अब फि र से नहीं बसेगा धराली, पूरा गांव नई जगह होगा शिफ्ट

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उत्तरकाशी(संवाददाता)। उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में पांच अगस्त को सवा एक बजे दिन खीर गंगा गाड़ में आयें सैलाब ने धराली को 34 सैकड में पूरी तरह तबाह कर यह के होटल, होमस्टे, सेब के बागवानों गांव को जमींदोज कर दिया। सीएम ने लम्बा मंथन करने के बाद अब यह फैसला कर लिया है कि धराली को अब उसी स्थान पर नहीं बसाया जायेगा बल्कि उसे सुरक्षित जगह पर शिफ्ट किया जायेगा। वहीं धराली के आपदा पीडितों की चाहत है कि वह अब सेफ जोन लंका, कोपांग या जांगला में बसना चाहते हैं। सरकार भी अब धराली के लोगों की इस चाहत को पूरा करने के लिए जरूर एक बडे महामंथन के बाद वहां नया धराली बसाने का मिशन शुरू करेगी। वहीं मुख्यमंत्री धराली के आपदा पीडितों की चाहत को पूरा करने के लिए खुद बडा फैसला लेकर उनके सपनों का आशियाना देंगे।
पिछले कई वर्षों में धराली तीन बार आपदाओं का सामना कर चुका है, लेकिन हर बार गांव दोबारा बसाया गया। इस बार प्रशासन ने स्थायी विस्थापन की दिशा में कदम उठाया है। अपर सचिव बंशीधर तिवारी के अनुसार, ग्रामीणों से नई बसावट को लेकर बातचीत शुरू हो गई है। लोग 8 से 12 किमी दूर लंका, कोपांग या जांगला में बसाए जाने की मांग कर रहे हैं।वहीं, हर्षिल में आई आपदा में सेना का कैंप भी बह गया था। इसलिए नया कैंप लगाने के लिए सेना श्रीखंड पर्वत और आसपास के ग्लेशियरों, झीलों की रेकी करेगी।
सरकार ने अब तक 43 लोगों के लापता होने की पुष्टि की है, जबकि स्थानीय लोग यह संख्या 6० से अधिक बता रहे हैं। इनमें 29 नेपाली मजदूर भी शामिल हैं, जिनमें से 5 से संपर्क हो चुका है और 24 अब भी लापता हैं। फिलहाल केवल एक शव बरामद हुआ है, जबकि मलबे में दर्जनों लोगों के दबे होने की आशंका है। गंगनानी से आगे लिम्चागाड़ में टूटा पुल अब के स्थान पर वैली ब्रिज तैयार हो गया है, जिससे उत्तरकाशी और धराली का संपर्क फिर से जुड़ गया लेकिन भूस्खलन से गंगोत्री हाईवे डबारानी और धराली से पहले 35० मीटर बंद है। धराली के विस्थापन के लिए लोगों से बातचीत शुरू अपर सचिव बंशीधर तिवारी ने बताया कि धराली के विस्थापन के लिए स्थानीय लोगों से चर्चा शुरू कर दी है। लोग चाहते हैं कि उन्हें 8 से 12 किमी दूर लंका, कोपांग या जांगला में बसाया जाए।

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