गजब: भ्रष्टाचारियों को सरकार का कोई डर नहीं?

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संवाददाता
देहरादून। मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड को भ्रष्टाचारमुक्त बनाने के लिए एक बडा संकल्प लिया हुआ है और उसी संकल्प के साथ वह भ्रष्टाचारियों के खिलाफ बडा ऑपरेशन चलवा रहे हैं। हैरानी वाली बात है कि आये दिन भ्रष्टाचारी आम जनमानस से रिश्वत लेते हुए पकडे जा रहे हैं लेकिन उसके बावजूद भी उनमें सिस्टम का कोई डर देखने को नहीं मिल रहा है। अब विजिलेंस की टीम ने उत्तराखण्ड की अस्थाई राजधानी के कालसी तहसील मे तैनात पटवारी को दो हजार रूपये की रिश्वत लेते हुए दबोचा है। सवाल खडे हो रहे हैं कि विजिलेंस के शिकंजे में छोटे अधिकारी और कर्मचारी ही आ रहे हैं लेकिन भ्रष्टाचार की बडे-बडे मगरमच्छ कब सलाखों के पीछे पहुंचेंगे यह अभी भी एक बडा सवाल उत्तराखण्ड के अन्दर जन्म ले रहा है।
मिली जानकारी के अनुसार एक शिकायतकर्ता ने विजिलेंस के टोल फ्री नम्बर पर शिकायत दर्ज कराई कि उसके चचेरे भाईयों द्वारा मूल निवास प्रमाण पत्र एवं जाति प्रमाण पत्र बनाने के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था, जो ऑनलाइन चैक करने पर निरस्त होना पाया गया। इस सम्बन्ध में पटवारी गुलशन हैदर तहसील कालसी से फोन से सम्पर्क करने पर उक्त पटवारी द्वारा उन्हें फोटो आईडी व दो हजार रूपये लेकर आज तहसील कार्यालय बुलाया। शिकायतकर्ता रिश्वत नहीं देना चाहता था और वह आरोपी के विरूद्व कानूनी कार्यवाही चाहता था। इसी के चलते शिकायतकर्ता की शिकायत पर देहरादून की विजिलेंस टीम द्वारा कार्यवाही करते हुए पटवारी को तहसील कालसी के प्राईवेट कमरे से रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया। बताया जा रहा है कि पटवारी की गिरफ्तारी के बाद विजिलेंस की टीम द्वारा उससे पूछताछ कर अगली कार्यवाही को लेकर रणनीति बनाई जा रही है। इस प्रकरण में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अन्तर्गत मुकदमा दर्ज किया गया है। एक बार फिर विजिलेंस द्वारा भ्रष्टाचारी को दबोचे जाने के बाद यह सवाल खडे हो गये कि आखिरकार उत्तराखण्ड में भ्रष्टाचार की जडें कितनी विशाल हो रखी हैं। उत्तराखण्ड के अन्दर मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी ने भ्रष्टाचारियों के खिलाफ एक बडा ऑपरेशन चलाया हुआ है और इस ऑपरेशन में जिस तरह से आये दिन रिश्वतखोर पकडे जा रहे हैं उसको लेकर सवाल खडे हो रहे हैं कि आखिरकार भ्रष्टाचारियों के मन सरकार और सिस्टम का डर क्यों नहीं दिखाई दे रहा?

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