त्रिवेंद्र के बोल बहुत कुछ कर रहे बयां!
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में सियासत कब किस करवट बैठ जाये यह किसी को पता ही नहीं चलता? मुख्यमंत्री हर मोर्चे पर अकेले डटकर उसका खुद सामना करते हैं और यही कारण है कि वह उत्तराखण्ड से लेकर दिल्ली तक अपने नाम का डंका बजाते आ रहे हैं। उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री व हरिद्वार से भाजपा सांसद बार-बार अपने बयानो से सरकार को घेरते हुए नजर आ रहे हैं और उसी के चलते राज्य के अन्दर एक गुप्त घमासान मचता हुआ नजर आता रहा है कि आखिरकार मुख्यमंत्री की बेहतर अंदाज में चल रही सरकार की घेराबंदी करने के लिए आखिरकार किस मिशन के तहत होती आ रही है जिसके चलते मुख्यमंत्री को निशाने पर लेने के लिए बार-बार तीर चुभोकर उन्हें विकास के पथ पर आगे बढने से रोका जा रहा है? उत्तराखण्ड में हुई राज्य स्तरीय परीक्षा को लेकर उस समय बवाल मच गया था जब पेपर लीक होने का एक बडा शोर मचने लगा था। पेपर लीक को लेकर सरकार और सिस्टम के सामने बेरोजगार छात्रों के आंदोलन पर आगे बढने को लेकर चिंता की लकीरें थी तो वहीं उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग को जिस अंदाज में बेरोजगार छात्रों ने अपने निशाने पर लेते हुए आयोग के अध्यक्ष को बर्खास्त करने की बार-बार दहाड़ लगाई वह आयोग की कार्यशैली पर एक बडा दाग लगा गया। मुख्यमंत्री ने पेपर लीक मामले में सीबीआई जांच कराने का आदेश दिया तो भले ही राजधानी के अन्दर मुख्यमंत्री के इस फैसले के पोस्टर और होर्डिंग्स कहीं दिखाई नहीं दिये हों लेकिन जिस तरह से पूर्व मुख्यमंत्री व हरिद्वार से भाजपा सांसद के होर्डिंग्स जगह-जगह चमकते हुए नजर आ रहे हैं उसने उत्तराखण्ड की राजनीति में एक ऐसी उथल-पुथल मचा कर रख दी है कि उसका राज किसी को समझ ही नहीं आ रहा कि आखिर जिसका श्रेय मुख्यमंत्री को मिलना चाहिए था उस श्रेय का ताज तो भाजपा सांसद के सर पर एक भव्य रूप में सजाकर कई सवालों को जन्म दे दिया?
त्रिवेंद्र में है दम। नौनिहाल हुए खुशहाल। सीबीआई जांच धन्यवाद
उत्तराखण्ड के अन्दर हमेशा यही बहस चलती रही है कि राजनीति में न कोई किसी का दुश्मन है और न ही किसी का सगा क्योंकि मौका मिलते ही कौन राजनेता किसकी कुर्सी छिनने के मिशन में आगे बढ जाये यह राज्य की जनता एक दशक से देखती आ रही है। उत्तराखण्ड में भाजपा का इतिहास किसी से छिपा नहीं है। भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री रहे भुवन चंद खण्डूरी को सत्ता से बेदखल करने के लिए पार्टी के ही कुछ विधायकों ने जो साजिश का एक बडा खेल उनके साथ खेला था उसका तमाशा उत्तराखण्ड से लेकर देशभर के लोगों ने देखा था। उत्तराखण्ड में भाजपा ही नहीं कांग्रेस के अन्दर भी मुख्यमंत्री को हटाने के लिए उनके अपनों ने जो भीतरघात किया था वह राज्य की जनता कभी भी नहीं भूल सकती। उत्तराखण्ड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को जिस तरह से खटीमा में चुनाव हरवाने का प्रपंच रचा गया था वह सबने देखा था लेकिन उनकी भाजपा के प्रति निष्ठा और उनकी स्वच्छ कार्यशैली से राज्य में दुबारा भाजपा की सरकार आने का श्रेय पुष्कर सिंह धामी को ही मिला था। मुख्यमंत्री सबका साथ सबका विकास के एजेंडे पर सरकार चला रहे हैं लेकिन पार्टी के कुछ नेता और कुछ सफेदपोश उन्हें हमेशा अपनी रडार पर लेने से पीछे नहीं हटते।
उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री व हरिद्वार से भाजपा सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत कई बार अपने बयानों से सरकार को संकट में डाल चुके हैं और उन्होंने जब लोकसभा के अन्दर खनन को लेकर अपना बयान दिया था उससे सरकार भी काफी असहज हुई थी। हाल ही में राज्य में हुई राज्य स्तरीय परीक्षा में पेपर लीक होने के बाद जैसे ही हजारों बेरोजगार छात्रों ने आंदोलन का बिगुल बजाया तो उससे उत्तराखण्ड के अधिकांश जिलों में एक नया भूचाल आता हुआ दिखाई देने लगा और उसी के चलते कांग्रेस के आधा दर्जन से अधिक विधायकों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को लेटर लिखकर पेपर लीक मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की थी तो वहीं हरिद्वार से भाजपा सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी से पेपर लीक मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग रखकर बेरोजगारों के साथ अपने आपको शामिल कर दिया था। मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी ने बेरोजगार छात्रों के आंदोलन के बीच जाकर पेपर लीक मामले की जांच सीबीआई से कराने का आदेश देकर इस संग्राम को खत्म कर दिया। पेपर लीक मामले में सीबीआई जांच का आदेश होते ही त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सोशल मीडिया पर लिखा कि मेरा पहले दिन से ही मानना था कि यूकेएसएसएससी पेपर लीक के प्रकरण की सीबीआई जांच होनी चाहिए, क्योंकि हमारे छात्रों, नौजवानों और अभिभावकों का विश्वास टूटना नहीं चाहिए। यह सब हमारे परिवार के बच्चे हैं। इनके संघर्ष पर हम न आरोप लगा सकते हैं, न शंका कर सकते हैं। त्रिवेंद्र सिंह रावत ने लिखा कि परीक्षा की पारदर्शिता भंग हुई है और छात्र असंतुष्ट होकर आंदोलित हैं तो समाधान जन भावनाओं के अनुरूप होना चाहिए ताकि ईमानदारी से मेहनत करने वाले बच्चों और अभिभावकों का सिस्टम और सरकार पर विश्वास बना रहे। त्रिवेंद्र रावत ने मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी का आभार करते हुए कहा कि उन्होंने प्रदेश में आंदोलित छात्रों और युवाओं की भावनाओं के अनुरूप अपेक्षित सीबीआई जांच की संस्तुति की है।
पेपर लीक मामले में सीबीआई जांच का आदेश होते ही त्रिवेंद्र रावत को एक बडे राजनेता के रूप में आगे दिखाने के लिए जिस तरह से जगह-जगह उनके होर्डिंग्स चमकाये गये हैं वह शायद बहुत कुछ बयां कर रहे हैं?

