अंकिता हत्याकांड में सोशल मीडिया पर कौन उगल रहा आग?

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एक एजेंडे के तहत सरकार को निशाने पर लेने का ‘खेल’
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में इन दिनों अंकिता हत्याकांड को लेकर सोशल मीडिया पर एक बडे एजेंडे के तहत सरकार पर निशाना लगाने के लिए कौन-कौन चेहरे पर्दे के पीछे से आग उगल रहे हैं इसका इल्म शायद सरकार को भी नहीं चल पा रहा जिसके चलते उत्तराखण्ड से लेकर देश के कुछ राज्यों में सरकार को निशाने पर लेने का तांडव किया जा रहा है? हैरानी वाली बात है कि सरकार इस मामले में भले ही सभी गुनाहगारों को सख्त से सख्त सजा दिलाने के लिए संकल्पबद्ध दिखाई दे रही हो लेकिन उसके बावजूद भी राज्य के मुखिया को कुछ लोग अस्थिर करने का चक्रव्यूह रचे हुए हैं? बहस चल रही है कि इस मामले में आखिरकार एसआईटी जांच पडताल का मीडिया ट्रायल क्यों कर रही है जिसके चलते आवाम के मन में इस ट्रायल से आये दिन आक्रोश पनप रहा है और वह सरकार के लिए घातक बनता जा रहा है?
उल्लेखनीय है कि अंकिता हत्याकांड के बाद से ही सरकार के मुखिया पुष्कर सिंह धामी सख्त रूख अपनाये हुये हैं और वह राज्यवासियों से लेकर अंकिता के परिवार को भरोसा दिला चुके हैं कि इस मामले में वह गुनाहगारों को सख्त से सख्त सजा दिलायेंगे और फास्ट ट्रैक में मामले की सुनवाई करवाकर गुनाहगारों को उनके अंजाम तक पहुंचायेंगे। मुख्यमंत्री खुद इस मामले की मॉनिटिरिंग कर रहे हैं और मामले की जांच एसआईटी के हवाले कर रखी है जिसमें डीआईजी खुद मामले को लीड कर रही हैं तथा हर पहलू पर वह अपनी जांच पडताल से गुनाह का सच जानने के मिशन में लगी हुई हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अंकिता हत्याकांड में भले ही गुनाहगारों के खिलाफ सख्त रूख अपनाये हुये हों लेकिन सोशल मीडिया पर कुछ चेहरे ऐसे हैं जो अंकिता हत्याकांड की आड में मुख्यमंत्री निशाने पर लेने का खेल खेलने में जुटे हुये हैं। हैरानी वाली बात है कि अगर कुछ लोग अंकिता के पिता के पास जाकर यह कह रहे हैं कि वह मुख्यमंत्री की सहायता न लें और वह खुद उनके लिए पैसा एकत्र करेंगे तो उससे समझा जा सकता है कि इस मामले मंे मुख्यमंत्री को किस मिशन के तहत कमजोर करने का प्रपंच रचा जा रहा है? मुख्यमंत्री ने गुनाहगारों को सबक सिखाने के लिए पुलिस से लेकर फास्ट ट्रैक कोर्ट में उनकी सुनवाई कराने के लिए बीडा उठा रखा है फिर भी अंकिता हत्याकांड को किस मिशन के तहत उबाल दिया जा रहा है यह अब समझ से परे ही दिखाई दे रहा है? सवाल यह है कि सोशल मीडिया पर कुछ लोग सरकार के सही कदम को भी शक की निगाह से देख रहे हैं और उन्हें कटघरे में खडा करने से नहीं चूक रहे ऐसे में सवाल खडे हो रहे है कि राज्य के मुख्यमंत्री किसी भी गुनाहगार को उसका गुनाह सिद्ध होने से पहले उसे सजा दिला सकते हैं? सोशल मीडिया पर इन दिनों एक अजेंडे के तहत कुछ लोग सरकार को घेरने की तैयारी के साथ आगे बढे हुये हैं और जिस तरह से काफी लोग अंकिता हत्याकांड में सरकार को लेकर अपनी सोच को प्रदर्शित कर रहे हैं उसे सरकार शायद पहचान नहीं पा रही है और न ही खुफिया एजेंसियां उन चेहरों को पढ पा रही हैं जो अंकिता हत्याकांड की आड में सरकार के मुखिया को उत्तराखण्ड से लेकर दिल्ली तक अस्थिर करने के अजेंडे पर काम कर रहे हैं? उत्तराखण्ड सरकार के मुखिया पुष्कर सिंह धामी जो कि अंकिता हत्याकांड पर बेहद आहत हैं और ऐसी घटनाओं की कभी पुर्नावृति न हो इसके लिए वह एक मिशन के तहत काम कर रहे हैं तथा राज्य में सभी रिजॉट का सच खंगालने के लिए पुलिस टीमों को मैदान में उतार रखा है इसके बावजूद भी अगर उन्हें सोशल मीडिया पर कुछ ताकतें निशाने पर लेने का चक्रव्यूह रच रही है तो ऐसे चेहरों को बेनकाब करने का जिम्मा पुलिस और खुफिया एजेंसियों का है?

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