उत्तराखण्ड को तराश रहे शिल्पकार पुष्कर

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आदर्श’ बनने की दहलीज पर है पहाड़ी राज्य
सुशासन की नई इबारत लिख रहे हैं सीएम धामी
प्रमुख संवाददता
देहरादून। एक कलाकार जब भी किसी नवीन आकृति को बनाने की चेष्टा करता है तो उसका मस्तिष्क अपनी आकृति की अल्प पूर्ण या कहे कि आंशिक छवि तो जरूर होती है। जिसको को लेकर वह यह धारणा बना लेता है कि जब भी वह आकृति पूर्ण होगी तो वह कैसी दिखेगी। ठीक ऐसी ही अनुभूति हर उस व्यक्ति को होती है जो कुछ बनाना चाहता है या निर्माण करना चाहता है। निर्माण की परिभाषा प्रत्येक क्षेत्र में अलग-अलग होती है और हर निर्माणकर्ता को एक संज्ञा दी जाती है, शिल्पकार। शब्दिक अर्थ की बात करें तो शिल्पकार का अर्थ होता है किसी इमारत को बनाने वाला। हालांकि, भावार्थ में शिल्पकार शब्द के कई मायने देखने को मिल जाते है। जैसे कि, एक शिल्पकार वह होता है जो अपनी शिल्प कला से इमारत तो क्या समाज, कस्बा, जनपद, राज्य, राष्ट्र यहां तक कि विश्व को सुसज्जित रूप से तराशने की काबलियत रखता है। ऐसे शिल्पकारों का समाज में जनप्रतिनिधि कहा जाता है, जो अपनी बुद्धिमता की कला से समाज को तराश कर उसे बेहतर बनाते है। भगवान की कृपा से एक ऐसा ही शिल्पकार जनप्रतिनिधि उत्तराखण्ड राज्य को भी मिला है, जिसने इस पहाड़ी राज्य को तराशना शुरू कर दिया है। वह शिल्पकार और कोई नहीं बल्कि उत्तराखण्ड राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी है, जिन्होंने अपने विवेक कुशलता और बुद्धिमता के दम पर राज्य को विकास के पथ पर अग्रसर किया हुआ है। कुछ दिन पूर्व ही उत्तराखण्ड राज्य का स्थापना दिवस हर्षाल्लास के मनाया गया। भले ही इस बात पर किसे ने गौर न किया हो लेकिन यह स्थापना दिवस ऐतिहासिक रहा क्योंकि पहली बार ऐसे देखने को मिला कि किसी एक मुख्यमंत्री ने एक ही राजनैतिक दल की अलग-अलग सरकार के कार्यकाल में यह स्थापना दिवस मनाया हो। इसे उत्तराखण्ड की जनता का स्नेह नहीं कहेंगे तो और क्या कहेंगे कि उन्हें अपने मुखिया के रूप में पुष्कर ही चाहिए। उत्तराखण्ड को एक आदर्श राज्य बनाने की दहलीज पर है और इसका श्रेय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अतिरिक्त और किसी को नहीं जा सकता। केन्द्र सरकार, पड़ोसी राज्यों की सरकारों के साथ जो संतुलन उत्तराखण्ड सरकार के मुखिया ने बना रखा है, उसका तो कोई जवाब ही नहीं है। उनकी इसी कार्यकुशलता के चलते उत्तराखण्ड में सुशासन स्थापित होता हुआ दिखाई दे रहा है।
पड़ोसी राज्यों से समन्वय बनाना आसान नहीं होता। हालांकि इस कठिनाई भरे कार्य को पुष्कर बड़ी आसानी के साथ अंजाम तक पंहुचा रहे है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखण्ड राज्य में विकास कार्य निरंतरता के साथ हो रहे और जो घोषणाएं सरकार द्वारा की जा रही है उन्हें भी युद्धस्तर पर धरातल पर उतारा जा रहा है। स्थापना दिवस के अवसर पर उन्होंने विकास पुस्तिका ‘‘संकल्प नए उत्तराखण्ड का’’ का विमोचन करते हुए कई विकास कार्यों का उल्लेख भी किया था। उन्होंने राज्य की जनता को संबोधित करते हुए कहा था कि प्रदेश के विकास के संकल्प को सिद्धि तक पहुंचाने के लिये मंथन एवं चिंतन शिविरों का भी आयोजन किया जा रहा है। इसमें आने वाले विचार एवं सुझाव राज्य की विकास दर, राजस्व वृद्धि आदि के साथ राज्य हित में हम क्या बेहतर कर सकते हैं, इसकी राह प्रशस्त होगी तथा हम देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करने में सहायक होगी। उन्होंने मीडिया को लोकतंत्र का मजबूत स्तंभ बताते हुए कहा था कि मीडिया जहाँ एक ओर सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं, कार्यक्रमों और नीतियों को जनता के मध्य ले जाने का कार्य करती है, वहीं दूसरी ओर जनहित के मुद्दों और आम लोगों की समस्याओं की ओर भी सरकार का ध्यान आकर्षित करती है। मीडिया द्वारा प्रदेश के विकास में अपनी रचनात्मक भूमिका निभाये जाने की उन्होंने सराहना की थी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखण्ड को आदर्श राज्य बनाने की दिशा में जो कदम उठाया है उसकी सराहना हर कोई कर रहा है और यह प्रत्येक उत्तराखण्डवासी के लिए गौरव की बात है। पुष्कर जिस तरह से एक निपुण शिल्पकार की तरह ‘आदर्श उत्तराखण्ड’ का निर्माण करने में जुटे हुए है, उसको देखकर अब उनके राजनीतिक और सामाजिक विरोधियों की जिव्हा पर भी ताले लग गए है।

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