‘मार्तोलिया’ ने सरकार की कराई फजीहत

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अध्यक्ष के बयान से मचा बडा ‘तूफान’
पद से मार्तोलिया को हटाने की लगती दहाड़
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में चार साल से बेदाग होकर सरकार चला रहे मुख्यमंत्री ने राज्य के अन्दर सशक्त नकल विरोधी कानून बनाकर नकल माफियाओं की नाक में नकेल डाल रखी है और उसके चलते राज्य के अन्दर नकल माफियाओं के मन में फैले डर के चलते बेरोजगार युवाओं को उनकी काबिलियत पर सरकारी नौकरियां मिलने लगी। वहीं अचानक चंद दिन पूर्व राज्य में राज्य स्तरीय परीक्षा का आयोजन हुआ तो कुछ ही समय में सोशल मीडिया पर पेपर लीक होने का शोर इतनी तेजी से मचा कि उससे सरकार और सिस्टम के पैरों तले जमीन खिसक गई। सरकार और सिस्टम ने साफ संदेश दिया कि कोई पेपर लीक नहीं हुआ है और पेपर लीक का शोर एक साजिश के तहत मचाया जा रहा है। इस पूरे मामले पर राजधानी के पुलिस कप्तान अलर्ट दिखाई दिये और उन्होंने आगे आकर यह साफ करना शुरू किया कि पेपर लीक का शोर मचाना सिर्फ एक बडी साजिश है और कुछ नहीं। अभी पुलिस कप्तान इस मामले पर खुद मोर्चा संभाले ही हुये थे कि पुलिस कप्तान के मोर्चे ने उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष ने मीडिया के सामने एक ऐसा बयान दे डाला जिसका शोर उत्तराखण्ड से लेकर देशभर में इतनी तेजी से मचा कि उससे सरकार की फजीहत हो गई? अध्यक्ष के एक बयान ने जिस तरह से सरकार की फजीहत कराने का जो काम किया है उससे हर तरफ यह बहस छिड गई कि आखिरकार जो अध्यक्ष एक पुलिस अफसर भी रहा हो और वह ऐसा बयान दे दे कि पेपर लीक नहीं हुआ बल्कि तीन पन्ने बाहर आये थे तो उससे समझा जा सकता है कि उनका यह बयान कितना बचकाना था? मार्तोलिया को अध्यक्ष पद से हटाने के लिए हर तरफ अब आवाज उठनी शुरू हो गई है और बेरोजगार युवाओं ने तो सीधी दहाड लगा दी है कि आयोग के अध्यक्ष सरकार तत्काल हटाये या वह खुद अपने पद से इस्तीफा दें। आयोग के अध्यक्ष के बयान से ही देशभर के अन्दर एक बडा संग्राम मचा हुआ है कि आखिरकार पेपर लीक और तीन पन्ने बाहर आने को आखिर क्या माना जायेगा?
उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सरकार चलाने के लिए हमेशा पारदर्शिता और स्वच्छता को पैमाना बनाया और उन्होंने जिस शैली से सरकार चलाने के लिए अपने आपको आगे रखा हुआ है उससे उत्तराखण्ड की जनता भी उनकी मुरीद हो रखी है। उत्तराखण्ड के अन्दर नकल माफियाओं में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का एक बडा डर देखने को मिल रहा है और यही कारण है कि चार साल से हो रही परीक्षाओं में कभी भी पेपर लीक होने का कोई शोर नहीं मचा और राज्य के बेरोजगार युवाओं को नौकरियों में शानदार एंट्री मिलने सेे उनके मन में यह उमंग है कि अब उनकी तरह उनके काफी साथियों को भी योग्यता के आधार पर उन्हें सरकारी नौकरियां मिलेंगी। वहीं चंद दिन पूर्व राज्य के अन्दर हुई राज्य स्तरीय परीक्षा के कुछ समय बाद ही सोशल मीडिया पर पेपर लीक होने का शोर मचने लगा। कथित पेपर लीक को लेकर सरकार और सिस्टम ने सोशल मीडिया पर मचे इस तूफान को लेकर दो टूक संदेश दिया कि पेपर लीक का शोर मचाना एक बडी साजिश है और जिसने भी इस साजिश को रचा है उनके खिलाफ सख्त कार्यवाही अमल में लाई जायेगी।
सरकार और सिस्टम उन चेहरों को अपनी रडार पर लाये जिन्होंने इस कथित पेपर लीक को लेकर एक व्यूह रचना रची थी। इस मामले में पुलिस ने दो-तीन गिरफ्तारियां कर अपने इरादे को साफ कर दिया है कि वह साजिश रचने वालों को किसी भी कीमत पर बक्शेंगे नहीं। वहीं बेरोजगार युवाओं ने सरकार और सिस्टम के खिलाफ सडक पर ही खुला मोर्चा खोल दिया है और वह कथित रूप से हुये पेपर लीक मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग पर मोर्चा संभाले हुये हैं। इस पूरे प्रकरण को जनपद के पुलिस कप्तान अजय सिंह देख रहे थे और उन्होंने इस मामले से निपटने के लिए खुद मोर्चा संभाल रखा था लेकिन जब चंद दिन पूर्व पुलिस कप्तान अजय सिंह मीडिया से रूबरू होने आये तो उस समय उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष जीएस मार्तोलिया भी उनके साथ आये और वहां असिस्टेंट प्रोफेसर सुमन को अपने साथ बिठाकर उससे इस पेपर लीक प्रकरण पर बयान दिलाये। वहीं आयोग के अध्यक्ष जीएस मार्तोलिया ने मीडिया के सामने यह कबूला कि पेपर लीक नहीं हुआ है बल्कि तीन पन्ने बाहर आये थे। अध्यक्ष का यह बयान सरकार के लिए मौजूदा समय में एक बडी फजीहत बना हुआ है और उत्तराखण्ड से लेकर देश के कई राज्यों में आयोग के अध्यक्ष मार्तोलिया के बयान को लेकर खूब मखौल उड रहा है कि आखिरकार तीन पन्ने बाहर आने और पेपर लीक होने को आखिर क्या कहा जायेगा? जीएस मार्तोलिया के बयान पर खूब बवाल मचा हुआ है और जहां भाकपा माले के पदाधिकारी इन्द्रेश मैखूरी ने जहां आयोग के अध्यक्ष और सचिव को पद से हटाने की हुंकार लगाई है तो वहीं अब बेरोजगार युवाओं ने भी जीएस मार्तोलिया को पद से हटाने या फिर उन्हें खुद इस्तीफा देने के लिए अपनी दहाड लगानी शुरू कर दी है। इससे यही साफ हो रहा है कि मार्तोलिया ने अपने एक बयान से सरकार की फजीहत करा दी।

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