तो क्या भाजपा ने पहचान लिये भीतरघातियों के चेहरे?

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प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में हुये विधानसभा चुनाव के दौरान यह बात उठी थी कि पार्टी के ही कुछ नेताओं ने अपने राजनेताओं को हरवाने के लिए साजिशों का तानाबाना बुना था और जब राज्य के मुख्यमंत्री खटीमा से चुनाव हारे तो उसके बाद यह आशंकायें प्रबल हुई थी कि पार्टी के ही कुछ राजनेताओं ने पर्दे के पीछे रहकर साजिशों का ऐसा तानाबाना बुना था कि मुख्यमंत्री को चुनाव में हार मिल गई थी? अब भाजपा सरकार कभी भी दायित्वों का बटवारा कर सकती है लेकिन भाजपा ने सम्भवत: उन भीतरघातियों के चेहरों की पहचान कर ली है जिन्होंने चुनाव के दौरान पार्टी विरोधी काम किया था और इसी के चलते उन्हें सरकार दायित्व देने से परहेज करेगी क्योंकि इसकी पुष्टि खुद भाजपा के प्रदेश प्रभारी ने मीडिया के सामने कर दी है।
उल्लेखनीय है कि उत्तराखण्ड में जब पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद खण्डूरी को पार्टी के ही कुछ राजनेताओं ने भीतरघात के चलते हरवा दिया था तो उसके बाद काफी भूचाल मचा था कि पार्टी उन भीतरघातियों पर जरूर बडा एक्शन करेगी जिन्होंने पार्टी विरोधी काम करके पूर्व मुख्यमंत्री को ही चुनाव में हरवा दिया था? हालांकि उस दौरान भाजपा ने ऐसे किसी भी भीतरघाती के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की जिसके चलते भीतरघातियों के हौसले बुलंद होते चले गये और यह भीतरघात राज्य में हुये विधानसभा चुनाव में भी भाजपा को देखना पडा था? मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जिन्होंने भाजपा को तो सत्ता में पहुंचा दिया लेकिन कुछ अपनों के भीतरघात ने उन्हें खटीमा में विधानसभा चुनाव हरवाकर समूची भाजपा को चिंता में डाल दिया था? अब राज्य में भाजपा सरकार दायित्वों का बटवारा करने के लिए अपनी अंतिम सूची को अमलीजामा पहनाने के मिशन में लगी हुई है और यह बात भी साफ हो रही है कि भाजपा ने उन सभी भीतरघातियों के चेहरे पहचान लिये हैं जिन्होंने पार्टी विरोधी काम किया था जिन्हें अब भाजपा दायित्व देने से दूरी बनाने का काम करती हुई नजर आयेगी।

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