प्रमुख संवाददाता
देहरादून। राजधानी के विकासनगर इलाके में ढकरानी के ढालीपुर में सैकडों घरों पर सर्द हवाओं और बारिश के इस मौसम में जिस तरह से सिस्टम ने बुलडोजर चलाकर उन्हें जमीदोज कर दिया उससे वहां रहने वाले मासूम बच्चों से लेकर बडों की आंखों में आंसूओं की धार चीख-चीखकर यही कह रही है कि सरकार मेरा ही गुनाह आपको दिखाई दिया? उजडे परिवारों की आंखों में आसूओं के साथ मन में एक बडा गुस्सा इस बात को लेकर सरकार को कोसता हुआ दिखाई दिया कि आखिरकार बीस वर्षों से किसी भी सरकार को उनका आशियाना अवैध नजर नहीं आया और अब सरकार को उनके सैकडों आशियाने अवैध नजर आ गये जहां पानी भी था, बिजली भी थी और उनके वोटों से राजनेता सरकार में आये लेकिन सरकार ने निर्दयी होकर उनके आशियानों को जिस तरह से जमीदोज किया वह दृश्य एक आम इंसान को काफी विचलित कर रहा है? नदी के किनारे बारिश में मां की गोद में बैठे मासूम बच्चे जिस तरह से अपने उजडे मकानों को निहार रहे थे उससे उनके परिवार की आंखों में जो आसूओं की धार बह रही थी वह यही सवाल कर रहे थे कि काश उन्हें सिर छिपाने के लिए एक छोटा सा आशियाना ही मिल जाता तो उन्हें इस बारिश और सर्द हवाओं में अपने मासूम बच्चों के साथ खुले आसमान के नीचें रहना न पडता। अपने टूटे हुये आशियानों की चंद ईंटों पर कुछ लोगों को खुले आसमान के नीचे खाना बनाकर उसे हाथ में रखकर खाते देख किसी भी इंसान का दिल पिघल रहा था और यह कहने से भी नहीं चूक रहा था कि आखिर सैकडों घरों को बसाने वाले राजनेता और अफसर आखिर कहां गायब हो गये?
विकास नगर में लगातार दो दिनों तक अवैध अतिक्रमण पर प्रशासन का बुलडोजर गरजता रहा, एक और जहाँ भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच प्रशासनिक अमले ने अवैध अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लगभग पूरा कर लिया। वही इस कार्रवाई से प्रभावित लोग खुले आसमान के नीचे मलबे के ढेर पर बैठे रोते बिलखते नजर आए। दुखों के पहाड़ झेल रहे इन लोगों पर जहां एक और प्रशासन का कहर बरस रहा था वही दूसरी और इंद्रदेव भी शायद इन लोगों से खफा थे। इधर बुलडोजर ने अपना काम खत्म किया और उधर झमाझम बारिश बरसने लगी, खुले आसमान के नीचे लोग अपनी बेबसी पर रोते रहे। ताज्जुब की बात यह है कि इलाके का कोई भी जिम्मेदार जनप्रतिनिधि इन लोगों की मदद के लिए सामने नहीं आया। इस कार्रवाई में जहां तकरीबन 600 परिवार बेघर हुए हैं वहीं उत्तराखंड जल विद्युत निगम की जमीने प्रशासन ने खाली करा ली। जल्द खाली की गई जमीनों पर सोलर प्लांट भी लग जायेगा, उत्तराखंड जल विद्युत निगम की तरक्की भी होगी, लेकिन शायद इन गरीब प्रभावित लोगों की आशियाने नहीं बन सकेंगे। इन लोगों को विस्थापित किया जा सकता था लेकिन इस दिशा मेँ सरकार या प्रशासन की ओर से कोई कदम नहीं उठाया गया। शक्ति नहर के दोनों तरफ 15 किलोमीटर के दायरे में 600 अतिक्रमणकारियों को जल विद्युत निगम ने 24 घंटे मेँ कब्जे खाली करने का अल्टीमेटम देने के बाद इस कार्रवाई को अंजाम दिया। हलाकि कार्रवाई के दौरान कोई विरोध देखने को नहीं मिला, बस अपनी बेबसी पर खुले आसमान के नीचे रोते बिलखते लोग सरकार और प्रशासन की कार्रवाई से खफा दिखे। दरअसल उत्तराखंड जल विद्युत निगम से पहले जमीन सिंचाई विभाग के पास थी। पीडि़त लोगो की माने तो पिछले कई दशकों से सिंचाई विभाग की इस जमीन पर सिंचाई विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों, नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने इन गरीबो से पैसा लेकर अपनी जेबे गर्म करते हुए इन लोगों को यहां बसाया, इन्हे सांसद और विधायक निधि से सड़कें मिली, सरकारी योजनाओं में आवास दिलाये गए, बिजली और पानी के कनेक्शन भी मिले। ऐसे में बेघर हुए लोगों का सवाल है कि जब सरकारी अमला उन्हें सारी सरकारी सुविधाएं मुहय्या करा रहा था तो आज उनका यहां रहना अवैध कैसे हो गया। बरहाल प्रशासनिक अमले ने अपना काम पूरा किया, जमीन उत्तराखंड जल विद्युत निगम को सौंप दी गई। लेकिन हजारों बेघर हुए लोगों की चीख पुकार शायद सरकार के कानों तक नहीं पहुंच सकी।