राज्य की नौकरशाही के सामने नतमस्तक दिखी सरकार

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देहरादून(नगर संवाददाता)। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि गैरसैंण भराडीसैंण में आहूत बजट सत्र में कांग्रेस विधानमडंल दल ने उपलब्ध कम समय में विधानसभा के माध्यम से जनता के हर प्रश्न को उठाने की कोशिश की परंतु सरकार हर मामले में असंवेदनशील व अनुभवहीन सिद्ध हुई और राज्य की नौकरशाही के सामने नतमस्तक दिखी है।
यहां विधानसभा भवन में बजट सत्र स्थगित होने के बाद विधायकों के साथ पत्रकारों से रूबरू होते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस विधानमंडल दल ने प्रश्न काल, कार्य स्थगन, बजट पर सामान्य चर्चा और अन्य स्वीकृत नियमों के अन्र्तगत बेरोजगारों के उत्पीडऩ, नकल माफिया, पुरानी पेंशन योजना की बहाली, जोशीमठ सहित प्रदेश के अन्य स्थानों की आपदा, प्रदेश भर के भूमिधरी आदि मामलों को उठाया और इन सभी मामलों में सरकार विपक्ष के प्रश्नों का सीधा जबाब देने से भागती रही। उन्होंने कहा कि सत्र की अवधि कम होने के कारण उद्यान सहित कई अन्य विभागों के घोटालों और जनता से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवालों से संबधित प्रश्नों पर चर्चा नहीं हो पायी। उन्होंने आरोप लगाया कि गैरसैंण सत्र में सरकार के गलत जबाबों, उसकी संवादहीनता, असंवेदनशीलता और हठधर्मिता के कारण कई संसदीय परम्पराऐं भी तार-तार हुई हैं। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि, इस बार राज्य की जनता को आशा थी कि, सत्र लंबा चलेगा लेकिन सरकार ने पूर्व में घोषित अवधि से दो दिन पहले सत्र ही सत्र को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर यह सिद्ध कर दिया कि राज्य के सर्वोच्च सदन विधायिका के द्वारा राज्य की जनता के बड़े प्रश्नों को हल करने में उसकी कोई रुचि नहीं है।
उन्होंने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों के लिए 1० प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण के बिल को गैरसैंण में कैबिनेट से विधानसभा में रखने हेतु स्वीकृृति दिलवाने के बाद भी सरकार ने विधानसभा के पटल पर नहीं रखा न ही कांग्रेस की विधायक अनुपमा रावत के इस विषय पर प्राइवेट मेम्बर बिल को सदन में आने दिया। उन्होंने कहा कि इस राज्य के इससे बड़ा मजाक क्या होगा कि उसके निर्माण के लिए संघर्ष करने वाले राज्य आंदोलनकारियों के साथ सरकार इतना बड़ा मजाक करती है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि राज्य के सैकड़ो ऐसे विषय हैं जो बिल लाकर कानून बनने की बाट जोह रहे हैं और इसके बाबजूद भी सरकार विधानसभा का सत्र चलाने के लिए बिजनेस न होने के बात कर रही हो तो यह सिद्ध हो जाता है कि, भाजपा को केन्द्र की संसद से लेकर राज्य की विधानसभाओं तक संसदीय प्रणाली के शासन को चलाने में कोई रुचि नहीं है। इस अवसर पर नेता प्रतिपक्ष ने 2०23-24 के बजट को अक्षम सरकार द्वारा पेश किया गया दिशाहीन बजट बताया। उन्होंने कहा कि इस बजट दिशाहीन , संकल्पविहीन , प्रतिगामी, विकास अवरोधी तथा आम आदमी के हितों के खिलाफ महंगाई बढ़ाने वाला बजट कहा जाय तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। आम बजट में मात्र कोरी घोषणाओं का अंबार लगाया गया है परन्तु उन्हें पूरा करने के लिए पैसा कहां से आयेगा इसका कोई उल्लेख नहंीं है। उन्होंने कहा कि यदि इसे कर्ज लेकर घी पीने वाला बजट कहा जाय तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।
इस अवसर पर नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि, सरकार ने बजट में इस वित्तीय वर्ष में 19 हजार 46० करोड़ रुपए का ऋण लेने का अनुमान लगाया है। 2०17 में भाजपा सरकार आने के बाद यदि सात सालों में लिए सरकार द्वारा लिए गए कर्ज को जोड़ा जाय तो यह 99 हजार 749 करोड़ रुपया होता है। उन्होंने आश्चर्य व्यक्त करते हुए बताया कि, राज्य बनने के बाद 17 सालों में सभी सरकारों ने 2०17 तक केवल 35 हजार करोड़ रुपए का कर्ज लिया गया था और 2०17 के बाद भाजपा सरकारों के सातसालों में लगभग एक लाख करोड़ रुपए का कर्ज लिया गया। इस अवसर पर नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार ने सदन में विपक्ष के इस प्रश्न का जबाब भी नहीं दिया कि वह सदन के माध्यम से राज्य की जनता को बतायें कि, आज के दिन राज्य पर कितना कर्ज है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि, आंकडें गवाह हैं कि, 22 सालों में लिए गए कर्ज में से कुछ कर्ज वापसी और ब्याज अदायगी के बाद भी राज्य पर आज लगभग एक लाख 2० करोड़ से अधिक कर्जा निकलेगा। इस अवसर पर नेता प्रतिपक्ष ने पत्रकारों को बताया कि , राज्य का इस साल का बजट केवल 77 हजार 4०7 करोड़ का है और राज्य पर कर्ज उससे कही अधिक एक लाख 2० हजार करोड़ रुपए के लगभग का है तो आप सभी राज्य की आर्थिक स्थिति को समझ सकते हैं।
उन्होंने कहा कि हमने आंकड़ों के साथ सरकार से पूछा कि, इतना कर्ज क्यों लिया जा रहा है या सात साल में लिए एक लाख रुपए के कर्ज से राज्य में क्या उत्पादकता हुई है और कितने नए रोजगारों का सृृजन हुआ है कौन सी जनकल्याणकारी योजना चलाई है तो सरकार ने इन प्रश्नों का कोई जबाब नहीं दिया। इस अवसर पर नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि कोरी घोषणाओं व जुमलेबाजी के इस बजट में वित्तीय प्रबन्धन का नितांत अभाव है इसलिए उत्तराखण्ड राज्य पर कर्ज उसके सालाना बजट के आकार से कही अधिक हो गया है। कर्ज और देनदारी को कुल सकल घरेलू उत्पाद याने जीएसडीपी का 25 प्रतिशत तक रखने की राजकोषीय उत्तरदायित्व एंव बजट प्रबंधन अधिनियम (एफआरबीएम) की सीमा को उत्तराखण्ड 2०19-2०2० में ही लांघ चुका है। उन्होंने कहा कि इस वित्तीय वर्ष के अंत तक सरकार की आटसटैंडिग लाइबलिटीज जीएसडीपी का 28.2 प्रतिशत हो जायेगी। जो खतरे के संकेत से 3.2 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि गैरसैंण में बजट सत्र के आयोजन के बाद भी ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण का नाम तक बजट भाषण में न लेना यह सिद्ध करता है कि सरकार को गैरसैंण और पर्वतीय क्षेत्र के विकास और उनकी भावनाओं की कोई परवाह नहीं है। इस अवसर पर पत्रकार वार्ता में पूर्व नेता प्रतिपक्ष एवं विधायक प्रीतम सिंह, विधायक फुरकान अहमद, ममता राकेश, अनुपमा रावत ,वीरेंद्र जाति, रवि बहादुर, प्रदेश कांग्रेस मीडिया प्रभारी राजीव महर्षि आदि उपस्थित थे।

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