डेंगू के डंक से गरीबों में मचा रहा हाहाकार
प्राईवेट अस्पतालों में महंगा इलाज कराने को मजबूर आवाम
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड के स्वास्थ्य मंत्री को शायद इस बात का इल्म नहीं है कि राजधानी में चप्पे-चप्पे पर किस तरह से डेंगू का तांडव गरीबांे में हाहाकार मचाये हुये है? सरकारी अस्पतालों पर आवाम आज भी विश्वास नहीं कर पा रहा और वह अपने जीवन को बचाने के लिए जिस तरह से प्राइवेट अस्पतालों में महंगा इलाज कराने के लिए दौड रहा है उससे डेंगू का डंक आवाम को इन दिनों इतना दर्द दे रहा है शायद स्वास्थ्य मंत्री को यह दिखाई ही नहीं दे रहा? आवाम सवाल उठा रहा है कि आखिरकार डेंगू के मच्छर पर प्रहार करने के लिए राजधानी में आखिर कहां फॉगिंग चलाई जा रही है? अगर सरकार के स्वास्थ्य मंत्री को इस बात का अहसास होता कि वर्षों से राजधानी में डेंगू का डंक आवाम को मौत के आगोश में समाता रहा है तो वह इस डेंगू से बचने के लिए जरूर कोई बडा प्लान तैयार करते लेकिन राजधानी के अन्दर डेंगू के तांडव से स्वास्थ्य मंत्री किसी को राहत दिला पा रहे होंगे ऐसा संभव नजर नहीं आ रहा ऐसे में कैसे उत्तराखण्ड आदर्श राज्य बन जायेगा यह अपने आपमें अब कई सवाल पैदा कर रहा है?
उत्तराखण्ड में जिस तरह से कोरोना काल में राज्यवासियों ने अस्पतालों में भर्ती होने के लिए बडी-बडी सिफारिशें लगाई और एक ऑक्सीजन सिलेंडर लेने के लिए भी उन्होंने पापड बेले वह किसी से छिपा नहीं रहा? उत्तराखण्ड में कोरोना काल में सरकार का स्वास्थ्य महकमा कितना बडा फेल साबित हुआ था यह किसी से छिपा नहीं है और सरकारी सिस्टम के फेल होने का खामियाजा दर्जनों परिवारों को अपने परिवार के सदस्य हमेशा के लिए गवाकर भुगतना पडा था? कोरोना काल के बाद ऐसा आभास हुआ था कि शायद उत्तराखण्ड सरकार का स्वास्थ्य महकमा हमेशा गंभीर बीमारियों को लेकर अलर्ट मोड में दिखाई देगा लेकिन आवाम का यह सोचना पिछले कुछ समय से फिर गलत साबित हो रहा है? राजधानी के अन्दर चिकन गुनिया और डेंगू का तांडव जिस तरह से आम इंसान के सामने जिंदगी व मौत को चुनौती दे रहा है उससे राजधानी के सैकडों परिवार डरे और सहमें हुये हैं? हैरानी वाली बात है कि राजधानी मंे चप्पे-चप्पे पर डेंगू का डंक आवाम को अस्पतालों तक पहुंचा चुका है लेकिन राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डा0 धन सिंह रावत ने डेंगू से आवाम को बचाने के लिए कोई बडा कदम अब तक उठाया हो ऐसा राजधानी में तो किसी को देखने को नहीं मिल पाया है? कितनी हैरानी वाली बात है कि राजधानी में सरकारी अस्पतालों पर आज भी आवाम भरोसा नहीं कर पा रहा है कि उसे वहां पर बेहतर इलाज मिल पायेगा? देखने में आ रहा है कि राजधानी के सभी प्राइवेट अस्पताल मरीजों से खचाखच भरे हुये हैं और वहां एक बेड का किराया सुनकर भी गरीब इंसान डरा और सहमा हुआ है लेकिन डेंगू की जकड में आये अपने किसी भी सदस्य को बचाने के लिए वह उन्हें महंगे अस्पतालों में भर्ती कराने के लिए मजबूर हो रखा है और स्वास्थ्य मंत्री ने अभी तक ऐसा कोई सरकारी आदेश शायद जारी नहीं किया कि डेंगू के टेस्ट सभी लैबों में सबसे कम कीमत पर होंगे? डेंगू के टेस्ट कराना ही एक आम इंसान के लिए बडी चुनौती बना हुआ है उससे राज्य के अन्दर अब यह सवाल खडे होने लग गये हैं कि अगर राज्य का स्वास्थ्य महकमा वर्षों बाद भी आम इंसान को डेंगू जैसी बीमारी से बचा पाने में भी सफल नहीं हो पा रहा है तो राज्य में सरकारी स्वास्थ्य सेवायें कैसे पटरी पर आ रखी होंगी इसका अंदाजा अपने आप लगाया जा सकता है? राजधानी में डेंगू का डंक हाहाकार मचाये हुये है ऐसे में सरकारी सिस्टम कहां डेंगू से बचाव के लिए फॉगिंग करा रहा है यह अभी भी एक रहस्य ही बना हुआ है?