देहरादून(प्रमुख संवाददाता)। शहर के इनामुल्ला बिल्डिंग निवासी एक महिला ने पुलिस कप्तान को दिये पत्र में दून जेल प्रशासन पर अपने पुत्र की मौत का दाग लगाया है और कहा है कि उसकी हालत खराब होने पर भी उसे अस्पताल में भर्ती नहीं कराया गया और जब उसकी हालत देर रात ज्यादा खराब हुई तब उसे अस्पताल लाया गया जहां उसकी मौत हो गई। महिला ने जेल प्रशासन के खिलाफ अपने पुत्र की हत्या का मुकदमा दर्ज करने की शिकायत भी दी है।
पुलिस कप्तान को बीती रात गांधी रोड इनामुल्ला बिल्डिंग निवासी मसरीन ने शिकायती पत्र दिया कि वह एक विधवा एवं गरीब महिला है और कहा कि उसके पुत्र बाबर शजाउद्दीन को कोतवाली थाने में एनडीपीएस की अवैध बरामदगी में निरूद्व कर तीन सितम्बर को जेल भेज दिया गया था। पत्र में कहा गया कि जमानत प्रार्थना पत्र पन्द्रह सितम्बर को निहित है और बताया कि जैसे-तैसे करके उसने पुत्र से मिलने जब जेल पहुंची तो बाबर की हालत देखकर अचंभित रह गई थी उसकी हालत ठीक नहीं थी तथा अचेत अवस्था में पडा था।
महिला ने शिकायती पत्र में कहा कि जेल प्रशासन से उसने प्रार्थना करी कि उसके पुत्र की हालत ठीक नहीं है तथा अस्पताल में उचित देखभाल के लिए भेज दें। महिला ने कहा कि उसने अधिवक्ता के माध्यम से एडीजे द्वितीय के समक्ष बाबर की हालत पर चिंता जताते हुए बाबर को जेल अस्पताल से ट्रासफर कर सरकारी अस्पताल में भेजने की प्रार्थना की थी परंतु नौ सितम्बर को भी जेल प्रशासन ने उक्त प्रार्थना पत्र पर संज्ञान नहीं लिया तथा बाबर को जेल में ही रखा जिस कारण बाबर की हालत खराब हो गई और जेल में सांय लगभग आठ बजे के करीब उसकी मृत्यु हो गई। शिकायती पत्र में कहा गया कि परिवार को रात दस बजे फोन करके दून अस्पताल बुलाया गया। महिला ने आरोप लगाया कि पुत्र की मृत्यु जेल प्रशासन की लापरवाही के कारण हुई है इसलिए जेल प्रशासन के विरूद्व उसके पुत्र की हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाये। महिला द्वारा जिस तरह से जेल प्रशासन पर अपने पुत्र की हत्या का दाग लगाया गया है उससे जेल प्रशासन अब कटघरे में खडा हुआ है?
