प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड की कुछ जेलों से कुख्यात बदमाश गैंग चला रहे हैं और इसका खुलासा लम्बे समय से ‘क्राईम स्टोरीÓ करता आ रहा है लेकिन जेल के आला अफसरों ने इस पर कोई बडा एक्शन लेने के लिए अपने कदम आगे नहीं बढाये जिसके चलते चंद जेलों से अपराध का साम्राज्य चल रहा है जो कि उत्तराखण्डवासियों के लिए शुभ संकेत नहीं है? हैरानी वाली बात है कि जेल में आने वाले हर बंदी व कैदी की सख्त तरीके से तलाशी ली जाती है लेकिन उसके बावजूद अपराधियों के पास कहां से मोबाइल फोन पहुंच जाते हैं यह हैरान करने वाली बात है? जेलों से कुख्यात बदमाशों का नेटवर्क चलना इस बात की ओर इशारा कर रहा है कि शायद कुछ जेलें सिर्फ कमजोरों का दमन करने के लिए ही बनी हुई हैं और बडे-बडे कुख्यात बदमाशों के लिए चंद जेलों में उन्हें आलीशान जिंदगी का सुख मिलना कहीं न कहीं सरकार के लिए एक बडा चिंता का विषय होना चाहिए? उत्तराखण्ड का गृह महकमा मुख्यमंत्री के पास है इसलिए जेलों में चल रहे अपराधियों के साम्राज्य पर नकेल लगाने का दायित्व भी उनका है लेकिन हैरानी वाली बात है कि राज्य के डीजीपी जेलों से चल रहे गैंगों पर नकेल लगाने के लिए क्यों आगे नहीं आ रहे यह हैरान करने जैसा ही नजर आ रहा है? सितारगंज जेल से एक साथ पैसठ मोबाइल मिलना किसी बडी अनहोनी की घटना की ओर इशारा कर रहा है अब देखना है कि क्या सरकार इस बात की बडी जांच कराने के लिए आगे आयेगी कि राज्य की चंद जेलों में आखिरकार कुख्यात बदमाशों के पास मोबाइल फोन कहां से आ रहे हैं और वह इन मोबाइल फोनों का इस्तेमाल किस मिशन को लेकर कर रहे हैं?
उल्लेखनीय है कि लम्बे समय से ‘क्राईम स्टोरीÓ खुलासा करता आ रहा है कि कुछ जेलों में कुख्यात अपराधियों और जेल प्रशासन के कुछ लोगों की मिलीभगत से मोबाइल फोन के सहारे लोगों को आतंकित करने का खेल चल रहा है और कुछ जेलों में जेल के कुछ लोग कुछ कुख्यात बदमाशों को आगे रखकर जेल में आने वाले नये बंदियों को आंतकित कराकर उनसे वसूली का खेल खेलते हैं? इस खेल की गंूज जेल प्रशासन के कुछ अफसरों के कानों में भी गूंजी थी लेकिन चंद अफसरों ने इन खबरों को यह कहकर हवा में उडा दिया था कि राज्य की सभी जेलें अभेद हैं जहां कोई भी अपराधी न तो मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर सकता है और न ही जेल से किसी को धमकाया जा सकता है? उत्तराखण्ड में चंद जेलों से लगातार काफी कुख्यात बदमाश अपना गैंग चला रहे हेैं और वह लगातार मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रहे हैं लेकिन इसके बावजूद भी जेल प्रशासन के कुछ अफसर इन सब मामलों पर कहीं न कहीं पर्दा डालते आ रहे हैं जो कि सरकार के लिए भी एक बडा चिंता का विषय बनता जा रहा है? बताया जाता है कि पिछले माह चमोली जैसी छोटी जेल में भी एक सजा आफता अपराधी के पास से जेल के एक कर्मचारी ने मोबाइल फोन बरामद किया था जिसकी शिकायत उसने जेलर से भी की थी लेकिन जेलर ने उस मोबाइल फोन की बरामदगी पर अपराधी के खिलाफ मुकदमा कायम करने के लिए कोई कार्यवाही नहीं की तो उसके बाद मोबाइल बरामद करने वाले जेलकर्मी ने उस मोबाइल फोन में छिपे हर राज को बेनकाब करने के लिए उसे राज्य की एसटीएफ के हवाले कर दिया था और अब चर्चा है कि मोबाइल बरामद करने वाले जेलकर्मी पर ही आरोपों का दाग लगाकर उसे पौडी जेल में ट्रांसफर कर दिया गया है? हैरानी वाली बात है कि सितारगंज जेल में नये जेल अधीक्षक अनुराग मलिक ने कार्यभार ग्रहण कर जेलकर्मियों के साथ जेल की बैरकों एवं परिसर में सर्च ऑपरेशन चलाया और बैरकों की तलाश और मैदान की खुदाई करने पर करीब साठ मोबाइल फोन चार्जर बैटरी और कुछ सामान मिला था और यह सभी मोबाइल एंड्रायड थे। सवाल यह उठता है कि आखिरकार जेल में इतनी बडी संख्या में आखिर किसके इशारे पर यह मोबाइल फोन जेल के अन्दर पहुंचे थे और उसके सहारे कुछ कुख्यात अपनी साजिश का खेल खेलने की रणनीति पर काम कर रहे थे?
