पुष्कर बने राजनीति के महाबलि

0
127

देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखण्ड़ में भाजपा व कांग्रेस के बडे-बडे राजनेता अपने आपको राजनीति का सुपरमैन समझते आ रहे हैं लेकिन मात्र चार साल के भीतर फलावर और फायर अंदाज में सरकार चला रहे मुख्यमंत्री ने अपने आपको राज्यवासियों के सामने सियासत का हैडमास्टर साबित करके राजनीति में अपनी एक ‘बिग इमेजÓ बना ली है। मुख्यमंत्री ने सरकार चलाने के दौरान किसी भी राजनीतिक दल या नेता के सामने अपने आपको कमजोर साबित नहीं किया और वह दिलेरी के साथ धाकड फैसले लेते चले गये। इनके इस राजनीतिक रूप को देखकर विपक्ष के नेता तो चारो खाने चित नजर आ ही रहे हैं साथ में भाजपा के वो चंद दिग्गज नेता जो अपने आपको मुख्यमंत्री के रूप में देखने की चाहत पाले हुये हैं वह धामी की दबंग राजनीति और देशभर में बढ़ रहे उनके राजनीतिक इकबाल को देखकर सहमें हुये नजर आ रहे हैं? धामी ने चार साल के अन्दर अपना जो राजनीतिक इकबाल बुलंद करके राज्य में विपक्ष व पार्टी के दिग्गज नेताओं को अपनी राजनीतिक हनक दिखाने का जो हुनर दिखाया है उससे वे अब समझ चुके हैं कि मुख्यमंत्री राजनीति में लम्बी रेस के धोडे हैं और उनकी मुख्यमंत्री के रूप में चल रही यात्रा अभी एक लम्बा सफर तय करेगी? चार साल के अन्दर मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड ही नहीं बल्कि देशभर में अपने जो राजनीतिक इमेज बुलंद की है उससे उत्तराखण्डवासियों को यह साफ हो चुका है कि मुख्यमंत्री का राजनीतिक सफर राज्य को एक नई उडान पर ले जाने से कोई नहीं रोक पायेगा। मुख्यमंत्री ने स्वच्छता के साथ सरकार चलाकर देश के प्रधानमंत्री और गृहमंत्री की राजनीतिक पाठशाला में अपने आपको चार साल से अव्वल बना रखा है।
उत्तराखण्ड का इतिहास रहा है कि राज्य की जनता ने हर पांच साल बाद सत्ता मे रहने वाले राजनीतिक दल को नकार कर दूसरे दल को सत्ता मे आने का न्यौता देकर उस पर भरोसा जताती रही थी। हालांकि पूर्व मे भाजपा और कांग्रेस की सरकारों से जो राज्य की जनता एक उम्मीद बांधकर विकास की जो नई उडान पर उडना चाहती थी उस उडान को कभी भी किसी पूर्व सरकार ने सफल नहीं होने दिया और राज्य की जनता के मन मे दोनो ही सरकारों को लेकर अपनी नाराजगी दिखाते हुए राज्य के अन्दर एक नई पार्टी का उदय देखने का सपना भी पालना शुरू कर दिया था। उत्तराखण्ड के अन्दर क्षेत्रीय दल के कुछ नेता तो सत्ता के लालच की चाश्नी मे ऐसे लिपट गये थे कि वह उत्तराखण्ड को उस उडान पर ले जाने के लिए भी कभी आगे नहीं बढे थे जिसके लिए काफी आंदोलनकारियों ने राज्य के लिए अपने प्राण दे दिये थे। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी ने छह माह की सत्ता के दौरान आवाम के सामने सत्ता चलाने का जो आईना दिखाया उसे देखकर राज्य की जनता मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की मुरीद हो गई थी और बीस साल से पांच साल के बाद सत्ता परिवर्तन की जो परिपार्टी चली आ रही थी वह मुख्यमंत्री ने धडाम करके सत्ता पर एक बार फिर कब्जा कर कांग्रेस को चुनावी रणभूमि मे ढेर कर दिया था। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी राजनीति के इतने बडे चाणक्य बनते चले गये जिसकी कल्पना न तो किसी बडे भाजपा नेता ने की थी और न ही कांग्रेस के किसी भी नेता ने ऐसी राजनीति की कल्पना की थी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राजनीति की ऐसी बिसात बिछाई कि कांग्रेस उसमे फसती चली गई और दो बडे चुनाव मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जीतकर कांग्रेस के सभी छत्रपों को अपनी स्वच्छ राजनीति की जिस उडान से उन्हें रूबरू करा रखा है उससे राज्य के अन्दर कांग्रेस धीरे-धीरे हाशिये पर जाती हुई दिखाई दे रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की स्वच्छ राजनीति ने कांग्रेस के कुछ छत्रपों को भी अपना मुरीद बना रखा है और कांग्रेस के कुछ बडे छत्रपों मे आपसी तनातनी के चलते कांग्रेस जिस रास्ते पर आकर खडी हो गई है उस रास्ते पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तेजी के साथ दौड लगाते हुए यह कहकर दिखाई दे रहे हैं कि अब उत्तराखण्ड के अन्दर कांग्रेस का युग खत्म हो चुका है और अब राज्य के अन्दर भाजपा ही उत्तराखण्ड को एक नई उडान पर ले जाने के लिए काफी है।
मुख्यमंत्री ने राज्यवासियों को यह विश्वास दिला रखा है कि डबल इंजन की सरकार ही उत्तराखण्ड को एक नया उत्तराखण्ड बनाने के लिए उनके साथ खडी हुई है। मुख्यमंत्री ने चार साल के भीतर ऐसी सियासत करी कि हर तरफ उनके नाम का डंका बजता हुआ ही नजर आ रहा है। मुख्यमंत्री के शासनकाल में अपराधियों, माफियाओं, भ्रष्टाचारियों, घोटालेबाजों की नाक में नकेल डली तो आवाम को यह विश्वास हो गया कि मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड के रक्षक हैं। अब मुख्यमंत्री को राज्य की जनता सियासत का हैडमास्टर मान चुकी है। मुख्यमंत्री ने अपना शानदार चार साल का कार्यकाल बेदाग होकर पूरा किया उसको लेकर उत्तराखण्ड से लेकर दिल्ली तक के भाजपा नेताओं को यह विश्वास है कि मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी ने जिस सोच के साथ सरकार चलाने का हौसला दिखा रखा है उसके चलते ही आज उत्तराखण्ड में एक नयापन दिखने लगा है और राज्यवासियों को विश्वास हो गया है कि उन्होंने राज्य के अन्दर कमल खिलाकर उत्तराखण्ड के भाग्य को उदय किया है।

LEAVE A REPLY