सीएम की राजनीति से घबराये विरोधी

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देहरादून(संवाददाता)। सियासत में अनुभव कोई मायने नहीं रखता, यह बात युवा मुख्यमंत्री ने सच साबित कर दी है क्योंकि जब उन्हें सत्ता की कमान सौंपी गई थी तो राज्य के गलियारों में यह शोर मचा था कि जिस मुख्यमंत्री को कभी मंत्री नहीं बनाया गया वह सीधे मुख्यमंत्री बन गये लेकिन उनके पास राजनीतिक अनुभव नहीं है कि सरकार कैसे चलाया करते हैं? युवा मुख्यमंत्री के लिए ऐसी सोच रखने वाले राजनेताओं और आवाम को उस समय बडी हैरानी हो गई जब उन्होंने देखा कि मात्र छह माह के भीतर मुख्यमंत्री ने आवाम के दिलों में ऐसा राज किया कि विधानसभा चुनाव को लेकर एक लम्बे दशक से चले आ रहे मिथक को भी मुख्यमंत्री ने तोड दिया और दूसरी बार राज्य के अन्दर भाजपा की सरकार बनाकर विरोधियों को आईना दिखाया कि सत्ता में अनुभव नहीं बल्कि आवाम का दिल जीतने का हुनर हो तो राज्य गुलजार हो जाता है। मुख्यमंत्री ने अपने तीन साल के शासनकाल में डबल इंजन को विकास के पथ पर हमेशा बुलट ट्रेन की तरह दौडाया जिससे राज्य में हर तरफ विकास की गंगा बहती हुई नजर आ रही है और उसी के चलते धामी की धाकड राजनीति से उनके विरोधी सहमें हुये नजर आ रहे हैं। वहीं अब राज्य के अन्दर पंचायत चुनाव का बिगुल बज चुका है और इस चुनाव में बडी जीत के लिए मुख्यमंत्री ने पटकथा लिख दी है जिससे विपक्ष के नेता इन चुनाव में अपनी हार की आशंका को लेकर सरकारी सिस्टम को कटघरे मे खडा करने का काम कर रहे हैं?
डबल इंजन सरकारें, प्रदेश हित में कितनी कारगर होती है, इसका अंदाजा उन राज्यों के विकास को देखकर स्वत: ही लगाया जा सकता है, जहां यह स्थापित हैं। उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड, हरियाणा, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, असम समेत देश में ऐसे कई राज्य हैं, जहां डबल इंजन की सरकार स्थापित है। इन राज्यों में विकास पहिया जिस तेजी के साथ घूम रहा है, ऐसा संभवत: उन राज्यों में शायद नहीं घूम पा रहा है, जहां डबल इंजन की सरकारें नहीं हैं? बड़े राज्यों की बात करें तो जनसंख्या की दृष्टि से सबसे बड़े राज्य के रूप में जाने जाने वाले उत्तर प्रदेश में मौजूदा समय में महाकुंभ का आयोजन हो रहा है। 144 वर्षों के संयोग के बाद प्रयागराज में आयोजित हो रहे महाकुंभ में कई करोड़ों श्रद्धालुओं ने संगम में आस्था की डूबकी लगाई है और आयोजन अभी और आगे तक चलने वाला है। इसके सफल आयोजन की पीछे एक कारण यह भी है कि यहां डबल इंजन की सरकार स्थापित है। कहने को तो उत्तराखण्ड एक छोटा सा राज्य है लेकिन यहां की भौगोलिक विषमताएं इसे कई बड़े राज्य से ज्यादा जटिल बना देती है और यहां विकास की ब्यार बहाना आसान नहीं समझा जाता था। हालांकि जब से उत्तराखण्ड में डबल इंजन की सरकार बनी है और खासतौर पर उसकी कमान जबसे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के हाथों में आई है, तभी से भौगोलिक विषमताओं के बावजूद उत्तराखण्ड में विकास लगातार बुलंदियों पर छू रहा है। आलवेदर रोड का निर्माण, सैन्य धाम का निर्माण, शूटिंग डेस्टिनेशन की स्थापना, पर्यटन को और मुफीद बनाना, ग्रीष्मकालीन चारधाम यात्रा के साथ साथ शीतकालीन यात्रा का आयोजन, यह उन उल्लेखनीय कार्यों में से है जो उत्तराखण्ड में डबल इंजन की सरकार द्वारा किए गए है।
डबल इंजन के ध्वजवाहक के रूप में पुष्कर सिंह धामी का यह रूप देखकर राज्य में होने वाले पंचायत चुनाव को लेकर विरोधियों के हौंसले भी पस्त नजर आ रहे हैं। सरकार के मुखिया पुष्कर ंिसह धामी का साफ कहना है कि उनकी सरकार राज्यहित में काम कर रही है और राज्य के विकास को लेकर ही वह बडी लकीर खींचती आ रही है। अब सरकार का सारा ध्यान छोटी सरकार पर है और पंचायत चुनाव में हर तरफ कमल खिलाने के लिए सरकार और संगठन एक साथ आकर काम करेगा जिससे कि पंचायत चुनाव में कमल का उदय होगा। मुख्यमंत्री का विजन हमेशा उत्तराखण्ड को एक नया उत्तराखण्ड बनाने का ही दिखाई दे रहा है और उसी के चलते वह रात-दिन उत्तराखण्डवासियों को यह आभास कराते आ रहे हैं कि डबल इंजन सरकार के अस्तित्व में होने से उत्तराखण्ड़ आदर्श राज्य बनने की सीढी तेजी के साथ चढता जा रहा है।

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