनता को भी दिखाया है। राज्य की जनता जोकि अपने मुख्यमंत्री के पर पूर्ण विश्वास रखती है, वे भी इस सपने के आगोश में हिलोरे खा रही है जबकि वास्तविकता की परछाई कुछ और ही बयां कर रही है। उत्तराखण्ड के कुछ इलाकों में दिनदिहाड़े गोलियां बरस रही हैं, कहीं गैंगरेप की घटनाएं हो रही हैं और ठगों ने तो उत्तराखण्ड को अपनी ऐशगाह ही बना लिया है। ऐसी हकीकत जब सामने आती है तो कैसे कोई यह मान सकता है कि उत्तराखण्ड कभी भी भयमुक्त और अपराधमुक्त हो पाएगा? सही मायनों में कहा जाए मौजूदा समय में उत्तराखण्ड का लॉ एंड आर्डर, धांय-धांय हो रखा है क्योकि यहां दिनदहाड़े गोलियां बरस रही हैं, गैंगरेप हो रहे हैं, ठग अपने कुकर्त्यों का लगातार अंजाम दे रहे हैं। ऐसे में यही नजर आ रहा है कि पुलिस मुखिया के हाथों से सबकुछ आउट ऑफ कंट्रोल हो रहा है?
एक वक्त था जब अपराध और बदमशों की बात होती थी एक ही राज्य सबके जहन में आता था, उत्तर प्रदेश। यह उन दिनों की बात है जब उत्तर प्रदेश की सत्ता पर बाहुबलियों और दबंगों का कब्जा था। उस कालखंड में उत्तर प्रदेश के अंदर लूट, हत्या, डकैती, बलात्कार की घटनाएं ऐसी थी मानो खुली पड़ी जलेबी पर मक्खियों का कब्जा। हालांकि जब से उत्तराखण्ड में सीएम योगी अदित्यनाथ का शासन आया है तब से उत्तर प्रदेश का स्वरूप ही बदल गया है। सीएम योगी ने पुलिस प्रशासन को खुली छूट दे रखी है कि यदि कोई अपराधी या माफिया उनकी कानून व्यवस्था में खलल पैदा करने की कोशिश करे उसे, उसी की भाषा में जवाब दें। सीएम से मिले फ्री हैंड के आर्डर के बाद से उत्तर प्रदेश के पुलिस विभाग का एक नया रूप उत्तर प्रदेश की जनता को देखने को मिला और अब पुलिस का खौफ आवाम में नहीं बल्कि अपराधियों के मन में देखने को मिल रहा है। वहीं बात करें उत्तराखण्ड की तो यहां पिछले कुछ महीनों से परिस्थितियों थोड़ी सी भिन्न नजर आ रहे है। यहां अधिकांश जगहों पर पुलिस सड़कों पर चालान काटते हुए तो नजर आ जाती है लेकिन जब उसकी अभिरक्षा में बदमाश दिन दहाड़े गोलियां बरसाकर किसी को मौत के घाट उतार देते हैं तो वह कुछ नहीं कर पाती है। वहीं धर्मनगरी हरिद्वार के कनखल में जब एक जिला पंचायत उपाध्यक्ष के भाई पर गोलियां चलती है तो पुलिस के धेय वाक्य मित्रता, सेवा, सुरक्षा की पोल खुद ही खुल जाती है। वहीं रूद्रपुर में कार में लिफ्ट देने के बहाने एक युवती से सामूहिक दुष्कर्म हो जाता है, जो यह बताने के लिए काफी है कि असमाजिक तत्वों में पुलिस का कितना खौफ रह गया है। बात करें ठगी के मामलों की तो इसमें तो उत्तराखण्ड शायद एक नया रिकार्ड ही बनाने की दिशा में अपने कदम बढ़ाए हुए है। आए दिन ठगी के नित नए मामले सामने आ रहे हैं। जहां एक ओर सचिवालय के अफसर सहित तीन लोगों को होटल बिजनेस में पार्टनर बनाने का झांसा देकर करोड़ों रुपए का चुना लगाने का मामला सामने आया है तो वहीं आईटी पार्क में प्लॉट दिलाने के नाम पर लाखों की ठगी का मामला सामने आया है। ऐसे में सवाल उठता है कि पुलिस मुख्यालय के एसी कमरों में बैठे उच्च अधिकारी ऐसे अपराधिक मामलों पर कोई सख्त कदम उठाने के लिए कभी आगे आएंगे। यदि ऐसा न हुआ तो उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री ने जो अपराधमुुक्त और भयमुक्त प्रदेश का सपना जो खुद देखा है और आवाम को दिखाया है, वह सपना कभी भी पूरा नहीं हो पाएगा।
