भ्रष्ट तंत्र की नौकरियों पर चला चाबुक

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प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड के विधानसभा में वर्षों से विधानसभा में बैकडोर से होती आ रही भर्तियों पर जब उत्तराखण्ड के अन्दर मीडिया और विपक्ष ने शोर मचाना शुरू किया और बेवजह सरकार के मुखिया को निशाने पर लेने का चक्रव्यूह रचा गया तो मुख्यमंत्री ने इन भर्तियों में हुये घोटालों की जांच के लिए विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखा था और यह भी ऐलान किया था कि नियम विरूद्व हुई भर्तियों को निरस्त करने के लिए वह विधानसभा अध्यक्ष से कहेंगे। पिछले बीस दिन सेे विधानसभा में बैकडोर से हुई भर्तियों की जांच के लिए बनाई गई कमेटी ने देर रात विधानसभा अध्यक्ष को अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी जिसके बाद आज विधानसभा अध्यक्ष ने 32 पदों पर भर्ती प्रक्रिया रद्द करते हुए विधानसभा सचिव मुकेश सिंघल को भी निलम्बित कर दिया। विधानसभा अध्यक्ष की इस कार्यवाही से उत्तराखण्ड की राजनीति में आने वाले दिनों में एक बडा भूचाल भी देखने को मिल सकता है?
आज विधानसभा में विधानसभा अध्यक्ष रितू खण्डूरी ने पत्रकारों से रूबरू होते हुए विधानसभा में बैकडोर से हुई 32 पदों पर भर्ती प्रक्रिया को रद्द कर दिया साथ ही विधानसभा सचिव मुकेश सिंघल को भी निलम्बित कर दिया है। बताया जा रहा है कि रिपोर्ट 214 पेज सौंपी गई सिफारिश में कहा गया कि गडबडी थी और नियमों का पालन नहीं हुई न ही चयन समिति का गठन किया गया और न ही कोई विज्ञापन निकाला गया इसके साथ ही समानता का अधिकार का उल्लंघन किया गया। विधानसभा अध्यक्ष ने जिस तरह से आज 32 पदों पर भर्ती प्रक्रिया रद्द की है उससे उत्तराखण्ड के अन्दर अब नई हलचल मचती हुई दिखाई दे रही है। विधानसभा अध्यक्ष ने यह भर्ती प्रक्रिया तब रद्द की है जब इसी माह के अंत में भाजपा का रामनगर में तीन दिवसीय चिंतन शिविर होने जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि राज्य गठन के बाइस सालों में विधानसभा में 48० लोगों को बैकडोर से नौकरी दी गई थी। इन भर्तियों में हुये घोटालों का शोर उस समय मचा जब राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यूकेएसएसएससी में हुई भर्ती घोटाले की जांच एसटीएफ को सौंप दी थी। इस भर्ती प्रकरण में हाकम सिंह रावत से लेकर 41 लोग जेल की सलाखों के पीछे पहुंचे तो एकाएक पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल के कार्यकाल में विधानसभा में बैकडोर से हुई भर्तियों को लेकर उत्तराखण्ड के अन्दर एक बडा भूचाल मच गया और सोशल मीडिया पर भी पुष्कर सरकार को कटघरे में खडा किया जा रहा था। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखण्ड में आज तक विधानसभा में हुई सभी भर्तियों की जांच के लिए विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखा था। विधानसभा अध्यक्ष ने इन भर्तियों में हुये घोटालों की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन कर उसे एक माह के भीतर अपनी रिपोर्ट देने के लिए कहा था। कमेटी के सदस्य रिडायर्ड आईएएस डीके कोटिया, एसएस रावत, व अवनेंद्र नयाल ने अपनी जांच रिपोर्ट बीस दिन में ही पूरी कर देर रात विधानसभा अध्यक्ष को सौंप दी थी। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल व प्रेमचंद अग्रवाल के शासन में नेता, अधिकारियों के परिजनों को नौकरी देने के मामले खूब उछले। कई सूची वायरल हुई और भाजपा संगठन से लेकर संघ से जुडे चंद नेताओं के नाम भी मीडिया की सुर्खियां बने। 2०12 से पूर्व भी ऊंची पहुंच वालों के रिश्तेदारों को भी विधानसभा में एडजस्ट किया गया इतना ही नहीं भाई-भतीजा का आलम यह रहा कि उत्तर प्रदेश से अधिक हो गई थी? मौजूदा समय में विधानसभा सचिवालय में कुल कर्मियों की संख्या 56० से अधिक बताई जा रही है तथा इस भर्ती घोटाले में भाजपा, कांग्रेस के अलावा कई बडे लोगों के रिश्तेदार भी नौकरी पर जमें हुये हैं ऐसी बात अब तेजी से उठने लगी है? यह बात भी सामने आई है कि पूर्व विधानसभा अध्यक्ष स्वर्गीय प्रकाश पंत के कार्यकाल में 98, यशपाल आर्य के कार्यकाल में 1०5, हरबंस कपूर के कार्यकाल में 55, गोविंद सिंह कुंजवाल के कार्यकाल में 15० और प्रेमचंद के कार्यकाल में 72 लोगों को विधानसभा में नौकरी पर रखा गया था। विधानसभा अध्यक्ष ने 2०16 से 2०21 में जो तदर्थ नियुक्तियां हुई थी उसमें अनियमिततायें पाई और जांच समिति ने इन नियुक्तियों को रद्द करने की मांग की थी। विधानसभा अध्यक्ष ने वर्ष 2०16 तक डेढ सौ नियुक्तियां, 2०2० में छह नियुक्तियां और 2०21 में हुई नियुक्तियों को निरस्त करने के लिए शासन को अनुमोदन किया है। इसके साथ वर्ष 2०11 से पहले की नियुक्तियां रेगुलर हैं उस पर भी लीगल राय ली जाने की बात की जा रही है वहीं वर्ष 2०12 से लेकर 2०21 तक की नियुक्तियां तदर्थ थी जिसमें शासन ने नियुक्तियों की आज्ञा दी थी इसलिए शासन को अनुमोदन के लिए भेजा है। विधनसभा अध्यक्ष ने नियुक्तियां रद्द कर राज्य में संदेश दे दिया है कि उत्तराखण्ड में भ्रष्टाचार का कोई कॉलम अब नहीं रहेगा।

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