गजब की कांग्रेस!

0
197

प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में कांग्रेस भले ही लम्बे समय से विपक्ष की भूमिका में दिखाई न दे रही हो लेकिन गजब की बात है कि जो कंांग्रेेस पूर्व में विधानसभा भर्ती घोटाले में सीबीआई जांच की मांग पर अडी हुई थी वह कांग्रेस अब विधानसभा भर्ती घोटालें में यू-टर्न लेती हुई नजर आई तो राज्यवासी भी हैरान नजर आ रहे हैं क्योंकि बर्खास्त कर्मियों को बहाल करने के लिए जिस तरह से कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर बर्खास्त कर्मियों की पैरवी में अपनी रूचि दिखाई उससे यह बात उठ रही है कि राज्य में कांग्रेस गजब की राजनीति कर रही है? कांग्रेस जहां इन दिनों राज्य में हुई भ्रष्टाचार की भर्तियों की जांच सीबीआई से कराने को लेकर सडकों पर प्रदर्शन कर रही है वहीं विधानसभा से निकाले गये बर्खास्त कर्मचारियों की पैरवी में कांग्रेसी नेताओं का आगे आना आवाम को हैरान कर रहा है?
उत्तराखण्ड में बाइस सालों से भ्रष्टाचार और घोटालों पर राज्य की मुख्यधारा में राजनीति करने वाले दोनो दल कांग्रेस व भाजपा मुखर दिखाई देते रहे हैं लेकिन जिस सरकार के कार्यकाल में भ्रष्टाचार और घोटाले होते रहे विपक्ष सरकार को सडक से लेकर सदन तक घेरता हुआ तो जरूर दिखाई दिया लेकिन विपक्ष में रहने वाला दल जब सत्ता पर आसीन होता रहा तो उसने कभी भी भ्रष्टाचारियों के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद नहीं की जिसके चलते उत्तराखण्ड हमेशा देशभर में भ्रष्टाचार और घोटालों को लेकर चर्चा का केन्द्र बना रहता है? उत्तराखण्ड में युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सामने जब राज्य की विधानसभा में बैकडोर से हुई भर्तियों का शोर पहुंचा था तो उन्होंने आनन-फानन में विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर विधानसभा में हुई सभी भर्तियों की जांच कराने की मांग की थी जिस पर विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूरी ने रिटायर्ड अफसरों की एक कमेटी बनाकर उन्हें एक माह में रिपोर्ट देने को कहा था जिसके बाद इस कमेटी ने जब अपनी रिपोर्ट विधानसभा अध्यक्ष को दी तो कांग्रेस के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल और भाजपा के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल के कार्यकाल में हुई भर्तियों को अवैध करार दिया गया जिसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने इन सभी भर्तियों को रद्द कर दिया था जिसके बाद यह मामला उच्च न्यायालय से लेकर देश की सर्वोच्च न्यायालय में पहुंचा तो उन्होंने भी विधानसभा अध्यक्ष की कार्यवाही को सही ठहराया। विधानसभा में बैकडोर से भर्ती हुये बर्खास्त कर्मचारियों पर तो गाज गिरी लेकिन राज्य के अन्दर यह बहस चल गई कि जिन्होंने इन भर्तियों को किसी था उन पर कार्यवाही आखिर क्यों नहीं की जा रही है? उत्तराखण्ड के अन्दर विधानसभा में हुई इन भर्तियों को लेकर काफी भूचाल मचा था और यह आवाज भी उठी थी कि जबसे राज्य बना है तबसे विधानसभा में हुई भर्तियों का सच जनता के सामने क्यों नहीं लाया जा रहा? उत्तराखण्ड कांग्रेस के कुछ बडे नेताओं ने चंद दिन पूर्व विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूरी से मुलाकात कर विधानसभा से बर्खास्त किये गये कर्मचारियों को पुन: बहाल करने के लिए कोटिया कमेटी का गठन करने की जो मांग उठाई है उससे कांग्रेस के चंद नेता राज्यवासियों के निशाने पर दिखाई दे रहे हैं और उनका यह सीधा आरोप है कि आखिरकार क्या कारण है कि जो कांग्रेसी नेता विधानसभा में हुई भर्तियों की जांच सीबीआई से कराने की मांग उठा रही थी आज वहीं कांग्रेस विधानसभा से बर्खास्त किये गये कर्मचारियों को पुन: बहाल करने की दिशा में क्यों और किस कारण से आगे आ गये हैं यह उनकी मंशा पर सवाल खडे कर रहा है?

LEAVE A REPLY