सीएम को परखने होंगे साजिशकर्ताओं के चेहरे?
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड का इतिहास गवाह है कि सत्ता चलाने के लिए जिसने भी ढुलमुल और शांतभाव से सबको साथ लेकर चलनेे के लिए अपने कदम आगे बढाये उनकी सत्ता पर हमेशा ग्रहण लगता रहा? स्वर्गीय नित्यानंद स्वामी, भगतसिंह कोश्यारी से लेकर नारायण दत्त तिवारी ने सत्ता चलाने के लिए आक्रामक रूख नहीं दिखाया जिसका परिणाम यह हुआ कि उनके अपनों ने ही उन्हें सत्ता चलाने में जमकर रोडे अटकाये और चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पडा और स्वर्गीय पूर्व मुख्यमंत्री नित्यानंद स्वामी को उनके अपनों के कारण ही चंद समय में सत्ता से हाथ धोना पड गया था। उत्तराखण्ड में मौजूदा समय में राज्य के मुख्यमंत्री शालीनता और सबको साथ लेकर सत्ता चलाने में विश्वास रख रहे हैं लेकिन उनकी यह शालीनता उनके अपनों को ही रास नहीं आ रही है और अब उनके दूसरे कार्यकाल मंे भाजपा के ही कुछ दिग्गज नेता जिस तरह से उनकी सरकार को कटघरे में खडा करने का कोई मौका नहीं चूक रहे हैं ऐसे में राज्य के अन्दर अब राजनीतिक पंडित यह कह रहे हैं कि सत्ता चलाने का मूल मंत्र अगर राज्य के मुख्यमंत्री ने आक्रामक राजनीति करके नहीं दिखाया तो यह उनके लिए घातक हो सकता है? ऐसे में मुख्यमंत्री को उन साजिशकर्ताओं के चेहरे भी परखने होंगे जो सामने से तो उनकी जयजयकार के नारे लगा रहे हैं लेकिन पीठ के पीछे उन्हें उत्तराखण्ड से लेकर दिल्ली तक आवाम व भाजपा नेताओं की नजर में कमजोर करने का कुचक्र रच रहे हैं? उत्तराखण्ड मंे यह कहावत भी अब जन्म ले रही है कि राजनेता को दबंगता के साथ फैसले लेने चाहिए और ढुलमुल रवैये से अकसर अपने ही अपनों को राजनीति मंे धोखा देते रहे हैं?
हैरानी वाली बात है कि देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सखा व छोटे भाई के रूप में उभर कर आगे आये राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भ्रष्टाचार, घोटाले व माफियागिरी पर बडा प्रहार करने के लिए आगे आ रखे हैं और उन्होंने जिस तरह से भ्रष्टाचार की जड में प्रहार करना शुरू किया है उससे भाजपा के ही काफी नेता पर्दे के पीछे से अपनी ही सरकार के मुखिया को घेरने का चक्रव्यूह रचने के मिशन मंे बार-बार दिखाई देते आ रहे हैं? उत्तराखण्ड का इतिहास गवाह है कि जब राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चन्द खण्डूरी अपने शासनकाल में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक लडाई लडने के लिए आगे आये हुये थे तो आवाम की नजरों में वह हीरो रहे लेकिन उनके ही कुछ अपनों ने उन्हें गद्दी से हटाने के लिए उत्तराखण्ड से लेकर दिल्ली तक में ऐसा चक्रव्यूह रचा था कि उन्हें एक साजिश के तहत मुख्यमंत्री पद से हटा दिया गया था? वहीं राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आवाम का दिल अपनी सौम्य शैली से जीत चुके हैं और चारो तरफ उनके रूतबे का डंका बज रहा है लेकिन इसके बावजूद भी भाजपा के कुछ राजनेता उनकी गद्दी पर गिद्द जैसी नजर लगाये हुये हैं? हैरानी वाली बात तो यह है कि सरकार की नजर में मीडिया के कुछ धराने जो सरकार की आंखों के तारे बनते आ रहे हैं वह सरकार पर तिनकाभर भी आरोप लगने की जांच न करके जिस तरह से सरकार को कटघरे में खडा करने के लिए आगे आ रहे हैं वह फलावर बने पुष्कर के लिए शुभ संकेत नहीं है? इतना ही नहीं काफी मीडिया के लोग जो सरकार के आंगन में हमेशा सरकारी चाश्नी चाटते आ रहे हैं वह भी भाजपा के कुछ राजनेताओं के साथ मिलकर जिस तरह से पर्दे के पीछे रहकर सरकार के मुखिया के खिलाफ साजिशें रच रहे हैं उसकी गूंज क्या राज्य की खुफिया एजेंसियों के कानों में गूंज रही है या वह भी सबकुछ जानते हुए मौनी बाबा बनी हुई है? सरकार के मुखिया भले ही सबको साथ लेकर चलने में विश्वास रख रहे हों लेकिन उन्हें उन चेहरों को भी पहचानना चाहिए जो उनके साथ खडे होकर तो उनके जयकारे लगा रहे हैं लेकिन उनका असली मिशन पर्दे के पीछे कुछ और है? उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री जो कि राज्य की जनता के बीच तो हीरो बन चुके हैं और वह उनके साथ सौम्य शैली में ही पेश आयें लेकिन सत्ता चलाने के लिए उन्हें उन राजनेताओं के साथ आक्रामक राजनीति का रूप दिखाना पडेगा जो उन्हें उत्तराखण्ड से लेकर दिल्ली तक में कमजोर करने का खेल खेलने में जुटे हुये हैं?