उत्तराखण्ड में हेलीकाप्टर हादसों को बड़ा रहा ग्राफ
एमरजेंसी लैंडिंगः मानकों की अनदेखी या कुछ और?
देहरादून। उत्तराखण्ड में चारधाम मौजूदा समय में अपने चरम पर है। देश विदेश से तीर्थयात्री और सैलानी उत्तराखण्ड आ रहे हैं। जो लोग आर्थिक रूप से काफी मजबूत हैं वह लोग चारधाम यात्रा के लिए हेलीकॉप्टर की सवारी करना पसंद करते हैं। पिछले लंबे समय से देखने में आ रहा है उनकी हेलीकॉप्टर सवारी की पसंद उनके लिए खतरनाक साबित होती जा रही है? उत्तराखण्ड में हेलीकॉप्टर हादसों का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है और इसकी चपेट में आकर कई लोग अपनी जान से भी हाथ धो बैठे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि ऐसी खतरनाक सवारी के हादसों से शासन-प्रशासन और संबंधित विभाग कब सबक लेगा और इन हादसों पर अंकुश लगाएगा? जब भी ऐसे हादसों की खबरें प्रकाश में आती है तो कहा जाता है हेलीकॉप्टर की एमरजेंसी लैंडिग कराई गई। कितनी हैरानी वाली बात है कि एमरजेंसी लैंडिंग जब होती है तो वह अधिकतर किसी खाली मैदान में होती है या फिर चलती सड़क पर। अब सोचने वाली बात यह है कि सड़क पर चल रहे वाहनों को तो यह पता नहीं होता कि जहां उनके पहिए दौड़ रहे हैं वहां एकदम से एक पंख विमान आने वाला है और जिससे उन वाहनों और उन में बैठे लोगों को भी क्षति पहुंच सकती है। इस विषय में आखिर कोई कब सोचेगा? जानकारों की मानें तो एमरजेंसी लैंडिंग की बात कहकर संबंधित विभाग के अधिकारी असल में मानको की गई अनदेखी को छिपाने का प्रयास करते हैं। हैलीकॉप्टर की एमरजेंसी लैंडिंग का ऐसा ही एक वाक्या आज रूद्रप्रयाग से सामने आया है। बताया गया है कि हेलीकॉप्टर में तकनीकी खराबी की वजह से केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर बड़ासू के पास एमरजेंसी लैंडिंग कराई गई। बताया जा रहा है कि हेलीकॉप्टर में 6 लोग सवार थे। अब सवाल उठ रहा है कि वो ऐसी कौन सी तकनीकी खराबी हैं, जिनके वजह से इतने महंगे और सुसज्जित हेलीकॉप्टरों को एमरजेंसी लैंडिंग के लिए मजबूूर होना पड़ रहा है?
हर शहर में स्थानीय परिवहन के लिए टैंपों, विक्रम, ई-रिक्शा आदि इस्तेमाल में आते हैं। इनका काम होता है सवारी एक जगह से लेकर दूसरी जगह ले जाना और दूसरी जगह से सवारी को तीसरी जगह ले जाना है। यह इन वाहनों का रोज का काम होता है और उन्हें यह काम जमीन पर करना होता है जोकि आसान माना जाता है। अब इन वाहनों की इस प्रक्रिया को यदि कोई आकाश में उड़ने वाला वाहन अपनी दिनचर्या में शामिल कर ले तो क्या होगा? फिर तो वही होगा जिसे लोग हादसा कहते हैं? बताया जा रहा है कि चारधाम यात्रा में इस्तेमाल होने वाले हेलीकॉप्टर भी सवारियों को एक हेलीपेड पर छोड़ते ही दूसरी सवारियां भरते हैं और उड़ जाते हैं। कितनी हैरानी वाली बात है कि इतना लंबा सफर करने बाद मशीन को ठंडा करने तक की जहमत नहीं उठायी जाती। स्थिति यदि आपतकालीन हो या माहौल जंग का हो तो हेलीकॉप्टर द्वारा ऐसी जल्दबाजी समझी जा सकती है लेकिन जब यात्रा सुचारू रूप से चल रही है तो ऐसे में जल्दबाजी किस बात की?
हेलीकॉप्टर की उड़ानों की इसी जल्दबाजी का ही परिणाम समझा जा है कि आज रूद्रप्रयाग में एक बार फिर एक हेलीकॉप्टर की एमरजेंसी लैंडिंग कराई गई। बताया जा रहा है कि क्रेस्टेल एविएशन प्राइवेट लिमिटेड के एक हेलीकॉप्टर में शनिवार दोपहर टेक-ऑफ के दौरान तकनीकी खामी आ गई थी। पायलट ने समय पर परिस्थिति भांपते हुए पास में ही सड़क पर आपातकालीन लैंडिंग करवाई, जिससे बड़ा हादसा होने से बच गया। हालांकि आपातकालीन लैंडिंग के दौरान पायलट को मामूली चोट आई और उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया। मौका-ए-वारदात की एक वीडियों में साफ देखा जा रहा है कि इस एमरजेंसी लैंडिंग से एक चौपहिया वाहन छतिग्रस्त हो गया है और एक दुकान का छप्पर भी दूट गया। घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासन ने मौके पर टीम को रवाना कर हेलीकॉप्टर को सड़क से हटवाने का कार्य कराया जा रहा है एवं यातायात को शीघ्र सुचारू रूप से चला दिया जाएगा। इस हादसे को लेकर जिला पर्यटन विकास अधिकारी एवं हेली सेवा के नोडल अधिकारी राहुल चौबे ने बताया कि क्रेस्टेल एविएशन प्राइवेट लिमिटेड का एक हेलीकॉप्टर अपने बड़ासू स्थित बेस से श्री केदारनाथ धाम के लिए पाँच यात्रियों के साथ टेक-ऑफ कर रहा था। इसी दौरान हेलीकॉप्टर में कुछ तकनीकी खामी आ गई। पायलट ने समय रहते खामी को भाँप लिया और नजदीक में खाली सड़क देखकर आपातकालीन लैंडिंग करवाई। हेलीकॉप्टर में सवार सभी यात्री सुरक्षित हैं, जबकि पायलट को हल्की चोट आई है। आपातकालीन लैंडिंग के दौरान सड़क पर खड़ी एक गाड़ी क्षतिग्रस्त हो गई। उक्त घटना का हेली शटल सेवा पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है।
ऐसा तो है नहीं कि यह कोई पहली ऐसी घटना हुई हो। हेलीकॉप्टर की ऐसी एमरजेंसी लैंडिंग पूर्व में भी कई बार हो चुकी हैं। अब सवाल यह उठता है कि जब ऐसी घटनाएं बार बार हो रही है तो इसके समाधान को लेकर कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाया जा रहा है? कहीं सवारियों को जल्दबाजी से भरने और उन्हें हबड़ा तबड़ी में गंतव्य तो छोड़ने के पीछे का राज कुछ और तो नहीं हैं? चर्चा उठ रही हैं कि इस जल्दबाजी का संबंध सीधे कमाई से है क्योंकि बताया जा रहा है कि हेलीकॉप्टर एक दिन में कितने चक्कर लगाएगा, वह निर्धारित नहीं है और संभवतः ज्यादा सवारियों को लिफ्ट करके गंतव्य तक पंहुचाने और गंतव्य से सवारियों को लाने से हेली कंपनियों को तो फायदा ही होगा और कमाई की इस जल्दबाजी की वजह से सवारियों की जान जोखिम में डाली जा रही है? सरकार के सुलभ और सुरक्षित चारधाम यात्रा की सपने को यदि हेली कंपनियों अपने फायदे के लिए इसी तरह से काम करती रही तो इसे सरकार के सपने को ग्रहण लग सकता है और यह खतरनाक उड़ानें कभी भी, कुछ भी बड़ा कर सकती हैं?

