कालरात्रि पर बेरोजगारों की जीत

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सीबीआई जांच से सलाहकारों को धामी ने दिया झटका
आयोग के अध्यक्ष की भूमिका से खूब मचा भूचाल
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में राज्य स्तरीय परीक्षा में पेपर लीक को लेकर जब एक बडा भूचाल मचा तो सरकार और आयोग के अध्यक्ष भी बेरोजगारों के आंदोलन को लेकर अपनी नाराजगी प्रकट करते हुए दिखाई दिये और इस आंदोलन को खत्म कराने के लिए डीएम और पुलिस कप्तान ने भी राजधानी में बेरोजगारों छात्रों के बीच जाकर आंदोलन को खत्म करने की गुजारिश की थी लेकिन बेरोजगार छात्र सीबीआई जांच की संस्तुति तक अपना आंदोलन खत्म करने को राजी नहीं थे। एकता के साथ बेरोजगार छात्रों ने संयमता के साथ अपना आंदोलन शुरू रखा और शाम के समय वह नवरात्रों को लेकर मां भगवती के भजन भी आस्था के साथ गाते रहे और उन्हें विश्वास था कि देवी मां उनकी सीबीआई जांच की मांग को जरूर पूरा करेंगी और आज आखिरकार कालरात्रि पर मुख्यमंत्री ने बेरोजगार छात्रों के बीच जाकर उन्हें अपना बताते हुए पेपर लीक मामले की जांच सीबीआई से कराने की लिखित में संस्तुति की तो कालरात्रि पर बेरोजगारों को एक बडी जीत हासिल हुई। पेपर लीक प्रकरण में सलाहकारों को लेकर खूब बहस चल रही थी कि अधिकांश सरकारों के कार्यकाल में सलाहकारों की वजह से ही मुख्यमंत्री पर संकट आते रहे हैं और आज मुख्यमंत्री ने अपने किसी भी सलाहकार को बेरोजगार छात्रों के धरना स्थल पर जाने की कोई भनक नहीं दी और उन्होंने वहां सीधे जाकर बेरोजगार छात्रों को दो टूक कहा कि हमारी मंशा साफ है कि सरकार नौजवानों के साथ है। गर्मी में आंदोलन करना कठिन है मैने इस परेशान को खुद महसूस किया इसलिए मैं खुद तुम्हारे पास आया हंू। वहीं इस पूरे प्रकरण में उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष बेरोजगारों के खूब निशाने पर रहे और हर तरफ उन्हें बर्खास्त करने की दहाड़ लगती रही।
उत्तराखण्ड के इतिहास में पहली बार ऐसा देखने को मिला जब बेरोजगार छात्रों ने परेड ग्राउंड में पेपर लीक प्रकरण की सीबीआई जांच कराने और परीक्षा को रद्द करने की मांग की तो उन्होंने न तो अपने इस आंदोलन को किसी के हाथ हाईजैक होने दिया और न ही वहां किसी को राजनीति का अखाडा बनाने की इजाजत दी गई। बेरोजगार छात्रों ने अपने इस आंदोलन को शांति और सयंम से चलाने का जो सिलसिला शुरू किया हुआ था उसे देखकर हर कोई हैरान था कि बेरोजगार छात्र अपनी मांग को लेकर कभी भी उग्र रूप में दिखाई नहीं दिये और यहीं से उनकी एकता को कोई भी भंग करने का खेल नहीं खेल पाया। मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी छात्र राजनीति को अच्छी तरह से जानते हैं लेकिन जैसे ही बेरोजगार छात्रों का यह आंदोलन शुरू हुआ तो कुछ सलाहकारों को लेकर राज्य के अन्दर एक बहस छिड गई कि क्या कुछ सलाहकार ऐसे हैं जो मुख्यमंत्री को बेरोजगार छात्रों की मांग को हरी झंडी देने से रोकना चाहते हैं? कुछ सलाहकार किस्म के लोगों ने इस मामले में जिस उत्तेजना के साथ कुछ चीजों को इधर-उधर परोसने का खेल खेला वह सरकार के लिए घातक हो रहा था लेकिन इसकी भनक राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी को नहीं लग पा रही थी।
इस आंदोलन की दिशा को सब भाप रहे थे और बेरोजगार छात्रों द्वारा किये जा रहे इस आंदोलन को लेकर राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी के साथ पार्टी के अधिकांश मंत्री और विधायक कहां साथ खडे थे यह किसी से छिपा नहीं था? सवाल खडे हो रहे थे कि आखिरकार इस मुद्दे पर जहां तमाम भाजपा के दिग्गजों को मुख्यमंत्री के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खडा होना चाहिए था उसके लिए वह क्यों तैयार नहीं थे यह एक चर्चा का विषय बना रहा। वहीं बेरोजगार छात्रों को मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसंह धामी से खूब उम्मीद थी कि वह जरूर सीबीआई जांच की संस्तुति करेंगे लेकिन उन्हें इस बात की आशंका उठ रही थी कि कुछ सलाहकार संभवतः जरूर ऐसे हैं जो मुख्यमंत्री को सीबीआई जांच जल्द से जल्द कराने की सलाह देने के लिए तैयार नहीं दिखे? बेरोजगार छात्रों ने नवरात्रों में मां भगवती पर अपनी आस्था रखते हुए रात्रि के समय उनके भजन गाकर जिस तरह से उनसे वह अपनी प्रार्थना कर रहे थे उस प्रार्थना को आज आखिरकार कालरात्रि जो कि मां काली का दिन होता है उस पर उनकी पिछले आठ दिन से चली आ रही मांग पर मां ने उन्हें अपना आशीर्वाद दिया और उसी के चलते मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जो कि खुद मां काली को मानते हैं उन्होंने बेरोजगारों की मांग पर अपनी मोहर लगाते हुए सीबीआई जांच की संस्तुति कर दी और आखिरकार बेरोजगार छात्रों की कालरात्रि पर हुई बडी जीत ने उत्तराखण्ड के अन्दर एक नई इबारत लिख दी है कि आंदोलन गांधीवाद पर ही सफल होते हैं।

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