राजनीतिक अनिश्चितता के भंवर में फंसी रही उत्तराखंड की सरकारें
आवाम की नजर में सीएम बेदाग लेकिन चंद मंत्री निशाने पर
उत्तरकाशी(चिरंजीव सेमवाल)। उत्तराखंड अधीनस्थ चयन आयोग की बच्चों में हुई गड़बड़ी के बाद उत्तराखंड की राजनीति में भूचाल आ गया है। माना जा रहा है कि कुछ दिनों में उत्तराखंड के दो तीन मंत्रियों की छुट्टी होने की सम्भावनायें तेज हो गई हैं? राजनीति के पंडितों की माने तो उत्तराखंड की राजनीति में एक पुनः अनिश्चितता और इशारा हो रहा है। हालांकि इस बार खतरा मुख्यमंत्री की कुर्सी पर नहीं बलिक धामी कैबिनेट के दो-तीन मंत्रियों की कुर्सी पर अधिक मंडरा रहा है जो सोशल मीडिया के निशाने पर इन दिनों आ रखे हैं?
सूत्रों की माने तो डबल इंजन की सरकार डबल अटैक करने के मुड में है। इधर पार्टी आलाकमान बहुत जल्द उन मंत्रियों की कुर्सियों का फैसला कर सकती जिन मंत्रियों पर आरोप के दाग लगे हैं। अब उत्तराखंड से लेकर दिल्ली तक सबकी निगाहें भाजपा आलाकमान के फैसले पर टिकी हैं। अब देखना होगा कि भाजपा किसकी कुर्सी हिलाती है और किसको मौका देती है? गौरतलब है कि उत्तराखंड राज्य पृथक होने सी ही पहले मुख्यमंत्री स्वर्गीय नित्यानंद स्वामी के कार्यकाल से ही सीएम की कुर्सी बदलने के बीज बोए गए थे। एक स्वर्गीय एनडी तिवारी को छोड़कर के कोई भी मुख्यमंत्री अभी तक 5 साल पूरे सरकार नहीं चला पाया यही वजह रही कि 22 वषों में छोटे से राज्य ने 11 मुख्यमंत्री दें दिये। पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय नित्यानंद स्वामी, जनरल भुवन चंद खंडूरी, रमेश पोखरियाल निशंक विजय बहुगुणा, हरीश रावत, और त्रिवेंद्र सिंह रावत , तीरथ सिंह रावत,सरकारें भी राजनीतिक अनिश्चितता के भंवर में फंसी और उनको अपनी कुर्सियों को बिना समय पूरा किए ही छोड़ना पड़ा। इससे राजनीतिक दलों को भले कोई असर ना पड़ता हो। लेकिन, राज्य को बड़ा नुक्सान उठाना पड़ रहा है।
विधानसभा नियुक्तियों से उठे सरकार के मंत्रियों पर सवाल
महज 70 विधायक वाले छोटे हिमालय राज्य उत्तराखंड में राज नेताओं के भाई-भतीजावाद और नकल माफिया की ओर से की गई सरकारी नौकरियों की सौदेबाजी ने पात्र युवाओं का हक मारा है। पिछले दो दशक से लगातार बेरोजगारों को छला जा रहा है। माफिया, नौकरशाह और राजनेताओं नापाक गठजोड़ करके युवाओं के सपनों के सौदागर बने हुए हैं। अब जबकि इस गठजोड़ के कारनामे उजागर होनेलगे तो युवा आक्रोशित हैं। राज्य के पढ़े लिखे होना हार युवक सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन कर रहे हैं। विपक्ष आन्दोलन को हवा दे रहा है। लोकगायक अपनी नई रचनाओं से युवा ताकत को जागृत कर रहे हैं। इसी बहाने अंदरखाने सियासत भी तेज हो गई है।
विरोध के माहौल के बीच एक लोकगायक ने परिदृश्य से हटकर नया गीत बनाया है, जो सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हो रहा है। उत्तराखंड का लोकगायक नरेन्द्र सिंह नेगी का लोकतंत्र मां तुम जनसेवक राजा होगें, गाने से युवाओं में नया जोश भर दिया है। मौजूदा समय में पुष्कर सिंह धामी उस सरकार के मुखिया हैं जिसे जनता के प्रचण्ड बहुमत के साथ लगातार दूसरी बार सत्ता सौंपी है। धामी नौकरी में हुई धांधली की अपने राज्य की एजेंसी एसटीएफ से जांच करवा रहे हैं। अभी तक लग रहा है कि जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ रही है। धामी भी लगातार जनता को विश्वास दिला रहे हैं कि एक भी दोषी नहीं छूटेगा। सिर्फ इस आशंका पर कि जांच में असली दोषी न छुट जाय।
