विधायक उमेश का सरकार पर पलटवार

0
214

आरोपः दोषियांे को बचा सकती है भाजपा सरकार
सीबीआई-ईडी से कराये मनी लॉडरिंग प्रकरण की जांच
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के औद्योगिक सलाहकार रहे केएस पंवार की पत्नी की कम्पनी पर दो सौ करोड रूपये की मनी लॉडरिंग का आरोप खानपुर के विधायक ने लगाया था और मामले की जांच की मांग सरकार से की थी इस पर सरकार ने इस मामले की जांच अपराध शाखा को सौंप दी थी लेकिन आज विधायक ने सरकार पर पलटवार करते हुए खुला आरोप लगाया है कि इस मनी लॉडरिंग में दोषियों को भाजपा सरकार बचा सकती है इसलिए इस मामले की जांच सीबीआई या ईडी से कराई जाये अन्यथा वह उच्च न्यायालय की शरण में जायंेंगे। विधायक ने जिस तरह से इस मनी लॉडरिंग को लेकर सरकार पर पलटवार करते हुए उसकी जांच को लेकर सवाल खडा किया है उससे अब यह मामला और तूल पकडता हुआ दिखाई दे रहा है क्योंकि यह मामला पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के औद्योगिक सलाहकार की पत्नी से जुडा हुआ है और यह मामला पहले भी उमेश कुमार उठा चुके थे और कांग्रेस ने भी इस मनी लॉडरिंग मामले को विधानसभा में उठाया था लेकिन सरकार ने इस पर चुप्पी साध ली थी।
आज गंग नहर किनारे स्थित कैंप कार्यालय में पत्रकारों से रूबरू होते हुए खानपुर के निर्दलीय विधायक उमेश कुमार ने कहा कि 2017 में तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने केएस पंवार को अपना औद्योगिक सलाहकार नियुक्त किया था पंवार की पत्नी जो कि गृहणी थी वह एक चिटफंड कम्पनी में निदेशक थी। 2018 में आरबीआई ने सूचना दी थी कि यह कम्पनी गलत है और इसके द्वारा एक सौ अस्सी करोड की मनी लॉडरिंग की गई है। विधायक उमेश कुमार ने बताया कि इसके बाद तत्कालीन मुख्य सचिव ने मामले में जांच के आदेश दिये लेकिन वह जांच रातो-रात गायब हो गई थी। विधायक ने मीडिया के सामने खुलासा किया कि इसके बाद उन्होंने अपनी टीम के साथ खुद ग्राउण्ड पर आकर जांच पडताल की और सौ लोगों को चिन्हित कर पता लगाया जिनके नाम एफडी हुई और उनकी तलाश शुरू की गई तो सनसनीखेज खुलासा हुआ कि कम्पनी में मृतकों और बच्चों के नाम पर एफडी बनाई या फिर उन लोगांे के नाम एफडी बनाई जो मजदूरी या खेती आदि करते हैं और उन्हें इस एफडी की जानकारी तक नहीं है। विधायक ने बताया कि लोगों से मिलने पर इसका खुलासा हुआ। उन्होंने बताया कि मनी लॉडरिंग मामले की जांच के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा था फिर जांच हुई तो पुलिस को इसमें महत्वपूर्ण सबूत भी मिले। वहीं 2020 में विधानसभा में पूर्व विधायक काजी निजमुद्दीन ने भी इस मामले को उठाया था। वहीं इसके बाद स्पेशल सेल ने 2021 में मामले की जांच शुरू की लेकिन वह जांच भी दब गई लेकिन उसके बाद भी कार्यवाही नहीं हुई। विधायक उमेश कुमार का कहना है कि इस मामले में अब वर्तमान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा जांच बिठाई गई है इसके लिए वह उनका आभार व्यक्त करते हैं। विधायक ने कहा कि अब जांच डीओडब्लू कर रही है जो कि सरकार के आधीन हैं लेकिन मामला पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत से जुडा है और प्रदेश में भाजपा की सरकार है तो ऐसा लगता है कि इस मामले को फिर लटकाने का प्रयास किया जा रहा है। उमेश कुमार ने आशंका व्यक्त की कि सबूतों से भी छेडछाड हो सकती है उन्होंने कहा कि इसका उदाहरण यह है कि वर्तमान सूची से पूर्व मुख्यमंत्री के सलाहकार की पत्नी का नाम गायब है कहा कि वह पूर्व मुख्यमंत्री से पूछना चाहते हैं कि उनके सलाहकार केएस पंवार की पत्नी जो कि गृहणी हैं उनके पास ऐसा कौन सा बिजनेस है कि उनके पास एक सौ अस्सी करोड रूपये आ गया और यह पैसा कहां से आया इसलिए वह मांग करते हैं कि मामले की जांच उत्तराखण्ड सरकार सीबीआई या ईडी से कराये और यह भी अल्टीमेटम दिया कि सरकार यह जांच सीबीआई या ईडी से नहीं करवाती है तो वह इस मामले को लेकर उच्च न्यायालय जायेंगे और मामले की जांच ईडी व सीबीआई से कराने की मांग करेंगे। आज जिस तरह से खानपुर के विधायक उमेश कुमार ने उत्तराखण्ड सरकार को पूर्व मुख्यमंत्री के सलाहकार की पत्नी की कम्पनी द्वारा की गई मनी लॉडरिंग के मामले में सरकार द्वारा कराई जा रही जांच को लेकर पलटवार किया है उससे साफ नजर आ रहा है कि अब यह मामला उत्तराखण्ड से लेकर दिल्ली तक काफी तूल पकडेगा?

LEAVE A REPLY