संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में आज तक ऐसा कोई पूर्व मुख्यमंत्री देखने को नहीं मिला जिसने राज्यवासियों का दिल जीतने के मिशन में अपने कदम आगे बढाये हों? आवाम को राज्य के अधिकांश पूर्व मुख्यमंत्रियों ने अपने राजपाठ का अहंकार दिखाया और यही कारण है कि राज्य के जनता के मन में कोई भी पूर्व मुख्यमंत्री अपनी जगह नहीं बना पाया था? हालांकि उत्तराखण्ड के युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जबसे कमान संभाली है तबसे वह राज्यवासियों का दिल जीतने के मिशन में तेजी के साथ आगे बढते चले गये जिसका परिणाम यह है कि वह मात्र एक साल के भीतर ही आवाम के दिलों पर इतना बडा जादू कर गये कि आज पहाड से लेकर मैदान तक आवाम पुष्कर सिंह धामी के जयकारे लगा रही हैै। उत्तराखण्ड के इतिहास में पहली बार ऐसा देखने को मिल रहा है कि राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ-साथ उनकी पत्नी गीता धामी की भी राज्यभर में खूब धूम मच रही है और इसके पीछे उनका उदार हृदय और सबको साथ लेकर राज्य का विकास करने की जो दृढ इच्छा देखने को मिल रही है उससे मुख्यमंत्री की पत्नी भी राज्य के अन्दर अपनी एक बडी पहचान बना चुकी हैं और जिस तरह से वह किसी भी कार्यक्रम में गरीब महिलाओं को अपने सीने से लगाकर उनका दर्द हरती हैं और छोटे-छोटे बच्चों को देखते ही वह अपनी गोद में उठा लेती है उसे देखकर साफ लग रहा है कि पुष्कर सिंह धामी के विकास पथ पर गीता धामी भी उनकी सारथी बनकर उनके साथ उनके मिशन को चार चांद लगा रही हैं।
उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जिस तरह से राज्य की जनता के मन में मात्र अल्प समय में अपनी जगह बनाई और आवाम से किये गये वायदों को वह तेजी से पूरा करने के मिशन में आगे बढते जा रहे हैं उससे उत्तराखण्ड से लेकर दिल्ली तक पुष्कर सिंह धामी आवाम और भाजपा के बडे-बडे राजनेताओं के दुलारे बन चुके है। उत्तराखण्ड को आदर्श राज्य बनाने की चाहत में पुष्कर सिंह धामी तेजी के साथ आगे बढ रहे हैं और उनकी जीवन संगनी गीता धामी भी पुष्कर सिंह धामी के विजन को चार चांद लगाने के लिए उनकी विधानसभा चम्पावत में हर तरफ विकास का एक बडा खाका खीचने के लिए आगे आ रखी हैं। चम्पावत की जनता के लिए पुष्कर सिंह धामी ने वहीं पर अपना कार्यालय भी खोला है और वहां की महिलाशक्ति गीता धामी पर बडा विश्वास कर उन्हें राज्यहित में पुष्कर सिंह धामी के साथ खडे रहने का आशीर्वाद दे रही हैं। बीते रोज देहरादून पुलिस लाइन में जन्माष्टिमी के त्यौहार पर पुष्कर सिंह धामी और गीता धामी ने वहां मौजूद नन्हें मुन्ने बच्चों को जिस सौम्य रूप से अपनी गोदी में उठाकर उन्हें प्यार से दुलार दिया उस दृश्य को देखकर वहां मौजूद लोग यह कहने से भी नहीं चूके कि पुष्कर सिंह धामी और गीता धामी जैसे इंसान आज के युग में देखने को नहीं मिलते क्योंकि इन्हें अपनी सत्ता का तिनकाभर भी अहंकार नहीं है।
