आखिर नकल किंग का कब होगा नार्को टेस्ट
सोशल मीडिया पर हाकम फिर बना हीरो
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में बाइस सालों से सरकारी नौकरियों में एंट्री न हो पाने के कारण हजारों युवाओं के मन में सरकारों को लेकर बडी नाराजगी देखने को मिलती रही और आखिरकार जब राज्य के युवा मुख्यमंत्री ने नकल माफियाओं के खिलाफ एक बडा युद्ध शुरू किया तो उसके बाद नौकरियों के सौदागर हाकम सिंह को जब सलाखों के पीछे पहुंचाया गया तो उसके बाद काफी नकल माफियाओं को एसटीएफ ने बेनकाब कर दिया था और यह सवाल खडे हुये थे कि आखिरकार हाकम सिंह के हाकिम आखिर कौन थे जिन्होंने उसे अपनी पनाह में लेकर उसे नकल माफिया बनने की खुली छूट दे रखी थी? हाकम ंिसह के रिश्तों को लेकर भी काफी भूचाल मचा था और ऐसा शोर मचाया गया था जिसे हाकम सिंह का सारा राज और उसके साम्राज्य को खाकी नेस्तनाबूत कर देगी लेकिन यह सिर्फ एक बवंडर से ज्यादा कुछ नहीं दिखा था और अब एक बार फिर परीक्षा में नकल कराने का भोपू बजाने के आरोप में हाकम सिंह को एसटीएफ और दून पुलिस ने दबोचा तो यह आवाज बुलंद हुई कि उसके सीने में अभी भी काफी राज दफन है जो बाहर नहीं आ पाये इसलिए उसका नार्को टेस्ट कराकर उन राजों को आवाम के सामने बेनकाब किया जाये जो खुल नहीं पाये थे? वहीं हाकम सिंह की गिरफ्तारी के बाद एक बार फिर सोशल मीडिया पर उसके चर्चे खूब मचे हुये हैं और सोशल मीडिया पर हाकम सिंह जिस तरह से ट्रोल हो रहा है उससे वह गुमनाम जीवन जीने के दौरान एक बार फिर आवाम की नजरों में नकल माफिया के रूप में सामने आ गया है।
उत्तराखण्ड के अन्दर जब नकल माफिया के रूप में हाकम सिंह का नाम चर्चा में आया था तो उसके बाद पुलिस ने जब उसकी फिल्मी अंदाज में गिरफ्तारी की थी तो यह बहस छिडी थी कि आखिरकार उसे किसने अपनी खुली पनाह दे रखी थी जिसके चलते वह बेखौफ होकर नकल माफिया बनने का ताज अपने सिर पर सजा चुका था। हाकम सिंह ने नकल माफिया बनकर दौलत कमाने का जो बडा खेल खेला था उसके राज को बाहर लाने का बडा दम तो भरा गया था लेकिन सिर्फ हवाबाजी में ही हाकम सिंह के साम्राज्य पर प्रहार करने का सच सामने आया था। हाकम सिंह कैसे कुछ वर्षों के भीतर अकूत दौलत का मालिक बना था इसका राज उसके नार्को टेस्ट से ही खुलने की उम्मीद थी लेकिन एसटीएफ ने उस दौर में उसका नार्को टेस्ट कराने के लिए कोई पहल नहीं की जिसके चलते यह साफ हो गया था कि हाकम सिंह के दिल में जो नकल माफियाओं के और अपने राजदारों के राज छुपे हुये हैं वह शायद कभी बाहर नहीं आ पायेंगे। हाकम सिंह को जेल हुई और उसके बाद वह खामोशी के साथ वहां रहा और जेल से बाहर आने के बाद उसने ऐसा कोई कृत्य नहीं किया जिससे उसका नाम फिर चर्चाओं में आ सके।
उत्तराखण्ड में राज्य स्तरीय परीक्षा से पहले एसटीएफ और दून पुलिस ने अचानक पेपर में नकल कराने का दम भरने का खेल करने वाले हाकम सिंह और उसके एक साथी को दबोच लिया तो यह बात सामने आई कि हाकम सिंह सिर्फ युवाओं को अपने छल से यह भरोसा दिला रहा था कि वह उन्हें नकल करा देगा लेकिन उसका यह दावा सिर्फ हवा-हवाई से ज्यादा कुछ नहीं था। हाकम सिंह की गिरफ्तारी ने एक बार फिर उत्तराखण्ड की वादियों में एक बडी हलचल मचा दी कि आखिरकार जब राज्य के अन्दर सशक्त नकल विरोधी कानून बना है तो फिर कैसे हाकम सिंह बेरोजगार युवाओं को नकल कराने का विश्वास दिला रहा था? हाकम सिंह को एसटीएफ और पुलिस ने गिरफ्तार करके सीधे सलाखों के पीछे पहुंचाया लेकिन सवाल यह उठा कि अगर हाकम सिंह का पुलिस कस्टडी रिमांड लेकर उससे इस प्रकरण में एक लम्बी पूछताछ की होती तो उसके सीने में दफन कई राज भी जरूर बेनकाब हो जाते ऐसी चर्चाएं राज्य के गलियारे में आम हो रखी हैं। पहली बार जेल की सलाखों के पीछे पहुंचे हाकम सिंह का अगर नार्को टेस्ट हुआ होता तो उसके कुछ अधिकारियों और राजनेताओं के साथ दिखाई देने वाले सम्बन्ध भी जरूर बेनकाब होते कि उनके बीच सिर्फ एक औपचारिक रिश्ता था या फिर इस रिश्ते के तार कुछ और गुल खिला रहे थे? हाकम सिंह की गिरफ्तारी के बाद सोाल मीडिया पर वह एक बार फिर काफी ट्रोल हो रहा है और हैरानी वाली बात है कि उत्तराखण्ड के एक जनपद में हो रही रामलीला में हाकम सिंह का हास्य अंदाज में जिस तरह से नाम लिया गया और उस पर जबरदस्त ठहाके लगे तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि हाकम सिंह नकल माफिया के रूप में किस तरह से एक बडा नाम बन चुका है?

