ऋ तु खण्डूरी के खिलाफ कौन रच रहा साजिश?

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प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड के इतिहास में पहली बार ऐसा देखने को मिला जब किसी विधानसभा अध्यक्ष ने बैकडोर से विधानसभा में हुई भर्तियों को लेकर सरकारी सिस्टम से जांच न कराकर पूर्व अफसरों की एक टीम पर विश्वास कर उन्हें भर्तियों का सच सामने लाने का मिशन सौंपा था और इस मिशन को पूर्व अफसरों की टीम ने समय सीमा से पहले ही पूरा किया और कांग्रेस व भाजपा शासनकाल के दो पूर्व विधानसभा अध्यक्षों द्वारा विधानसभा में बैकडोर से कराई गई भर्तियों को अवैध करार देकर उत्तराखण्ड की सियासत में एक बडी हलचल मचा दी थी। विधानसभा में बैकडोर से हुई भर्तियों को लेकर बनाई गई कमेटी की रिपोर्ट के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने लगभग ढाई सौ कर्मचारियों को विधानसभा से बाहर का रास्ता दिखाया और उच्च न्यायालय से लेकर सुप्रीम कोर्ट ने जिस तरह से विधानसभा अध्यक्ष की कार्यवाही पर मोहर लगाई उससे राज्य के काफी सफेदपोश विधानसभा अध्यक्ष के बढते इकबाल से डरे और सहमें हुये नजर आ रहे हैं? विधानसभा अध्यक्ष द्वारा विधानसभा में बैकडोर से की गई भर्तियों पर जिस तरह से सख्त एक्शन लिया गया उसके चलते पिछले कुछ समय से उन्हें निशाने पर लेने का खेल चल रहा है और इस खेल की साजिश कौन पर्दे के पीछे से खेल रहा है यह एक दिलचस्प रहस्य बना हुआ है? वहीं सोशल मीडिया पर काफी लोग विधानसभा अध्यक्ष को एक दबंग और स्वच्छ राजनेता के रूप में देख रहे हैं जिसके चलते काफी सफेदपोशों और कुछ कलमकार उन्हें एक सोची समझी रणनीति के तहत निशाने पर लेने का जो खेल खेल रहे हैं उससे उत्तराखण्ड की सियासत में इन सर्द हवाओं में राजनीति की एक बडी तपिश महसूस की जा रही है?
उत्तराखण्ड में सख्त अंदाज में राजनीति करने के माहिर माने जाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद खण्डूरी की पुत्री ऋतु खण्डूरी को सरकार ने विधानसभा अध्यक्ष के पद पर तैनात किया हुआ है और उसके बाद से उन्होंने इस पद पर रहते हुए विधानसभा की गरिमा को चार-चांद लगाने के लिए हमेशा एक बडी रणनीति के तहत काम कर रही है। उत्तराखण्ड में जब विधानसभा में पूर्व में हुई बैकडोर से भर्तियों को लेकर शोर मचना शुरू हुआ और उसके बाद इसकी गूंज मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कानों में गूंजी और उन्हें जब विधानसभा में बैकडोर से हुई भर्तियों की जांच के लिए पत्र सौंपा गया तो उन्होंने बिना कोई देर किये विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर विधानसभा में हुई बैकडोर भर्तियों की जांच कराने की मांग की थी तो विधानसभा अध्यक्ष ने राज्य में पहली बार पूर्व अफसरों की एक टीम गठित कर उन्हें विधानसभा में आज तक हुई बैकडोर से सभी भर्तियों की जांच एक माह के भीतर करने के लिए आदेशित किया था और इस टीम ने एक माह की अवधि से पहले ही अपनी जांच रिपोर्ट विधानसभा अध्यक्ष को सौंप दी थी जिसके बाद कांग्रेस के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल और भाजपा के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल के कार्यकाल में बैकडोर से हुई भर्तियों पर विधानसभा अध्यक्ष ने करारी चोट करते हुए उनके कार्यकाल में हुई लगभग ढाई सौ भतियों को एकसाथ निरस्त कर अपना विजन साफ कर दिया था। दोनो पूर्व विधानसभा अध्यक्षों के कार्यकाल में हुई बैकडोर से हुई भर्तियों का सच सामने आने के बाद उत्तराखण्ड की सियासत में काफी भूचाल मच गया था और विपक्ष ने बार-बार पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल का इस्तीफा मांगा और राज्य के मुख्यमंत्री से तत्काल कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल को मंत्रीमण्डल से बर्खास्त करने की मांग की थी। सोशल मीडिया पर काफी शोर मचा कि जिन कर्मचारियों को विधानसभा से बर्खास्त किया गया है उनका अपराध तो माफ करने लायक नहीं माना जा रहा लेकिन जिन्होंने बैकडोर से इन भर्तियों को हरी झण्डी दी थी उन पर अभी तक क्या कार्यवाही हुई है? विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूरी ने जबसे बैकडोर से हुई भर्तियों को निरस्त किया है तबसे कुछ सफेदपोश और कुछ कलमकार एक सोची समझी रणनीति के तहत उन्हें निशाने पर लेने का खेल पर्दे के पीछे रहकर खेल रहे हैं जिससे बहस चल रही है कि आखिरकार ऋतु खण्डूरी के खिलाफ साजिश का खेल खेलने वाले आखिर कौन-कौन चेहरे हैं जो उन्हें निशाने पर ले रहे हैं? हालांकि सोशल मीडिया पर कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूरी में फैसले लेने की क्षमता अपने पिता भुवन चंद खण्डूरी की तरह दिखाई दे रही है जिसके चलते उन्हें उत्तराखण्ड का एक दबंग राजनेता भी माना जा रहा है। उत्तराखण्ड की सियासत में ऋतु खण्डूरी की राजनीतिक सोच बडी दिखाई दे रही है उससे उत्तराखण्ड के कुछ सफेदपोश बेचैन जरूर दिखाई दे रहे हैं?

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