हर मुश्किल ट्रैक पर झटपट दौड़ा डबल इंजन

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देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखण्ड के केदारनाथ में जब बडी आपदा आई थी तो उस समय गुजरात के मुख्यमंत्री और मौजूदा दौर में देश के प्रधानमंत्री ने उत्तराखण्ड को सहारा देने के लिए अपने कदम आगे बढाये थे और यह विश्वास दिलाया था कि उनका लगाव हमेशा उत्तराखण्डवासियों से रहा है। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री को अपना सखा मानकर देश के प्रधानमंत्री हमेशा आपदा और संकटकाल में उनका हमदर्द बनने के लिए अगली पक्ति में खडे हुये नजर आते हैं। उत्तराखण्ड के कुछ जिलों में आई बडी आपदा के बाद देश के प्रधानमंत्री और गृहमंत्री ने उत्तराखण्ड को उभारने के लिए मुख्यमंत्री का खुलकर साथ दिया और अब एक बार फिर बादल फटने से आई आपदा का पता चलते ही प्रधानमंत्री और गृहमंत्री ने मुख्यमंत्री को भरोसा दिलाया कि डबल इंजन की सरकार राज्यवासियों के साथ खडी है और इस आपदा में जो नुकसान हुआ है उसका आंकलन करके केन्द्र सरकार उत्तराखण्ड को आर्थिक सहायता देने के लिए आगे खडी रहेगी। मुख्यमंत्री पर देश के प्रधानमंत्री और गृहमंत्री जिस तरह से अभेद भरोसा करते आ रहे हैं उससे साफ नजर आ रहा है कि वह राज्यवासियों के लिए शुभ संकेत है क्योंकि उन्हें इस बात का इल्म है कि अगर राज्य के अन्दर कभी भी कोई संकट या आपदा आयेगी तो केन्द्र सरकार उत्तराखण्ड को इस आपदा और संकट से बचाने के लिए अपना सरकारी खजाना खोल देंगे।
देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का उत्तराखण्ड से लगाव केदारनाथ आपदा के दौरान देखने को मिला था और उस समय वह केदारनाथ की आपदा में बडी राहत देने के लिए आगे आये थे। बाबा केदारनाथ से देश के प्रधानमंत्री का असीम लगाव किसी से छुपा नहीं है और यही कारण है कि वह बाबा केदारनाथ के धाम को अलौकिक बनाने के लिए हमेशा आगे खडे रहे हैं। उत्तराखण्ड में आने वाली हर आपदा में मुख्यमंत्री के हमदर्द बनकर प्रधानमंत्री आगे बढे हैं और राज्य में आई आपदा में हुये नुकसान का आंकलन करने के लिए उन्होंने खुद दिल्ली से टीमें भेजी थी और उसके बाद उत्तराखण्ड सरकार को बारह सौ करोड रूपये की आर्थिक सहायता दी थी। बीती रात आई आपदा में हुये नुकसान का पता चलते ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक बार फिर मुख्यमंत्री को सहारा देते हुए ऐलान किया कि वह इस आपदा की धडी में उत्तराखण्ड को आर्थिक सहायता देने के लिए आगे रहेंगे।
बता दें कि मोदी सरकार बनने के बाद उत्तराखंड के चारों धामों तक पहुंच बेहद सुविधाजनक हो गई है। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस वे भी बनकर तैयार हो चुका है। केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से उत्तराखंड में करीब 47०० किमी ग्रामीण सड़कों का निर्माण हुआ। इससे 25० से अधिक आबादी वाले 199 गांवों तक सड़क पहुंच गई। अब पीएमजीएसवाई तृतीय चरण के तहत पूर्व में निर्मित सड़कों के अपग्रेडेशन के लिए 1824 करोड़ रुपये की स्वीकृति भी मिल गई है, इसके तहत कुल 2288 किमी लंबी सड़कों का अपग्रेडेशन किया जा रहा है। 125 किमी लंबी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। केंद्र सरकार ने टनकपुर-बागेश्वर और डोईवाला से गंगोत्री-यमुनोत्री तक रेललाइन के सर्वे पर भी सहमति दे दी है। किच्छा में एम्स के सेटेलाइट सेंटर का काम तेजी से चल रहा है। एम्स ऋषिकेश के जरिये हेली एंबुलेंस शुरू हो चुकी है। वहीं, राज्य सरकार ने केंद्र के सहयोग से दशकों से लंबित परियोजनाओं पर काम शुरू कराने में सफलता हासिल की है। केंद्र ने केदारनाथ धाम और हेमकुंड साहिब के लिए रोप वे निर्माण की भी मंजूरी प्रदान कर दी है। वहीं, मुख्यमंत्री के निजी प्रयासों से रानीबाग स्थित एचएमटी की जमीन भी राज्य सरकार को हस्तांतरित हो चुकी है।
2००4 से 2०14 तक यूपीए सरकार ने उत्तराखंड को 53 हजार करोड़ प्रदान किए, जबकि मोदी सरकार के दस साल के कार्यकाल में उत्तराखंड को साढ़े तीन गुना अधिक एक लाख 86 हजार करोड़ रुपये प्रदान किए जा चुके हैं। इसके अलावा 31 हजार करोड़ सड़कों के लिए, 4० हजार करोड़ रेलवे प्रोजेक्ट के लिए, 1०० करोड़ एयरपोर्ट के लिए दिए जा चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर मुश्किल घड़ी में उत्तराखंड के साथ खड़े रहे हैं। 2०13 की केदारनाथ आपदा, 2०23 में सिलक्यारा सुरंग हादसा हो या फिर इस बार की प्राकृतिक आपदा, प्रधानमंत्री हर बार एक संरक्षक की तरह, निजी तौर पर राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी करते रहे। इस बार प्रधानमंत्री ने खुद देहरादून पहुंचकर आपदा का जायजा लेने के साथ ही आपदा राहत के लिए राहत पैकेज की घोषणा की है, इसके लिए मैं उनका उत्तराखंड की जनता की ओर से आभार व्यक्त करता हूं।

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