देहरादून(संवाददाता)। आर्शीवाद की कृपा कब किस पर होगी, इस बात का अनुमान लगाना मुश्किल है, परंतु आर्शीवाद पर विश्वास सबको होता है। प्राकृतिक आपदाओं का दौर इस समय आम हो रखा है। ऐसे यदि कोई व्यक्ति किसी का किसी भी प्रकार की आपदा से बचा लेता है, तो सुरक्षित होने वाला व्यक्ति, अपने पालनहार को एक अवतार ही मानता है। सावन का महीना चल रहा है और उत्तराखण्ड में शिवभक्तों के आने जाने का क्रम लगातार बना हुआ है। उत्तराखण्ड की मित्र पुलिस हर संभव कोशिश कर रही है कि शिवभक्तों को किसी भी प्रकार की दिक्कत न हो। इसके लिए शिवभक्त उत्तराखण्ड सरकार का धन्यवाद भी कर रहे हैं। कांवड़ यात्रा का होना कोई नई बात नहीं है, लेकिन इस बार कुछ ऐसा हुआ है जो इतिहास बन गया। पहली बार देखने में आया है कि एक जनपद के पुलिस कप्तान ने किसी शिवभक्त को खुद मैदान में उतर कर बचाया हो। सौभाग्यशाली हैं दून की जनता क्योंकि यह शुभ कार्य दून की पुलिस कप्तान ने किया है और दिलेरी का इतिहास रचा है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कांवड में आने वाले शिवभक्तों को खुला संदेश दिया था कि देवभूमि में आने वाले हर शिवभक्त का वह खुले दिल से स्वागत करते हैं और धर्मनगरी में उन्होंने शिवभक्तों के पैर धोकर उनसे अपना बडा आशीर्वाद भी लिया था जिसे देखकर शिवभक्त गदगद थे कि उत्तराखण्ड अब बदल चुका है। मुख्यमंत्री ने कांवड क्षेत्र के पुलिस कप्तानों को कांवड में आने वाले शिवभक्तों का स्वागत और उन्हें सुगम यात्रा कराने का संदेश दिया हुआ है जिसके चलते कांवड क्षेत्र में कांवडियों को खाकी का जो नया रूप दिख रहा है उसे देखकर वह गदगद हैं। राजधानी के पुलिस कप्तान अजय सिंह कांवड शुरू होने के बाद से ही शिवभक्तों का स्वागत कर उन्हें फूल मालायें पहनाकर उनकी यात्रा को सुखद भाव दे रहे हैं।
पुलिस कप्तान ऋषिकेश में शिवभक्तों को आभास करा रहे हैं कि वह उनके साथ खडे हैं। कांवड यात्रा के अंतिम पडाव पर पुलिस कप्तान मैदान में खुद डटे हुये हैं। ऋषिकेश क्षेत्र में श्यामपुर फाटक पर ट्रेन के कारण लगे जाम को खुलवाने के लिए पुलिस कप्तान अजय सिंह वहीं मौजूद थे तो उमस के कारण मोटरसाइकिल पर सवार एक शिवभक्त बेहोश होनेे लगा तो उसे देखकर पुलिस कप्तान उसे संभालने तेजी से दौड़ पड़े और उसकी मोटरसाइकिल उन्होंने खुद संभाली और बेहोश हो रहे शिवभक्त को गोदी में उठाकर सडक के किनारे बिठाया और पुलिस कप्तान ने बीपी के कारण बेहोश हो रहे शिवभक्त के मुंह पर पानी छिडक कर उसे पानी पिलाया और उसके कंधे पर रखे बैग को भी पुलिस कप्तान ने खुद निकालकर उसे संभाला और आनन-फानन में उन्होंने स्वास्थ्य महकमे की टीम को मौके पर बुलाया और उसे इलाज के लिए अस्पताल भिजवाया।
शिवभक्त के लिए पुलिस कप्तान एक अवतार बनकर उसके सामने खडे हुये और उसे अपनी गोदी में उठाकर उन्होंने उसे जीवनदान देने के लिए जो हिम्मत दिखाई उस हिम्मत को देखकर वहां से गुजर रहे लोग भी हैरान हो गये कि एक जनपद का पुलिस कप्तान किस तरह से एक शिवभक्त के प्राणों की रक्षा करने के लिए उसके सामने देवदूत बनकर खडा हो गया। पुलिस कप्तान के हाथों शिवभक्त का जीवन बचना था और वह बच भी गया लेकिन पुलिस कप्तान के इस रूप को देखकर हर तरफ पुलिस कप्तान अजय सिंह की इंसानियत का खूब डंका बज रहा है। राजधानी के पुलिस कप्तान ‘सिंहÓ ने दिलेरी का जो इतिहास रचा है उसे देखकर हर कोई यह कहने से नहीं चूक रहा कि जिस उत्तराखण्ड का मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी खुद दयालु है तो वहां के काफी अफसर भी उन्हीं के पदचिन्हों पर चलकर अपने दयालु रूप से इंसानों के लिए उनके रक्षक बने हुये हैं।

