खतरनाक सट्टेबाजों का खाकी से गठबंधन!

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प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड के पुलिस मुखिया अपराधियों और सट्टेबाजों के खिलाफ बडा ऑपरेशन चलाने के लिए बार-बार पुलिस अफसरों को अल्टीमेटम दे रहे हैं लेकिन राजधानी में पुलिस मुखिया का यह अल्टीमेटम हवा में उडाया जा रहा है और तो और खतरनाक सट्टेबाजों का खाकी से जिस तरह से बडा गठबंधन हो रखा है वह यह बताने के लिए काफी है कि पुलिस के कुछ लोग सिर्फ दौलत के लिए अपने ही अफसरों की आंखों में धूल झोकने का खेल खेल रहे हैं? राजधानी में सट्टेबाजी का सारा साम्राज्य एक परिवार चला रहा है और ऐसा नहीं है कि इस गैंग की राजधानी पुलिस के अफसरों को जानकारी नहीं है लेकिन जब भी पुलिस कप्तान ने इस गैंग पर नकेल लगाने के लिए खाका तैयार किया तो कप्तान का प्लान रहस्यमय ढंग से लीक हो गया और उसके बाद सट्टेबाजों ने क्रिकेट मैचों को दून में खिलाने के बजाए दूसरे राज्यों में शरण लेकर अपने इस काले धंधे को खुलकर अंजाम दिया? गजब की बात तो यह है कि एक पूर्व पुलिस कप्तान को इस गैंग के बारे में जानकारी मिली थी लेकिन साहब भी शायद इस गैंग की दौलत की चाश्नी में डूबकी लगाकर खामोश हो गये थे और यही कारण है कि गैंग निर्भिक होकर अपने सट्टे के इस खेल को अंजाम दे रहा है? चंद दिन पूर्व एक व्यापारी पर जब क्रिकेट के सट्टे का करोडो रूपये कर्ज चढा और सट्टेबाजों ने उसे पैसे देने के लिए आतंकित किया तो उसने खुद को गोली मारकर मौत को गले लगा लिया? यह मौत आत्महत्या नहीं बल्कि एक तरह से हत्या ही कही जायेगी क्योंकि सट्टेबाजों का गैंग व्यापारी को आतंकित करने का खेल खेल रहा था ऐसे में पुलिस कप्तान को चाहिए कि वह मृतक व्यापारी के मोबाइल नम्बर की सीडीआर निकालकर उसमें सच को खंगाले और सट्टेबाजों के खिलाफ तीन सौ छह का मुकदमा दर्ज कराकर सट्टेबाजों की नाक में नकेल डालें?
उल्लेखनीय है कि उत्तराखण्ड के पुलिस मुखिया अशोक कुमार तो राज्य में अपराधियों और अवैध धंधों में लिप्त गुनाहगारों पर शिकंजा कसके अवैध रूप से कमाई गई सम्पत्तियों को सीज करने के आदेश दे चुके हैं जिसके बाद से अवैध धंधों में लिप्त गुनाहगारों के मन में एक बडा डर देखने को मिला था लेकिन जब राजधानी में ही सट्टेबाजों पर पुलिस ने चुप्पी साध ली तो उससे सट्टेबाजों के हौसले इतने बुलंद हो गये कि वह अपने इस काले कारोबार को इतना फैला चुके हैं कि सट्टेबाजों के सिंडिकेट और खाकी के कुछ लोगों के बीच एक बडा गठबंधन देखने को मिल रहा है। हैरानी वाली बात यह है कि पुलिस के ही कुछ लोग सट्टेबाजों के लिए मुखबरी तक कर रहे हैं और उन्हें पुलिस के होने वाले ऑपरेशन से पहले ही उन्हें सचेत कर देते हैं कि वह मौजूदा दौर में राजधानी के अन्दर क्रिकेट का सट्टा न करें और दूसरे राज्य में जाकर वह मैचों पर सट्टा लगायें। राजधानी में सट्टेबाजों का एक खतरनाक सिंडिकेट दौलत के दम पर काफी खाकीधारियों के साथ पर्दे के पीछे से गठबंधन किये हुये हैं और यही कारण है कि इस खतरनाक सट्टेबाजों के सिंडिकेट पर पुलिस नकेल लगाने के लिए आगेे ही नहीं आना चाहती? सिर्फ छुटभईयों को सट्टे की पर्चियों के साथ पकडकर वह ऐसे इतरा रही है जैसे मानो सट्टेबाजों का कितना बडा नेटवर्क भेद दिया हो? सट्टेबाजों में पुलिस का तिनकाभर भी खौफ देखने को नहीं मिल रहा और तो और राजधानी में एक परिवार के आधा दर्जन सदस्य सट्टे के काले कारोबार से अकूत दौलत का किला खडा कर चुके हैं और उन पर पुलिस अफसर शिंकजा कसने के लिए क्यों आगे आने से कतराते हैं यह हैरान करने जैसा है? समझ से परे है कि एक ओर तो पुलिस मुखिया अवैध धंधेबाजों पर गैंगेस्टर, उनकी हिस्ट्रीशीट खोलने और उनके द्वारा अवैध ध्ंाधों से कमाई गई सम्पत्ति को सीज करने का फरमान जारी कर चुके हैं वहीं पुलिस के कुछ दरोगा और कर्मचारी सट्टेबाजों के खतरनाक गैंग के आंचल में जिस तरह से अपना सिर रखकर उनके साथ दुलार कर रहे हैं उससे पुलिस मुखिया का मिशन अपराधी व गुनाहगार परवान नहीं चढ पा रहा है? इससे बडा चिंता का विषय क्या हो सकता है कि चंद दिन पूर्व कैंट के ईदगाह में रहने वाले एक व्यापारी पर जब क्रिकेट के सट्टे का करोडो रूपये कर्ज हुआ तो उन्होंने चर्चा है कि खुद को मौत के हवाले कर दिया? इस मौत का गुनाहगार क्रिकेट का सट्टा गैंग माना जा रहा है क्योंकि अगर यह गैंग व्यापारी को पैसे देने के लिए आतंकित न करता तो आज वह व्यापारी अपने परिवार के साथ जिंदा होता? अगर पुलिस खतरनाक सट्टेबाजों का गैंग नहीं भेद सकती तो उसे चाहिए कि वह उन छुटभैयों को भी जेल की सलाखों के पीछे न पहुंचाये जिन्हें चंद रूपयों के साथ पुलिस सट्टे में कापी, पेन के साथ गिरफ्तार कर इतराती है?

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