अपने बयान के जाल में फंसे गये मार्तोलिया

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हुंकारः मार्तोलिया को सरकार करे बर्खास्त
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में सबकुछ शांत चल रहा था लेकिन जैसे ही कुछ दिन पूर्व राज्य के अन्दर राज्य स्तरीय परीक्षा का आयोजन हुआ तो अचानक पेपर लीक होने का ऐसा शोर मचा कि उसकी गूंज उत्तराखण्ड से लेकर दिल्ली तक में सुनाई दे गई और उसके चलते सरकार और बेरोजगार छात्र कथित पेपर लीक को लेकर आमने-सामने आकर खडे हो गये। उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष ने कथित पेपर लीक को लेकर मीडिया के सामने आकर जो अपना वक्तव्य दिया उस वक्तव्य ने सरकार की जमकर फजीहत करा दी और देशभर के अन्दर आयोग के अध्यक्ष के बयान पर एक बडा भूचाल मचा हुआ है और यह आवाज बुलंद हो रही है कि आखिरकार तीन पन्ने बाहर आने का जो दम अध्यक्ष ने भरा तो वह पेपर लीक क्यों नहीं माना जा सकता यह बात बेरोजगार छात्र लगातार बुलंद कर रहे हैं। आयोग के अध्यक्ष का बयान देशभर में बवाल मचाये हुये है और यह बहस चल रही है कि आखिरकार ऐसा गैर जिम्मेदाराना बयान कैसे आयोग का अध्यक्ष दे सकता है? अब बेरोजगार छात्रों से लेकर जन अधिकार पार्टी जनशक्ति ने भी आयोग के अध्यक्ष के खिलाफ अपनी हुंकार लगाते हुए उन्हें बर्खास्त करने की मांग की और सरकार का पुतला फूंका।
उत्तराखण्ड में कोई भी पेपर लीक न हो इसके लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक बडी रूपरेखा तैयार की और उन्होंने उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने पूर्व आईपीएस जीएस मार्तोलिया को उसका अध्यक्ष बनाकर उन्हें दो टूक संदेश दिया था कि सभी पेपर पारदर्शिता और स्वच्छता के साथ हमेशा सम्पन्न कराये जायें जिससे कि बेरोजगार छात्रों के मन में हमेशा यह विश्वास रहे कि सरकार पारदर्शिता के साथ परीक्षायें करा रही है। मुख्यमंत्री के कार्यकाल में बना सशक्त नकल विरोधी कानून नकल माफियाओं के मन में एक बडा भय पैदा करता चला गया और उसी से बेरोगजार युवाओं के मन में एक आशा की किरण जागी कि अब उत्तराखण्ड के अन्दर नकल माफियाओं का साम्राज्य खत्म हो गया है। हाल ही में राज्य स्तरीय परीक्षा का आयोजन हुआ और उस परीक्षा में कथित रूप से पेपर लीक होने का जो शोर मचा उसने उत्तराखण्ड से लेकर दिल्ली तक एक बडा भूचाल मचाकर रखा हुआ है। उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष जीएस मार्तोलिया ने कथित पेपर लीक को लेकर जब मीडिया से रूबरू होने के लिए अपने आपको आगे किया तो उन्होंने यह बयान दिये कि पेपर लीक नहीं हुआ बल्कि तीन पन्ने बाहर आये थे उसकी जांच कराई जा रही है।
आयोग के अध्यक्ष ने जो तीन पन्ने बाहर आने का बयान मीडिया के सामने दिया उस बयान ने तो सरकार को ही संकट में लाकर खडा कर दिया? सवाल उठे कि एक ओर तो सरकार ने दावा किया है कि पेपर लीक नहीं हुआ तो वहीं आयोग के अध्यक्ष अगर यह बयान दे गये कि तीन पन्ने बाहर आये थे तो उसे क्या समझा जाये कि इसे पेपर लीक कहा जाये या न कहा जाये? उत्तराखण्ड के अन्दर बहस चल रही है कि अगर किसी पेपर का एक भी पन्ना बाहर आता है तो वह पेपर लीक ही माना जा सकता है लेकिन यहां तो जीएस मार्तोलिया ने तीन बाहर आने का बयान देकर उत्तराखण्ड से लेकर देशभर में अपनी काबलियत को लेकर सवाल खडे करवा दिये? उत्तराखण्ड के बेरोजगार छात्र जहां आयोग के अध्यक्ष को बर्खास्त करने की मांग की दहाड लगा रहे हैं तो वहीं भाकपा माले ने भी आयोग के अध्यक्ष को पद से हटाने की हुंकार लगाई तो वहीं अब जन अधिकार पार्टी जनशक्ति ने कथित पेपर लीक को लेकर जहां सरकार का पुतला फूंका वहीं आयोग के अध्यक्ष को हटाने और इस मामले की सीबीआई जांच कराने का भी दो टूक संदेश दिया है।

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