देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखण्ड को आदर्श राज्य बनाने का ऐलान करने वाले मुख्यमंत्री जिस राजधानी में विराजमान हैं वहां अगर 96 घंटे से एक दम्पति अपने साथ हुये अन्याय के लिए सडकों पर चिलचिलाती धूप में इंसाफ मांगने के लिए पैदल हाथ में बैनर बोर्ड लेकर धूम रहा है तो उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि दम्पति के मन में सिस्टम को लेकर कितनी बडी नाराजगी पनप रही है कि वह पैदल सडकों पर इंसाफ पाने के लिए सुबह से शाम तक भटक रहे हैं लेकिन इसके बावजूद भी अगर राजधानी का सिस्टम दम्पति को दिलासा देने के लिए उनके साथ संवाद करने से भी अगर हिचक रहा है तो ऐसे में आवाम किससे इंसाफ की उम्मीद करेगा कि जब उसकी आवाज सुनने वाला ही कोई नहीं है तो फिर वह आखिर इंसाफ की उम्मीद किससे करे?
उत्तराखण्ड में डबल इंजन की सरकार मौजूद है और राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी राज्यवासियों को एक नया उत्तराखण्ड देने के लिए संकल्प लिये हुये हैं जिससे हमेशा यही आस बंध रही है कि आखिर वो समय कब आयेगा कि जब आवाम को उसके सपनों का उत्तराखण्ड मिल पायेगा। राजधानी में जहां सारी सरकार, शासन व पुलिस प्रशासन मौजूद है वहां अगर एक दम्पति को इंसाफ पाने के लिए हाथ में बैनर का बोर्ड लेकर सडकों पर उतरना पड रहा है तो उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि सिस्टम की बेरूखी से एक दम्पति कितना मायूस हो रखा है कि उसे न्याय पाने के लिए सडकों पर उतरना पडा? हैरानी वाली बात है कि 96 घंटों से एक दम्पति अपने साथ हुये अन्याय के लिए सडकों पर इंसाफ मांगने के लिए निकला हुआ है और उनके हाथ में जो बैनर वाला बोर्ड है उस पर साफ अंकित है कि कानून पर भरोसा नहीं देश की जनता से निवेदन है कि इंसाफ दिलायें। सडकों पर इंसाफ के लिए निकले दम्पति से जब सामना हुआ और उनसे जब उनकी दास्तां पूछी गई तो उनका कहना था कि उनके परिवार पर दो माह पूर्व हमला हुआ था और इस हमले की रिपोर्ट पुलिस ने दर्ज तो की है लेकिन अभी तक हमलावरों को गिरफ्तार नहीं किया गया है।
दम्पति का कहना था कि वह 96 घंटे से शहर की सडकों पर इंसाफ के बैनर का बोर्ड लेकर इसलिए निकले हुये हैं कि शायद सडकों पर आते जाते सरकार का कोई मंत्री और अफसर उनकी दास्तां सुनकर उन्हें न्याय दिलाने के लिए उन्हें भरोसा दे सके। सवाल यह है कि शहर की सडकों पर एक दम्पति न्याय पाने के लिए 96 घंटों से शहर की सडकों पर चिलचिलाती धूप में सुबह से शाम तक निकल रहा है लेकिन सिस्टम के किसी भी अफसर ने इस दम्पति को इतना दिलासा देने के लिए भी उनसे संवाद नहीं किया कि वह शहर की सडकों पर न धूमें और वह उन्हें जरूर इंसाफ दिलायेंगे। ऐसे में अब सरकार को भी देखना होगा कि उनके राज में कोई भी ऐसा व्यक्ति न हो जो इंसाफ पाने के लिए सिस्टम से नाराज होकर सडकों पर निकल रहा हो?