नकल कानून बनाकर पुष्कर ने भेदा विपक्ष का चक्रव्यूह!

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एक फैसले से हीरो बन गये सीएम
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में पिछले लम्बे समय से भ्रष्टाचार की भर्तियों ने राज्यवासियों को हैरान कर रखा है और उसी के चलते बेरोजगार छात्र नकल माफियाओं और उनके साथ जुडे सिंडिकेट के चेहरों को बेनकाब करने के लिए आंदोलन की राह पर निकल पडे और वह इन भर्तियांे की जांच सीबीआई से कराने के लिए बगावत का झंडा लेकर आगे बढे तो उससे राज्यभर में बेरोजगार छात्रों और कांग्रेस ने सरकार को घेरने के लिए मुहिम चलाकर उसे संकट मंे डाल दिया लेकिन मुख्यमंत्री ने विपक्ष के हाथों आये इस मुद्दे को एक ही झटके में उस समय धडाम कर दिया जब उन्हांेने राज्य में नकल विरोधी कानून बनाकर उस पर राजभवन की मोहर लगवा दी। मुख्यमंत्री के एक फैसले से जहां विपक्ष को एक बडा झटका लगा वहीं वह राज्यवासियों के सामने हीरो भी बन गये क्योंकि नकल विरोधी कानून कब आयेगा इसको लेकर संशय बना हुआ था लेकिन मुख्यमंत्री ने अपने अधिकार का प्रयोग करते हुए नकल विरोधी कानून को हरी झंडी देकर बेरोजगार युवाओं को यह संदेश दे दिया कि उन्हांेने जो संकल्प लिया था उसे उन्होंने पूरा कर नकल माफियाओं को कडा संदेश दे दिया है कि अगर उन्हांेने अब युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड करने का दुसाहस किया तो उन्हें इसका बडा खामियाजा भुगतना पडेगा।
उल्लेखनीय है कि उत्तराखण्ड की पूर्व सरकारों में भ्रष्टाचार और घोटालांे का तो तांडव राज्य की जनता देखती ही आई लेकिन उसे इस बात की कभी भनक नहीं लग पाई कि राज्य मंे हुई कई सरकारी नौकरियों की भर्ती में भ्रष्टाचार का बडा खेल खेला गया था और नकल माफियाओं ने नौकरियां बेचने वाले सिंडिकेट के साथ मिलकर राज्य मंे हुई कई भर्तियांे में अपने लोगों को लगवाकर राज्य के युवाओं के भविष्य पर एक बडा ग्रहण लगा रखा था और राज्य के युवा हमेशा सरकारी नौकरी न मिलने पर सरकारों को कोसते दिखाई दे रहे थे लेकिन उनकी आवाज सुनने वाला कोई नजर नहीं आ रहा था? उत्तराखण्ड में भ्रष्टाचार से हुई कई भर्तियों की जन्मकुडंली उस समय खुलनी शुरू हुई जब बेरोजगार छात्रों ने कुछ भर्तियों में भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर उन्हें निरस्त करने की मांग की थी। उत्तराखण्ड मंे पारदर्शिता के साथ सरकार चला रहे राज्य के युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भर्तियांे में हुये भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए जब अपने कदम आगे बढाये और जांच एसटीएफ, एसआईटी और विजिलेंस ने अलग-अलग करनी शुरू की तो राज्यवासी हैरान हो गये कि पूर्व सरकारों के कार्यकाल में हुई काफी भर्तियां भ्रष्टाचार के आकंठ में डूबी हुई थी। इन भ्रष्टाचार वाली भर्तियों में शामिल नकल माफियाओं और नौकरियां बेचने वाले सिंडिकेट को बेनकाब करने के लिए ऑपरेशन चलाया गया और काफी संख्या मंे नकल माफिया और नौकरियां बेचने वाले सिंडिकेट में शामिल कुछ गुनाहगार जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा दिये गये। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने युवा पीढी के साथ होते आ रहे अन्याय को देखते हुए साफ ऐलान किया था कि राज्य में नकल विरोधी कानून लाकर नकल माफियाओं को बडा सबक सिखाया जायेगा। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री ने नकल विरोधी कानून लाने के लिए अपनी पूरी रणनीति तैयार कर रखी थी लेकिन बेरोजगार युवा इस मांग पर अड गये कि भ्रष्टाचार से हुई सभी भर्तियांे की जांच सीबीआई से कराई जाये और इसी को लेकर गांधी पार्क मंे कुछ ऐसा घटा कि उससे राज्यभर का तापमान बढ गया और बेरोजगार युवाओं के साथ कांग्रेस ने भी भ्रष्टाचार से हुई सभी भर्तियांे की जांच सीबीआई से कराने को लेकर सरकार पर हल्ला बोल दिया और उन्हांेने बेरोजगार युवाआंे के कंधे पर बंदूक चलाने के लिए अपने कदम आगे बढाये तो राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी ने विपक्ष की धार को कंूंद करने के लिए अपने अधिकार का प्रयोग करते हुए नकल विरोधी कानून को राजभवन से पास कराकर विपक्ष को ऐसा झटका दिया कि उसके हाथ आया बडा मुद्दा हवा-हवाई हो गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नकल विरोधी कानून लाकर जहां राज्य के युवाओं के मन में अपनी सरकार को लेकर एक भरोसा पैदा किया है वहीं मुद्दाविहीन हो चुकी कांग्रेस जो कि बेरोजगार छात्रों के सहारे सरकार को घेरने का चक्रव्यूह रच चुकी थी उस चक्रव्यूह को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक झटके में ही तोडकर रख दिया।

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