विधानसभा सत्र हंगामे के बीच खत्म

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देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखण्ड के गैरसैंण में विधानसभा सत्र को लेकर राज्यवासियों की नजरें अपने सवालों पर टिकी हुई थी कि विपक्ष सदन के अन्दर उनके मुद्दों को लेकर सरकार को किस तरह से आईना दिखायेगा लेकिन आम जनमानस यह देखकर हैरान हो गया जब दो दिन से लगातार कांग्रेस के चलते आ रहे जबरदस्त हंगामे के बीच जैसे ही सदन के अन्दर मुख्यमंत्री द्वारा रखा गया अनुपूरक बजट शोर शराबे के बीच पारित हुआ तो सदन को अनिश्चितकाल के लिए समाप्त कर दिया गया। चार दिन तक चलने वाला यह विधानसभा सत्र मात्र पौने तीन घंटे ही चल पाया जिससे जनता के सवाल भराडीसैंण की धुंध में गायब हो गये और सबने यही कहा कि बॉय-बॉय गैरसैंण…। आम जनमानस का विपक्ष पर भरोसा रहता है कि वह विधानसभा सत्र में उनकी आवाज बनकर सरकार को अपने दर्द से रूबरू करायेंगे लेकिन अगर सत्र बिना चर्चा के ही खत्म हो जाये तो ऐसे सत्र का औचित्य ही क्या रह जाता है यह अपने आपमें एक बडा सवाल है? मुख्यमंत्री ने भी साफ कहा था कि विपक्ष को सदन के अन्दर चर्चा करनी चाहिए लेकिन वह इस चर्चा से खुद ही भाग रहा है और सदन के अन्दर विपक्ष ने जिस तरह से कानून की धज्जियां उडाई हैं उसको देशभर के लोगों ने देखा कि सरकार सदन चलाना चाहती है लेकिन विपक्ष सदन चलाना नहीं चाहता।
कल से गैरसैंण में भराडीसैंण का विधानसभा सत्र शुरू हुआ था और यह सत्र शाम चार बजे तक यह सदन मात्र 45 मिनट ही चल पाया था क्योंकि कांग्रेस सदन के अन्दर पंचायत चुनाव और कानून व्यवस्था को लेकर आक्रामक हो रखी थी और वह उस पर चर्चा कराने के लिए अपनी हठधर्मी पर अडी हुई थी। कांग्रेसी विधायकों ने अपनी नाराजगी दिखाने के लिए विधानसभा के अन्दर ही रात्रि में धरना दिया और वहीं विश्राम किया। आज सुबह जैसे ही ग्यारह बजे विधानसभा सत्र शुरू हुआ तो कांग्रेसी विधायकों ने सदन के अन्दर नियम 31० में पंचायत चुनाव और कानून व्यवस्था को लेकर चर्चा कराने की मांग की और सत्र दस मिनट तक हंगामे के बीच चला उसके बाद ग्यारह बजकर बीस मिनट पर सत्र शुरू हुआ और पांच मिनट बाद ही हंगामे के चलते सत्र को स्थगित किया गया।
बारह बजे विधानसभा अध्यक्ष ने फिर सदन की कार्यवाही शुरू की तो कांग्रेसी विधायकों ने नियम 31० में चर्चा कराने की मांग शुरू की और पंाच मिनट बाद सत्र को स्थगित किया गया इसके बाद सत्र बारह बजकर चालीस मिनट पर शुरू हुआ और चालीस मिनट तक अनुपूरक बजट पर चर्चा करने के लिए सरकार आगे आई लेकिन विपक्ष अपना हंगामा करता रहा और इसी बीच सरकार ने अपना अनुपूरक बजट पास करा दिया उसके बाद सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। हैरानी वाली बात रही कि जो विधानसभा सत्र चार दिन तक चलना था वह कांग्रेस के हंगामे के चलते मात्र दो घंटे चालीस मिनट ही चल पाया और इससे उत्तराखण्ड की डेढ करोड जनता के जनहित के सवाल भराडीसैंण की धुंध में गायब हो गये और फिर सबने गैरसैंण को बॉय-बॉय कह दिया।

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