उत्तराखण्ड के अन्दर फिर चली बहस

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सौ बीमारी की एक दवा है ‘लोकायुक्त’
भ्रष्टाचार से ही पनपते हैं आंदोलन के रास्ते!
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड का जबसे जन्म हुआ है राज्य के अन्दर हर सरकार के कार्यकाल में भ्रष्टाचार और घोटालों का काला साया आवाम के इर्दगिर्द मंडराता रहा है। भ्रष्टाचार करने के रास्ते पर आगे बढे़ काफी राजनेता और अफसरों ने राज्य के अन्दर एक से एक बडे गुल खिलाये और उन्होंने भ्रष्टाचार से दौलत कमाने का जो शातिराना खेल खेला था उस खेल को नेस्तनाबूत करने के लिए किसी भी सरकार के पूर्व मुखिया ने कोई बडा एक्शन लिया हो ऐसा देखने को नहीं मिला था जिसके चलते कुछ बडे राजनेता और कुछ बडे अफसर भ्रष्टाचार की पिच पर 20-20 मैच खेलकर दौलत कमाने के जो चौके छक्के लगाये उसकी गूंज खूब उठी लेकिन यह गूंज कभी सरकारों को क्यों सुनाई नहीं दी थी यह आज भी एक बडा सवाल बना हुआ है? उत्तराखण्ड में मुख्यमंत्री के सख्त रूख के बावजूद भी चार साल के भीतर सैकडो भ्रष्टाचारियों की गिरफ्तारी इस बहस को अब एक नया जन्म दे रही है कि सौ बीमारियों के इलाज की एकमात्र दवा सिर्फ और सिर्फ लोकायुक्त ही है जिसका गठन आज तक राज्य की कोई भी सरकार क्यों करने के लिए आगे नहीं बडी यह एक रहस्यमय सवाल बना हुआ है? उत्तराखण्ड में हमेशा एक ही बहस चलती आ रही है कि राज्य में भ्रष्टाचार से ही आंदोलन के रास्ते पनपते हैं? उत्तराखण्ड में राज्य स्तरीय कथित पेपर लीक मामले की जांच सीबीआई से कराने को लेकर बेरोजगार छात्रों का जो हुजूम सडकों पर उमडा हुआ है उसे लेकर यह सवाल पनप रहे हैं कि आखिरकार उत्तराखण्ड के अन्दर पेपर लीक का शोर क्यों समय-समय पर बजता रहता है?
उत्तराखण्ड बनने के बाद राज्य की जनता ने कभी यह सोचा भी नहीं था कि जिस राज्य को बनाने के लिए वह अपनी शहादतें दी और पुलिस की यातनायें सही थी उस राज्य में भ्रष्टाचार का दानव उन्हें डराता रहेगा। उत्तराखण्ड में हर सरकार के कार्यकाल में भ्रष्टाचार और घोटालों का ऐसा दौर शुरू हुआ जिसने आवाम के सामने एक बडा संकट खडा किया कि आखिरकार इस भ्रष्टाचार और घोटालों से उन्हें आजादी मिलेगी। उत्तराखण्ड की अधिकांश सरकारों के कार्यकाल में बडे-बडे कुछ राजनेताओं और दर्जनों अफसरों ने भ्रष्टाचार का 20-20 मैच खेलते हुए हर बॉल पर चौक छक्के लगाने का जो दौर शुरू किया था उसे देखकर राज्यवासी काफी हैरान थे कि आखिरकार भ्रष्टाचार से दौलत कमाने वाले राजनेताओं और अफसरों पर नकेल लगाने के लिए आखिर कौन अवतार लेगा? उत्तराखण्ड के अन्दर भ्रष्टाचार और घोटालों के खेल को खत्म करने का एकमात्र रास्ता आवाम को लोकायुक्त नजर आ रहा है और उसकी सोच है कि उत्तराखण्ड में जिस दिन लोकायुक्त का गठन हो गया उस दिन भ्रष्टाचार से अकूत दौलत कमाने वाले हर उस राजनेता और अफसर के चेहरे से नकाब उतार जायेगा जो भ्रष्टाचार से अकूत दौलत का एक बडा किला मात्र कुछ सालों में ही खडा कर चुके हैं।
उत्तराखण्ड के अन्दर अकसर एक ही बहस चलती है कि भ्रष्टाचार से ही आंदोलन के रास्ते पनपते हैं क्योंकि जब भ्रष्टाचार के रास्ते पर चलने वाले कुछ नेता और अफसर आवाम को आंदोलन के रास्ते पर चलने के लिए मजबूर करते हैं तो उसी से आंदोलन का शोर सुनाई देने लग जाता है? उत्तराखण्ड के अन्दर विजिलेंस का अगर इतिहास देखा जाये तो उसके पास सीमित पॉवर है जिसके चलते वह न तो सीधे भ्रष्ट नेताओं को पकड पाती है और न ही उन अफसरों पर वह शिकंजा कस सकती है जो भ्रष्टाचार के रास्ते पर चलकर सरकार की आंखो में धूल झोक रहा होता है? उत्तराखण्ड के अन्दर एक बार फिर एक बडी बहस शुरू हो गई है कि उत्तराखण्ड के अन्दर भ्रष्टाचार के दानव का अंत किया जाना है तो सौ बीमारी की एकमात्र दवा लोकायुक्त है जिसके गठन के बाद भ्रष्टाचार का खेल नेस्तनाबूत होता चला जायेगा?

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