पत्रकार राजीव की मौत संयोग या साजिश..?

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पुलिस की एक्सीडेंटल थ्योरी पर परिजनों ने उठाए सवाल
पत्रकार की मौत केस की जांच करेगी एसआईटी
परिजनों ने जताई है हत्या का आशंका, सीबीआई जांच कीे मांग
उत्तरकाशी(संवाददाता)। जनपद मंे एक पत्रकार की रहस्यमय मौत ने सरकार और सिस्टम को हिलाकर रख दिया है और पत्रकार की लाश दस दिन बाद झील से मिलने के बाद पुलिस ने जो अपनी थ्योरी बयां की है उस पर पत्रकार के परिजनों को विश्वास नहीं हो रहा और उनका साफ कहना है कि उन्हें पुलिस की जांच पर कोई भरोसा नहीं है और इस मामले की जांच सीबीआई से कराई जाये। पत्रकार की लाश दस दिन बाद झील से मिलने से यह सवाल खडे हो रहे हैं कि पत्रकार की मौत एक सहयोग है या फिर उसकी मौत के पीछे ऐसी साजिश छिपी है जिसको लेकर पत्रकार के परिजन पुलिस की जांच पर विश्वास ही नहीं कर रहे और वह साफ कह रहे हैं कि इस मामले की सीबीआई जांच होनी चाहिए जिससे कि एक सच जो अभी तक एक राज बना हुआ है वह राज्य और देश की जनता के सामने बाहर आ सके। पत्रकार की मौत को लेकर मीडिया जगत में एक बडी नाराजगी भी पनप रही है और जिस तरह से कुछ लोग पत्रकार को अपने निशाने पर लेने का चक्रव्यूह रच रहे हैं उससे कई शंकाओं ने जन्म ले रखा है और उसी के चलते पत्रकार की मौत का रहस्य अब तेजी के साथ गहराता जा रहा है। उत्तराखण्ड में पत्रकार की मौत को लेकर जिस तरह से बडे-बडे मीडिया धरानों ने सवालों की बौछार करी है वह कई शंकाओं को जन्म दे रही है।
स्वतंत्र पत्रकार राजीव प्रताप की मौत के मामले की जांच के लिए उत्तराखंड पुलिस ने एसआईटी (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) का गठन कर दिया है। उत्तरकाशी के पुलिस उपाधीक्षक जनक सिंह पंवार की अध्यक्षता में गठित एसआईटी सभी पहलुओं की जांच करेगी, जिसमें सीसीटीवी फुटेज, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, कॉल डिटेल और पत्रकार के साथ आखिरी बार देखे गए लोगों के बयान शामिल हैं। उत्तराखंड डीजीपी दीपम सेठ ने इसकी पुष्टि की उत्तराखंड डीजीपी दीपम सेठ के मुताबिक, पत्रकार राजीव प्रताप के परिवार ने बताया था कि उन्हें धमकी भरे फोन आए थे। फिलहाल राजीव प्रताप के परिजन देहरादून में उसके क्रियाकर्म में व्यस्त है और राजीव की गर्ववती पत्नी मुस्कान फूट -फूट कर रोने को मजबूर है।
परिजनो का कहना है कि अब उसके बाद ही वे न्यायिक पहलुओं की बारिकियां की जानकारियां लेकर अग्रिम कार्यवाही में तेजी लाने की पैरवी करेंगे। चर्चा है कि पोस्टमार्टम के बाद चिकित्सक से जो इनपुट परिजनो को मिले वह संशय और आशंकाओं की ओर इशारा कर रही है? अब यह प्रकरण रहस्य बन गया है कि राजीव प्रताप की मौत कोई संयोग है या फिर किसी साजिश की ओर इशारा है? पनोथ के प्रधान और राजीव के बहुत करीबी चाचा कृपाल सिंह ने बताया कि पोस्टमार्टम मे राजीव की मौत दम छूटने या शरीर में पानी भरने से नहीं हुई बल्कि इंटरनरनल इंजर्ड होने से हुई जो कि एसपी उत्तरकाशी के वक्तव्य मे भी है। उन्होने कहा कि यदि इंटरनल इंजर्ड होने से मौत हुई है तो इसमे मर्डर की आंशका से मना नहीं किया जा सकता है।
परिजनों कहना है कि जब राजीव की लाश मिली तो उसके वदन पर कपड़े नहीं थे यदि दस दिन पहले मौत हुई होती तो सडे गले फटे कपडे तो बदन पर होने चाहिए थे जो डूबने से मौत की ओर इसारा नहीं करता है। राजीव के पिता मुरारी लाल का कहना है कि हम शासन प्रशासन से इस प्रकरण मे न्याय चाहते है और सीबीआई जांच की मांग करते है। उन्होंने यह भी आशंका जताई है कि जिस अस्पताल की खबर राजीव ने लापता होने से दो दिन पहले चलाई थी उसी अस्पताल में पोस्टमार्टम हुआ है जिससे हमे अस्पताल की विश्वसनियता पर संदेह है। इधर पुलिस अधीक्षक सरिता डोबाल ने बताया कि परिजनों ने हत्या और अपहरण की आंशका जताई जताई उस पर विवेचना जारी है।

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