प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री राज्य को आदर्श राज्य बनाने के लिए एक बडे संकल्प के साथ काम कर रहे हैं और उन्होंने भ्रष्टाचार से हुई भर्तियों को लेकर नकल माफियाओं के खिलाफ कडा कानून बनाने का वचन दे रखा है लेकिन युवा राज्य में भ्रष्टाचार से हुई सभी भर्तियों की जांच सीबीआई से कराने के लिए आंदोलन की राह पर निकल पडे हैं जिससे सरकार के सामने एक बडा संकट आकर खडा हो रखा है। गांधी पार्क में सत्याग्रह कर रहे बेरोजगार युवाओं को रात्रि के समय पुलिस के कुछ जवानों ने जिस तरह से उन्हें अपनी वर्दी का रौब गालिब करते हुए उनके साथ अभद्रता की उसी एक गलत फैसले से उत्तराखण्ड की राजधानी में बेरोजगार युवाओं का सैलाब सडकों पर उमड आया और उसके बाद देहरादून के कई इलाके इस सैलाब से रेंग-रेंगकर सडकों पर चलते हुए दिखाई दिये। बेरोेजगार युवा और पुलिस के बीच आपसी तनातनी में माहौल खराब हुआ और पथराव से लेकर लाठीचार्ज की घटना से समूचा उत्तराखण्ड सुलग गया और विपक्ष को बैठे बिठाये एक बडा मुद्दा सरकार को घेरने का मिल गया और यही कारण है कि बेरोजगार युवाआंे पर हुये लाठीचार्ज को लेकर कांग्रेस भी सरकार को हिटलर बताने से नहीं चूक रही है। उत्तराखण्ड के अन्दर यह बहस शुरू हो गई है कि अगर सत्याग्रह कर रहे युवाओं के साथ सिस्टम छेडखानी करने के लिए आगे न आता तो समूचा उत्तराखण्ड आज ठंड के इस मौसम में तपिश में न जूझ रहा होता?
उल्लेखनीय है कि उत्तराखण्ड मंे भ्रष्टाचार से होती भर्तियों ने युवाओं के मन में एक बडी नाराजगी पैदा कर रखी है और वह सरकार से यही मांग कर रहे हैं कि भ्रष्टाचार से हुई सभी भर्तियों की सीबीआई से जांच कराई जाये क्योंकि यह मामला काफी गंभीर है और वो सभी चेहरे बेनकाब होने चाहिए जो इन भर्तियों के पीछे शामिल हो सकते हैं? सरकार के मुखिया पुष्कर सिंह धामी ऐलान कर चुके हैं कि नकल माफियाओं पर शिंकजा कसने के लिए नकल विरोधी कानून लाया जा रहा है और इस कानून को इतना सख्त बनाया जायेगा कि कोई भी नकल कराने का दुस्साहस न कर पाये। राज्य में भ्रष्टाचार से हुई भर्तियों के चलते उत्तराखण्ड देशभर में एक चर्चा का विषय बना हुआ है और यह बहस चल रही है कि आखिरकार उत्तराखण्ड मंे हर दूसरी भर्ती में भ्रष्टाचार का खेल कितनी चतुराई से खेला गया कि पूर्व सरकारों को या तो इसकी भनक नहीं लग पाई या फिर सबकुछ जानते हुए भी वह अनजान बनी रही? उत्तराखण्ड के बेरोजगार युवाओं के मन में एक बडा गुस्सा है कि आखिरकार भ्रष्टाचार की भर्तियों में बडे-बडे राजदार आखिर कब सलाखों के पीछे पहुंचेंगे क्योंकि पुलिस और एसआईटी की जांच पर उन्हें भरोसा नहीं हो रहा? दो दिन पूर्व बेरोजगार युवकों ने गांधी पार्क में सभी भर्तियों की जांच सीबीआई से कराने को लेकर सत्याग्रह किया और वह शांत भाव में अपना सत्याग्रह कर रहे थे लेकिन न जाने सिस्टम ने सत्याग्रह करने वाले कुछ छात्रों को पुलिस के बल पर डराने का प्रयास किया और वहां जिस तरह से कुछ बेरोजगार छात्रों के साथ पुलिस के कुछ जवानों ने अभद्रता की उस एक गलत फैसले से आज उत्तराखण्ड सुलगता हुआ दिखाई दे रहा है? राजधानी में बीते रोज हजारों बेरोजगार छात्रों का सैलाब उमडा तो उसके पीछे सिस्टम का एक गलत फैसला ही माना जा रहा है क्योंकि अगर सत्याग्रह कर रहे बेरोजगार छात्रों को पुलिस अपनी वर्दी का रौब गालिब करने के लिए न जाती तो आज समूचे राज्य में सरकार के खिलाफ धरने-प्रदर्शन नहीं हो रहे होते? उत्तराखण्ड के अन्दर यह भी बहस चल उठी है कि बेरोजगार छात्रों की मांग अनुचित दिखाई नहीं देती क्योंकि वह भ्रष्टाचार से हुई भर्तियांे का असली सच सामने लाने के लिए इन भर्तियों की जांच सीबीआई से कराने की मांग कर रहे हैं। सवाल खडे किये जा रहे हैं कि ऐसे में सरकार को बेरोजगार छात्रों की इस मांग पर कोई एतराज भी नहीं होना चाहिए क्योंकि भ्रष्टाचार से हुई भर्तियां पूर्व सरकारों के कार्यकाल में हुई थी और इन भर्तियांे से पुष्कर सरकार का कोई लेना-देना भी नहीं है ऐसे में सिस्टम ने दो दिन पूर्व बेरोजगार छात्रों के सत्याग्रह आंदोलन में पुलिस को आगे करके जो चिंगारी लगाई उसकी आग समूचे राज्य में सरकार को ही अपनी तपिश मंे ले रही है जिससे पुष्कर सरकार के सामने इस बडे संकट से उभरना एक चुनौती बन गया है।