नशे पर प्रेमनगर थाना प्रभारी का ‘अटैक’

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मेडिकल स्टोर में भाई कर रहे थे नशे का धंधा
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। नशे का धंधा इतना विकराल रूप ले चुका है कि चंद दिन के भीतर प्रेमनगर इलाके में दो मेडिकल स्टोरों से लाखों रूपये के नशीले कैप्सूल, टेबलेट और चंद प्रतिबंधित दवाईयां बरामद हुई हैं। प्रेमनगर थाना प्रभारी ने एक गुप्त सूचना के आधार पर सुधोवाला में स्थित एक मेडिकल स्टोर पर छापा मारा तो कैमिस्ट की दुकान की आड मंे प्रतिबंधित दवाईयां बेचने वाले दो सगे भाईयों को नशीली दवाओं की बडी खेप के साथ दबोच लिया। पूछताछ मंे खुलासा हुआ कि नशे के आदी नौजवानों को नशे की दवाईयां बेच रहे थे। पुलिस के इस ऑपरेशन से नशे का धंधा करने वालों में बडा हडकम्प मच गया है और पुलिस कप्तान ने प्रेमनगर थाना प्रभारी व उनकी टीम को बीस हजार रूपये ईनाम देने की घोषणा की है।
मिली जानकारी के अनुसार प्रेमनगर थाना प्रभारी पीडी भट्ट को गुप्त सूचना मिली थी कि सुद्दोवाला चौक पर दो सगे भाई अपनी मेडिकल स्टोर वंश और आयुष पर नशे का धंधा कर रहे हैं और प्रतिबन्धित दवाइयों को वह नवयुवकों को ऊंचे दामों में बेचते हैं यह खबर मिलते ही थाना प्रभारी ने अपनी टीम के साथ मेडिकल स्टोरांे पर सर्जिकल अटैक किया और वहां से लगभग पचास लाख रूपये की कीमत की प्रतिबन्धित दवाईयां बरामद की। पकडे गये दोनो भाई कृष्ण कुमार और विनय कुमार बल्लुपूर फ्रैंड्स कालोनी में रहते हैं। पूछताछ में उन्होंने खुलासा किया कि वह 2013 से दवाओं को बेचने का कार्य कर रहे है और उनके पास दवाईयों को बेचने का कोई वैध लाइसेंस नहीं है। उक्त प्रतिबन्धित नशीली दवायें केवल चिकित्सक की सलाह पर दी जाती हैं परन्तु नशे के आधी व्यक्ति और युवाओं को वह ऊंचे दामों पर यह दवाईयां बेचते हैं। उन्हांेने कहा कि वर्तमान में मेडिकल स्टोर चलाने के लिए दुकानें भी खरीदी हैं। उक्त प्रतिबन्धित दवाइयों को वह रेसकोर्स निवासी इन्दरजीत नामक व्यक्ति से खरीदते हैं जो कि धर्मपुर मंे दवाओं का डिस्ट्रीब्यूटर है। पकडे गये मेडिकल स्टोर संचालकों ने यह भी खुलासा किया कि सभी प्रतिबन्धित नशीली दवायें इन्द्रजीत से खरीदी थी। ऐसे में सवाल खडा होता है कि जिन मेडिकल स्टोरों के पास दवाइयां बेचने तक का वैध लाइसेंस नहीं है वह कैसे और किसकी शह पर सुद्दोवाला चौक पर सरेआम अपने मेडिकल स्टोर बिना किसी डर के चला रहे हैं। सवाल खडे हो रहे हैं कि क्या स्वास्थ्य सचिव उन ड्रग इंस्पेक्टरों का मेडिकल स्टोर संचालकों के साथ साठगांठ को लेकर कोई बडी जांच कराने का आदेश देंगे क्योंिक जिस तरह से चौराहे पर ही यह नशीली दवायें बेचने का खेल चल रहा है वह कहीं न कहीं स्वास्थ्य महकमें को कटघरे मंे लाकर खडा कर रहा है?

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