प्रमुख संवाददाता
देहरादून। अधीनस्थ सेवा चयन आयोग में पेपर लीक प्रकरण में जिस तरह से सचिवालय से लेकर काफी लोगों की गिरफ्तारियां हुई है उससे यह मामला काफी तूल पकडने लगा है और अब यह शंकायें भी उठने लगी हैं कि यह घोटाला इतना बडा है कि एसटीएफ उसे अंजाम तक नहीं पहुंचा पायेगी क्योंकि इसमें कुछ सफेदपोशों और बडे लोगों का भी हाथ हो सकता है? उत्तरकाशी के एक जिला पंचायत सदस्य को एसटीएफ ने पेपर लीक प्रकरण में उसे गिरफ्तार किया है उससे राज्य के अन्दर एक हलचल मची हुई है और अब यह बहस भी शुरू हो गई है कि पेपर लीक प्रकरण में जिस तरह से पहली सफेदपोश की गिरफ्तारी हुई है उसके बाद इस मामले की जांच सीबीआई से कराये जाने की मांग भी उठनी शुरू हो गई है। अब इस पेपर लीक घोटाले की जांच सीबीआई से कराने को लेकर उविपा ने मांग की है। वहीं पुलिस अफसर और पूर्व मुख्यमंत्री के साथ जिला पंचायत सदस्य की एकसाथ काफी फोटो सामने आने से बहस छिड गई है कि यह जांच अब एसटीएफ से हटाकर सीबीआई के हवाले कर देनी चाहिए क्योंकि राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी उत्तराखण्ड को भ्रष्टाचारमुक्त करने का खुला संकल्प ले चुके हैं इसलिए अब देखने वाली बात होगी कि क्या जिस तरह से पेपर लीक मामले में चौकाने वाले रहस्य सामने आ रहे हैं वह सरकार के लिए भी एक चिंता का विषय जरूर होगा इसलिए अब राज्यभर की निगाहें इस बात पर लगनी शुरू हो गई हैं कि क्या उत्तराखण्ड के महानायक पुष्कर सिंह धामी इस पेपर लीक मामले की जांच सीबीआई से कराने के लिए हरी झण्डी देंगे?
उल्लेखनीय है कि उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य से भ्रष्टाचार व घोटाले खत्म करने का संकल्प लिया हुआ है और यही कारण है कि उन्होंने कुछ समय पूर्व अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा कराई गई भर्ती में पेपर लीक प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए इसकी जांच एसटीएफ के हवाले की थी। एसटीएफ ने इस मामले की जांच करने के बाद अब तक सचिवालय के दो लोगों सहित काफी लोगों को गिरफ्तार किया है। वहीं इस मामले में उत्तरकाशी के जिला पंचायत सदस्य हाकम सिंह रावत की गिरफ्तारी होने से उत्तराखण्ड के अन्दर शंकाओं का दौर शुरू हो गया है कि क्या इस मामले में हाकम सिंह रावत भी बडा मास्टर माईंड है? अगर वह मास्टर माईंड है तो क्या एसटीएफ उसे रिमांड में लेकर पूछताछ करने के लिए आगे आयेगी? हाकम सिंह रावत का पुलिस अफसरों से लेकर राजनेताओं के साथ सम्बन्ध को लेकर भी काफी चर्चायें सामने आ रही हैं और उसी को लेकर बहस शुरू हो गई है कि अब इस मामले की जांच एसटीएफ से न कराकर सीबीआई से करानी चाहिए। वहीं उविपा के अध्यक्ष मुजीब नैथानी ने आरोप लगाया है कि बिलकुल स्पष्ट हो चला है कि जिस तरीके से नौकरियों में भ्रष्टाचार किया जा रहा है और धीरे-धीरे हाकम सिंह रावत जैसे भाजपा के पदाधिकारियों के नाम इस भ्रष्टाचार में आ रहे हैं वह स्पष्ट कर देता है कि भाजपा को युवाओं के हितों से कोई लेना-देना नहीं है। मुजीब नैथानी ने कहा कि त्रिवेन्द्र सिंह रावत के कार्यकाल में उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष आरबीएस रावत के द्वारा पत्र लिखा गया था कि आयोग के सदस्य उन पर नियुक्तियों के लिए दबाव बना रहे हैं और ऐसी नियुक्तियां न होने पर वह भर्ती को रद्द करना चाहते हैं अत: भर्तियां रद्द न की जायें। अध्यक्ष ने कहा कि त्रिवेन्द्र रावत ने उस पत्र पर कोई कार्यवाही न करते हुए भर्तियां रद्द कर दी थी और आयोग पर उठती उंगलियों से क्षुब्ध हो आरबीएस रावत ने इस्तीफा दे दिया था। मुजीब नैथानी ने आरोप लगाया कि त्रिवेन्द्र सिंह रावत का भर्तियों में अनियमिततायें कराना ही मुख्य उद्देश्य था जिसकी पूर्ति न होने पर आयोग के अध्यक्ष के आग्रह के बावजूद उनके द्वारा भर्तियों को रद्द कर दिया गया जिससे युवाओं का भविष्य अंधकार में चला गया था। अध्यक्ष ने कहा कि त्रिवेन्द्र रावत कार्यकाल में वन दरोगा पद पर ब्लू टूथ के माध्यम से भर्ती घोटाला हुआ था। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में हरिद्वार के एक थाने में दर्ज एफआईआर में हाकम सिंह रावत का नाम प्रमुख था, मगर हाकम सिंह रावत के साथ करीबी के चलते जांच अधिकारियों पर दबाव बनाकर जांच से हाकम सिंह रावत का नाम भी हटा दिया गया था? मुजीब नैथानी ने आरोप लगाया कि त्रिवेन्द्र रावत सीधे-सीधे आयोग में की जा रही भर्तियों के भ्रष्टाचार में शामिल हैं? यद्यपि कई पुलिस अधिकारी भी इसमें शक के दायरे में हैं जो येन-केन प्रकारेण सत्ता का आनंद लेने के चक्कर में संविधान की बजाए इन नेताओं की मिजाजपुर्सी करते रहते हैं। मुजीब नैथानी ने कहा कि हाकम सिंह रावत नौ अगस्त को बैंकॉक से इंदिरा गांधी एयरपोर्ट और फिर जौली ग्रांट एयरपोर्ट पर और फिर वहां से नटवाड़ पहुंचा मगर एसटीएफ सोई रही। उसके बाद तनुज शर्मा से पूछताछ के लिए एसटीएफ नैटवाड़ पहुंची और लंबी पूछताछ के बाद तनुज शर्मा को भी गिरफ्तार कर लिया चर्चा है कि उस समय भी हाकम सिंह वहीं था। उसके बावजूद एसटीएफ ने उसे ढूंढने की कोई कोशिश नहीं की। एसटीएफ के तनुज शर्मा को अपने साथ लेकर जाने के बाद हाकम सिंह ने टोयोटा इनोवा कार से हिमाचल भागने की कोशिश की मगर मोरी पुलिस की सक्रियता से हाकम सिंह को हिरासत में़ लिया गया। अभी तक एसटीएफ ने हाकम सिंह की गिरफ्तारी नहीं दिखाई है। हाकम सिंह भाजपा का जिला पंचायत सदस्य है ,और प्रदेश भाजपा में गहरी पकड़ रखता है और इतनी गहरी पकड़ रखता है। मुजीब नैथानी ने कहा कि ऐसी चर्चाएं हमेशा जन्म लेती रही कि हाकम सिंह अपने रिजॉर्ट में बड़े बड़े अधिकारियों की खूब आवभगत करता था। मुजीब नैथानी ने राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से पेपर लीक मामले की सीबीआई से जांच कराने की मांग की है।
