मौत की ‘यात्रा’

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चारधाम में मौत की इस उड़ान का कौन है जिम्मेदार और कब होगी जिम्मेदारी तय?
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड की चारधाम यात्रा करने के लिए देश-विदेश के लाखों श्रद्धालुओं के मन में एक बडी आस्था देखने को मिल रही है और हजारों की संख्या में ऐसे श्रद्धालु भी हैं जिनकी चाहत हेलीकाप्टर से यात्रा करने की होती है और उसी के चलते वह अपनी यात्रा को आसान बनाने के लिए हवाई मार्ग का सहारा लेते हैं। उत्तराखण्ड के अन्दर हेली सेवाओं ने जिस तरह से मानकों को हवा मे उडाते हुए अपनी उडानों को शुरू कर रखा है उसके चलते अब एक बहस शुरू हो गई है कि क्या उत्तराखण्ड में हेली सेवायें विक्रम की तरह दौडेंगी जिसकी दौड का कोई अंत नहीं होता है? उत्तराखण्ड में चारधाम यात्रा को सुखद बनाने के लिए मुख्यमंत्री ने एक बडी पहल कर रखी है लेकिन जिस तरह से मात्र एक माह के भीतर यात्रा मार्ग पर एक के बाद एक कई दर्दनाक हेलीकाप्टर हादसे हुये उसमें तेरह इंसानों को यात्रा मार्ग पर मौत के दर्शन हुये? अब राज्य के अन्दर यह बहस भी चल गई है कि हेलीकाप्टर हादसों की कैपिटल बन गया है उत्तराखण्ड? आज तडके जब एक बार फिर हेलीकाप्टर हादसा हुआ और उसमें सवार सात लोगों की दर्दनाक मौत हुई जिसमें हेलीकाप्टर का चालक भी शामिल था तो बहस शुरू हो गई कि आखिरकार कब तक श्रद्धालुओं को मौत की यात्रा करनी पडेगी? रूद्रप्रयाग पुलिस का कहना है कि दुर्घटना वाले स्थान पर मौजूद लोगों द्वारा एक वीडियों स्थानीय लोगों को भेजा गया जिसमें हेली क्रेश होने के बाद उसमें आग लगी दिखाई दे रही है इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह हादसा भी कितना दिल दहला देने वाला है।
उत्तराखंड के केदारनाथ में आज सुबह एक बार फिर से दर्दनाक हेलीकॉप्टर हादसा हो गया जिसमें सात लोगों की मौत हो गई। इस हादसे के बाद एक बार फिर से सवाल खड़े होने लग गए हैं कि आखिरकार इन हादसों की जवाबदेही किसकी होगी कौन यह सुनिश्चित करेगा कि अगर लापरवाही से यह हादसे हो रहे हैं तो इसके जिम्मेदार कौन है? उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के दौरान चालीस दिनों में पांच बड़े हाथ से हो गए हैं जिसमें तेरह लोगों की अब तक मौत हो गई है खराब मौसम और ब्रोक तो चल रहे हेलीकॉप्टर अमूमन हादसे का कारण बन रहे हैं। बीते दिनों केदारनाथ में हुए हादसे के बाद यह कहा गया था कि सभी हेलीकॉप्टर संचालन की मॉनिटरिंग की जा रही है और यह देखा जा रहा है की कहीं अत्यधिक सवारी हेलीकॉप्टर में तो नहीं चल रही है लेकिन आज हुए हादसे ने भी एक बार फिर से बता दिया कि किसी तरह की कोई मॉनिटरिंग का कोई पैमाना है ही नहीं जिसकी जो मर्जी आ रही है हेलीकॉप्टर सेवाओं में वह कर रहा है?
हैरानी की बात यह है कि उत्तराखंड देश में ऐसा पहला राज्य है जहां पर सबसे अधिक हेलीकॉप्टर क्रैश होने की घटनाएं रिकॉर्ड हो रही हैं चार धाम यात्रा में लगातार हो रहे हादसे से न केवल इंसानों की जानंे जा रही है बल्कि सरकार की छवि भी धूमिल हो रही है। सवाल यह खड़ा होता है कि आखिरकार यह मौत का तांडव कब तक चलता रहेगा? सवाल यह भी खड़ा होता है कि आखिरकार जिन अधिकारियों की जिम्मेदारी हेलीकॉप्टर संचालन के लिए लगाई गई है वह आखिरकार क्या कर रहे हैं? उत्तराखंड के चारधाम में चल रहे हेलीकॉप्टर का सिस्टम क्या है यह तो मालूम नहीं लेकिन मानक कहते हैं कि हर 16 घंटे बाद हेलीकॉप्टर की सर्विस जरूरी है परंतु चार धाम यात्रा पर चल रहे हेलीकॉप्टर की सर्विस कहां हो रही है कहां इनके सर्विस सेंटर हैं इसका जवाब भी किसी के पास नहीं है? रोजाना लोगों की जान जा रही है और जांच के नाम पर रोजाना खानापूर्ति करके अगले हादसे का फिर से इंतजार किया जाता है?

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